Autism क्या क्या है,Autism का हिंदी मतलब, परिभाषा बेसिक जानकारी(About Autism meaning in hindi)

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हेलो दोस्तों आज इस आर्टिकल मे हम जानेंगे। Autism meaning in Hindi क्या होता है। Autism का मतलब क्या क्या होता है। Autism के symptom क्या होता है।

दोस्तो हम सभी जानते हैं कि अपने Emotions को शेयर करना अपने intrest शेयर करना कितना natural तरीका होता है कम्युनिकेट करने का। ऐसे में अगर कोई ऐसा नहीं करता है तो हम उसे antisocial समझने लगते हैं। लेकिन हर person के साथ यही बात हो ये तो जरूरी नहीं ना। ये भी हो सकता है कि उसे Autism disease हो जिसकी वजह से उसे communicate करने में problems रहती हो और Relationships को maintain करना भी tough लगता हो।

ऐसे में हमें चाहिए कि हम दूसरों को उनके behavior के लिए जज ना करें और इस disease के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी भी ले ले क्योंकि हेल्थ से जुड़ी जानकारियां लेना हमेशा अच्छा रहता है। इसलिए आज इस Article में हम आपके साथ share कर रहे हैं Autism disease के बारे में detail information। तो इस Article को पूरा जरूर पढ़े और शेयर भी करें ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस बीमारी को जान सकें और समझ सके।

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Autism क्या है? Autism का मतलब क्या है।

तो चलिए शुरू करते हैं Autism एक तरह का Neuro developmental disorder होता है और इस तरह के Disorder के लिए एक broad टर्म है। ASD यानी Autism Spectrum Disorder इस्तेमाल किया जाता है।अब पहली ये समझ लेते हैं कि ये Neuro developmental Disorder क्या है। दूसरे जब कॉम्प्लेक्स जेनेटिक और एन्वायरमेंटल फैक्टर्स मिलकर के ब्रेन डेवलपमेंट को चेंज करने लगते हैं उसे Neuro developmental Disorder कहते हैं यानी इसमें ब्रेन के नॉर्मल फंक्शन सपाट होते हैं।

वैसे तो Disorder का पता बचपन में ही चल जाता है लेकिन ये Adults होने तभी बने रह सकते हैं और बहुत ही रेयर cases में ऐसा भी होता है जब Adults होने के बाद भी इन disease को आइडेंटिफाई नहीं किया जा पाता। इन न्यूरो developmental Disorder से कई disease Disorder आती हैं और आपको इनके नाम भी जान लेने चाहिए।

ये Disorder है अटेंशन डेफिसिट हाइपर एक्टिव,Disorder developmental पेंटल कॉर्डिनेशन Disorder ,पीआईसी Disorder , इंटलेक्चुअल डिसएबिलिटी ,Autism Spectrum Disorder स्पेसिफिक लर्निंग Disorder ,चाइल्ड ऑन सेटलमेंट Disorder और स्पीच साउंड Disorder तो इन सभी में से आवाज हमें डीटेल में जानना है।

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Autism Spectrum Disorder के बारे में इसलिए इसके बारे में ज्यादा जानते हैं। इस तरह के Disorder में पर्सन को कम्यूनिकेट करने में प्रॉब्लम feel होती है। उसे social interaction करना काफी ज्यादा कठिन लगा करता है। इस disease को फेस कर रहे लोगों में डिस्ट्रिक्ट behavior पाया जाता है। उनके इंट्रेस्ट में कुछ नयापन नहीं देखा जाता और रेपुटेशन उनके behavior में नजर आता है।

ये disease पूरी दुनिया में पाई जाती हैं और लड़के और लड़कियों में इसका Ratio फोर वन का होता है यानी जहां सौ में से चार लड़कों में disease पाई जा सकती है वहीं सौ में से केवल एक लड़की में ही ये disease मिलती है। टाइम के साथ Autism cases में काफी बढ़ोतरी भी होती जा रही है जिसका रीजन कुछ एक expert environmental चेंजेस को मानते हैं तो कुछ expert के अकॉर्डिंग इसका रीजन अवेयरनेस बढ़ना और ज्यादा डायग्नोसिस होना है।

इस disease के प्रति Aware होना कितना ज्यादा जरूरी है आपको इस बात से पता चल जाएगा कि 2 अप्रैल को वर्ल्ड Autism अवेयरनेस डे मनाया जाता है ताकि पूरी दुनिया को इस बीमारी के बारे में ज्यादा से ज्यादा पता चल सके वह अवेयर हो सके और सही टाइम पर diagnos भी करा सके। ये डाउन सिंड्रोम से भी ज्यादा तेजी से बढ़ने वाली disease है और इसके प्रति अवेयरनेस इतनी बड़ी नहीं है। इसीलिए ये disease रफ्तार पकड़ रही है।

