पदार्थ के सभी अवस्थाएं के विषय में संपूर्ण जानकारी(What is the state of matter, definition, meaning)

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हेलो दोस्तों आज इस आर्टिकल में हम जानेंगे state of matter क्या होता है, different state of matter क्या होता है। matter किसे कहते है। the state of matter का मतलब क्या होता है। अगर आपको matters के बारे जानकारी नहीं है। तो आप बिल्कुल सही जगह आये है। आर्टिकल के अंत तक आपको matter से जुडी बेसिक जानकारी मिल जाएगी।

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द्रव्य क्या है(What is matter)

द्रव्य एक प्रकार का पदार्थ है जिसे किसी भी भौतिक प्रक्रिया की सहायता से पदार्थ के अन्य प्रकारों में विभक्त नहीं किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, चीनी एक द्रव्य है। जल में विलीन चीनी को जल का सिर्फ वाष्पीकरण करके ही प्राप्त किया जा सकता है।

वाष्पन के फलस्वरूप प्राप्त चीनी और मूल चीनी में कोई अंतर नहीं होता है, अतः चीनी एक द्रव्य है, जो सरल भौतिक विधि से अपने अवयवों में विभक्त नहीं होती। इसी प्रकार,सोडियम क्लोराइड, चूना, चूना-पत्थर आदि भी द्रव्य के उदाहरण हैं।

इसके विपरीत, दूध शुद्ध द्रव्य नहीं है क्योंकि यह जल, वसा, प्रोटीन आदि का मिश्रण है। इसी प्रकार, समुद्र का जल, मिट्टी, खनिज, कोयला आदि भी मिश्रण हैं, शुद्ध द्रव्य नहीं।

पदार्थ के भौतिक गुणों पर आधारित वर्गीकरण(States of matter and properties of matter)

हमारे चारों ओर पदार्थ विभिन्न रूपों में पाए जाते हैं। पदार्थ के ये विभिन्न रूप हैं—ठोस, द्रव और गैसीय। हमारे शरीर में भी पदार्थ के ये तीन रूप मौजूद हैं। हमारी हड्डियाँ और दाँत पदार्थ के ठोस रूप हैं।

हमारे शरीर में मौजूद रक्त पदार्थ का द्रव रूप है और जो वायु हम श्वास के द्वारा अंदर खींचते हैं, वह पदार्थ का गैसीय रूप है। इसके अतिरिक्त, हमलोगों के शरीर में जल (द्रव) प्रचुर मात्रा में विद्यमान रहता है। एक अनुमान के अनुसार भार के विचार से हमारे शरीर में लगभग 70% जल ही है।

किंतु सभी द्रव्य पदार्थ इन तीनों ही रूपों में अपना अस्तित्व नहीं रखते हैं। उदाहरण के लिए लकड़ी, पत्थर आदि सिर्फ ठोस रूप में ही रहते हैं, जबकि कर्पूर (camphor), अमोनियम क्लोराइड, नैफ्थलीन आदि ठोस और गैस दोनों रूपों में पाए जाते हैं। किंतु अधिकांश पदार्थ विभिन्न स्थितियों में ठोस, द्रव एवं गैस तीनों रूपों में पाए जाते हैं। उदाहरण के लिए जल एवं गंधक। इन तीनों अवस्थाओं को चित्र 1.5 में दिखाया गया है।

पदार्थ की ठोस अवस्था(The Solid State of Matter)

ठोस पदार्थों में अंतरा-अणुक आकर्षण बल काफी मजबूत होता है जिससे पदार्थ के कण एक-दूसरे के काफी निकट रहते हैं तथा वे मजबूती से परस्पर बँधे रहते हैं।

ठोस पदार्थों में अंतरा-अणुक स्थान बहुत न्यून होता है। इसी कारण, पदार्थ के कण एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्वतंत्रतापूर्वक गमन नहीं कर सकते हैं, हाँ वे अपने विराम के मध्य स्थान (mean position of rest) में स्वतंत्र रूप से कंपन कर सकते हैं।

ठोस पदार्थों के सामान्य गुण(Solid states of matter and properties )

आकृति और आयतन (Shape and volume)

ठोस पदार्थ की आकृति और उसके आयतन निश्चित होते हैं। ठोस पदार्थों में अंतरा-अणुक स्थान बहुत कम और अंतरा-अणुक आकर्षण बल काफी मजबूत होने के कारण उनके कण न तो एक-दूसरे के निकट आ सकते हैं और न दूर ही जा सकते हैं।

(i)ठोस पदार्थ की आकृति कायम रहती है और इसी कारण उसका आयतन भी स्थिर रहता है। उदाहरण-(i) पुस्तक एक ठोस पदार्थ है। इसकी आकृति और आयतन निश्चित होते हैं।

(ii) रबर बैंड भी ठोस पदार्थ है। इसको खींचने पर इसकी आकृति बदल जाती है, किंतु खिचाव बल (stretching force) के हटते ही इसकी आकृति पुनः वापस लौट आती है।

(iii) चीनी और नमक भी ठोस पदार्थ हैं। चीनी या नमक के किसी भी क्रिस्टल की आकृति निश्चित होती है।

(iv) मेज (table) भी एक ठोस पदार्थ है। इसकी आकृति निश्चित होती है तथा यह एक निश्चित स्थान (या आयतन) अधिकृत किए रहता है।

चीनी और नमक जैसे कुछ पदार्थ ऐसे हैं जिन्हें जिस बरतन में रखा जाता है वे उसी बरतन की आकृति ग्रहण कर लेते हैं। फिर भी, ये पदार्थ ठोस हैं क्योंकि इनके छोटे-छोटे रवों की आकृति किसी भी पात्र में अपरिवर्तित रहती है।