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Autism के प्रकार

Autism कई तरह का होता है और उसके फाइव डिफरेंट सब टाइप्स भी होते हैं। पहला इंटलेक्चुअल इन पेमेंट यानी बौद्धिक कहानी के साथ या इसके बिना होने वाला Autism दूसरा है लैंग्वेज इम्प्लीमेंट यानी भाषा होने के साथ या इसके बिना होने वाला Autism तीसरा है। किसी नॉन मेडिकल या जेनेटिक कंडीशन या environmental फैक्टर के साथ जुड़ा हुआ Autism और चौथा ही किसी न्यूरो डेवलप्ड मेंटल मेंटल या behavior Disorder से जुड़ा हुआ।

Autism यहां आपको बता दे कि कैडिटोनिया वो behavior सिंड्रोम होता है जिसमें person नॉर्मली move नहीं कर पाता है और पांचवा जिसमें एक person में एक से ज्यादा symptoms मिल सकते हैं और Autism के इन five सब टाइप्स के बारे में जान लेने के बाद अब इसके सिम्पटम्स को समझें उसके लक्षण जनरली अर्ली childhood में ही पता चल जाते हैं यानि 12 से 24 महीने की उम्र में इस तरह के सिम्पटम्स में बच्चे के लैंग्वेज और सोशल डेवलपमेंट में डिले देखा जा सकता है।

Autism के सिम्पटम्स को दो कैटिगरीज में बांटा गया है। पहला है प्रॉब्लम्स विद कम्यूनिकेशन इन सोशल इंटरैक्शन दूसरा है restricted or repeated pattern on behavior and एक्टिविटीज। अगर हम प्रॉब्लम्स विद कम्यूनिकेशन इन सोशल इंटरैक्शन कैटिगरी की बात करे तो इसमें बहुत सारे सिम्पटम्स देखे जा सकते हैं जैसे कम्यूनिकेशन issue होना जिसमें इमोशंस और इंटरेस्ट शेयर करने में दिक्कत आना शामिल है।

इसी तरह आई कॉन्टैक्ट करने में प्रॉब्लम होना बॉडी लैंग्वेज समझने में दिक्कत आना और रिलेशन डेवलप करने में difficulty होना इस कैटिगरी के सिम्पटम्स होते हैं जबकि repeated pattern on behavior और एक्टिविटीज कैटिगरी में ये सिम्पटम्स देखे जा सकते हैं। repeated moments और स्पीच pattern होना अपने स्पेसिफिक। और behavior के लिए रिजिड रहना और आसपास से मिलने वाले स्पेसिफिक sensitive इन्फॉरमेशन के लिए सेंसिटिविटी बढ़ना या घटना Autism बच्चों को किस तरह अफेक्ट करता है।

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यह जानने के लिए आप ये सिम्पटम्स देखिए कि ऐसे बच्चे अपनी एज ग्रुप के बच्चों जैसा डेवलपमेंट नहीं कर पाते। उन्हें बोलना शुरू करने में परेशानी होती है या उनकी लैंग्वेज स्किल्स कमजोर होती है। ऐसे बच्चे दूसरों से इंटरैक्ट करने में प्रॉब्लम फील करते हैं और उसे नापसंद भी करने लगते हैं। उन्हें नींद लेने में परेशानी हो सकती है और अपने आसपास का माहौल थोड़ा भी बदले तो उन्हें परेशानी महसूस होती है। उन्हें अकेले रहना पसंद आने लगता है।

अपनी बात बोलने पर भी वो अपना नाम सुनकर रिस्पॉन्स नहीं देते हैं। अपने और दूसरों के इमोशंस को समझना उनके लिए बहुत मुश्किल होता है। वो एक ही बात को बार बार दोहराते हैं। लाइट और साउंड के लिए वो बहुत ज्यादा सेंसिटिव होते हैं। उनमें कॉर्डिनेशन की कमी पाई जाती है। उन्हें टेंशन रहती है और उनका behavior अग्रेसिव हो जाता है। इसीलिए ये बहुत जरूरी हो जाता है कि पेरेंट्स अपने न्यू बॉर्न बेबी की एक्टिविटीज पर पूरा ध्यान दें और कुछ भी नॉर्मल से अलग लगे तो बिना पैनिक किए डॉक्टर से कंसल्ट कर ले कि अगर प्रॉब्लम हो तो उसे बढ़ने से पहले ही संभाला जा सके और अब इन सिम्पटम्स के बाद Autism के रीजंस जानना भी बहुत जरूरी हो जाता है।

Autism के मुख्य कारण

आईएस के बारे में जानते हैं। Autism होने का एक रीजन तो अभी तक पता नहीं चल पाया है लेकिन रिसर्च बताती है कि इसका कोई एक रीजन नहीं होता है बल्कि कई सारे रीजंस मिलकर के Autism कर सकते हैं और Autism के रीजंस हो सकते हैं। बचपन में किसी को Autism होना जेनेटिक म्यूटेशन होना जेनेटिक Disorder होना लो बर्थ वेट होना। बच्चे के पेरेंट्स की एज काफी ज्यादा होना मेटाबॉलिक के बैलंस होना और environmental टॉक्सिंस या हैवी मेटल्स के ज्यादा कॉन्टैक्ट में आना।

Autism के डायग्नोसिस के बारे में जानें और उसमें कई स्क्रीनिंग जेनेटिक टेस्ट शामिल होते हैं जैसे डेवलप्ड मेन्टल स्क्रीनिंग के अर्लीएज में ये पता लग जाए कि बच्चे को Autism है या नहीं और Autism होने पर जल्दी डायग्नोसिस किया जा सके। इसके अलावा जेनेटिक्स disease का पता लगाने के लिए डीएनए टेस्टिंग होती है और behavior एवं ट्यूशन विजुअल इन ऑडियो टेस्ट कंप्यूटेशनल थेरेपी स्क्रीनिंग भी हुआ करती है।

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Autism के डायग्नोसिस के बाद इसका इलाज किया जाता है और आपको बता दे कि Autism का कोई इलाज नहीं होता है लेकिन थेरेपी इस ट्रीटमेंट के जरिये इसमें काफी राहत मिल जाती है। इस ट्रीटमेंट में कई थेरपी दी जाती हैं जैसे behavior थेरेपी फिजिकल थेरेपी स्पीच थैरेपी प्ले थैरेपी ऑक्युपेशनल थेरेपी मसाज और मेडिटेशन टेक्निक्स।

हर पर्सन इन ट्रीटमेंट्स के लिए अलग अलग तरह से रिस्पांस देता है। यानी कुछ पेशेंट्स को बहुत फायदा होता है तो कुछ को ज्यादा फायदा नहीं मिल पाता है। ये उनकी age Autism टाइप सिम्पटम्स जैसे कई चीजों से अफेक्ट होता है। वैसे तो Autism से राहत पाने के लिए कोई पर्टिकुलर डाइट नहीं होती है लेकिन फिर भी Autism में ग्लूटन और कैसीनो फ्री डाइट रिकमेंड की जाती है।

आपको बता देते हैं कि ग्लूटन फ्री का मतलब होता है वीट ओट्स बाली जैसी ग्रेन्स को अपनी डाइट में अवाइड करना। इसकी जगह पटेटो फ्लायर और राइस लिए जा सकते हैं और कैसे इन फ्री डाइट का मतलब होता है डेयरी प्रोडक्ट्स की डाइट यानी जिसमें दूध दही चीज़ और मिल्क बेस्ड ड्रिंक्स शामिल ना हों। इसकी जगह कोकोनट मिल्क कामन मिल्क और राइस मिल्क जैसी चीजें ली जा सकती हैं। इसके अलावा पैक्ड फूड को अवॉइड करके ताजे फल और सब्जियां और साथ ही बहुत सारा पानी पीने की सलाह भी दी जाती है लेकिन आपको ये भी पता होना चाहिए कि हर पोर्शन का Autism अलग हो सकता है और बिना डॉक्टर से कंसल्ट किए डायट में किसी भी तरह के चेंजेस नहीं किए जाने चाहिए।

तो दोस्तो इस तरह आप ये तो समझ गए होंगे कि Autism क्या है ये किस चीज में हो सकता है इसके लिए अवेयर होना कितना ज्यादा जरूरी है और जल्द से जल्द इसका डायग्नोस होना भी जरूरी है। साथ ही आप ये भी समझ गए होंगे कि इस तरह के disease में उस पर्सन को easy और कंफर्टेबल फील कराना आपकी ड्यूटी बन जाती है। इसलिए इस बात का ध्यान रखे और सभी के साथ अच्छा बिहेव करे। उम्मीद करते हैं कि आप कोई Article useful लगा होगा और क्योंकि Article भी आपकी रिक्वेस्ट पर बनाया गया है ये जानकारी आपको कैसी लगी comment में जरूर लिख कर बताइएगा आगे किस बारे में जानना चाहते हैं वो भी बताएगा।

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यह article “Autism क्या क्या है,Autism का हिंदी मतलब, परिभाषा बेसिक जानकारी(About Autism meaning in hindi)“पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया उम्मीद करता हुँ। कि इस article से आपको बहुत कुछ नया जानने को मिला होगा।