ठोस पदार्थो का घनत्व (Density)

ठोस पदार्थ का घनत्व उच्च (high) होता है। किसी द्रव्य के इकाई आयतन के द्रव्यमान उसका घनत्व कहलाता है।

घनत्व =द्रव्यमान/आयतन

•आयतन को प्रायः घनमीटर (m^3) में या लीटर (L) में व्यक्त किया जाता है।

•घनत्व को g mL^-1इकाई में व्यक्त किया जाता है। SI इकाई में इसे kgm^-3 में व्यक्त किया जाता है।

•अंतरा-अणुक बल मजबूत रहने के कारण ठोस पदार्थ के कण न्यून स्थान या आयतन में ही एक-दूसरे के साथ मजबूती से सटे रहते हैं। इसी कारण ठोस के घनत्व उच्च होते हैं।

द्रवणांक और क्वथनांक (Melting point and boiling point)

ठोस पदार्थों के द्रवणांक और क्वथनांक प्राय: उच्च होते हैं। इसका कारण यह है कि ठोस पदार्थों में अंतरा-अणुक आकर्षण बल इतना मजबूत होता है कि इसे तोड़ने के लिए पर्याप्त ऊष्मा ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। ठोस पदार्थ के द्रवणांक और क्वथनांक कमरे के ताप से अधिक होते हैं।

ठोस पदार्थ कठोर (hard) और दृढ़ (rigid) होते हैं।

मजबूत अंतरा-अणुक आकर्षण बल के कारण ठोस पदार्थ के कण परस्पर मजबूती से बंधे रहते हैं। बाहर से दाब पड़ने पर भी इनकी आकृति में कोई परिवर्तन नहीं होता है। अतः, ये कठोर और दृढ़ होते हैं।

संपीड्यता (Compressibility)

ठोस पदार्थ असंपीड्य (incompressible) होते हैं; अर्थात ठोस पदार्थ पर दाब बढ़ाकर या दाब घटाकर उनके आयतन को क्रमशः घटाया या बढ़ाया नहीं जा सकता है। इसका कारण यह है कि ठोस पदार्थ में अंतरा-अणुक स्थान इतना कम होता है कि उसे और.अधिक कम नहीं किया जा सकता है।

अतः, ठोस पदार्थ के कणों को और अधिक निकट नहीं लाया जा सकता। पावरोटी (bread) या स्पंजी पदार्थ अपवाद हैं। यद्यपि ये भी ठोस पदार्थ हैं, किंतु इनके अंतरा-अणुक स्थान में वायु भरी होने के कारण इनपर दाब का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इन्हें दाब बढ़ाकर आसानी से संपीडित किया जा सकता है। दाब बढ़ाने पर इनके अंदर की वायु बाहर निकल जाती है।

बहाव (Flow)

ठोस पदार्थों में बहाव की प्रवृत्ति नहीं होती है। ठोस पदार्थ के कण इतनी मजबूती से परस्पर बँधे रहते हैं कि ये बिना बाधा के एक-दूसरे के ऊपर से फिसल नहीं सकते।

प्रसार या संकुचन (Expansion or contraction)

ठोस पदार्थ को गर्म या ठंडा करने पर इनका क्रमशः प्रसार या संकुचन बहुत ही कम होता है। ऊष्मा के प्रभाव से ठोस कणों की ऊर्जा प्रायः बढ़ जाती है। ऐसा होने पर ये कण अपने विराम के मध्य स्थान के चारों तरफ अत्यधिक तीव्रता से कंपन करने लगते हैं।

किंतु कणों की ऊर्जा इतनी अधिक भी नहीं होती है कि वे अपने विराम के मध्य स्थान को छोड़कर बाहर हो जाएँ। अतः, ठोस पदार्थों में प्रसार की मात्रा बहुत कम होती है। इसी प्रकार, किसी ठोस पदार्थ को ठंडा करने पर उसके कणों की ऊर्जा घटती है और कंपन की तीव्रता भी बहुत कम हो जाती है।

किंतु ये कण अपने स्थिर स्थान को नहीं छोड़ते हैं और ये परस्पर अत्यधिक निकट भी नहीं आ पाते हैं। इसी कारण, ठोस पदार्थों को ठंडा करने पर उनका संकुचन बहुत ही कम होता है।

उर्ध्वपातन (Sublimation)

सामान्यतः ठोस पदार्थ को गर्म करने पर वह पहले पिघलकर द्रव में परिणत होता है और अधिक गर्म करने पर वह द्रव से वाष्प (गैस) में परिणत हो जाता है। किंतु, कुछ ठोस पदार्थ ऐसे हैं।

जिन्हें गर्म किए जाने पर वे बिना पिघले ही वाष्प बन जाते हैं और वाष्प को ठंडा करने पर वह बिना द्रव में परिणत हुए सीधे ठोस में परिवर्तित हो जाते हैं। ठोस पदार्थों की अवस्था में होनेवाले ऐसे परिवर्तन को उर्ध्वपातन कहते हैं।

“वह प्रक्रिया, जिसमें कोई ठोस पदार्थ गर्म किए जाने पर बिना द्रव में परिणत हुए सीधे वाष्प की अवस्था में बदल जाता है और उस वाष्प को ठंडा करने पर वह बिना द्रव में परिणत हुए सीधे ठोस की मूल अवस्था में परिवर्तित हो जाता है, उर्ध्वपातन कहलाती है।”

विसरण (Diffusion)

विसरण वह प्रक्रिया है, जिसमें किसी द्रव्य के कण किसी अन्य द्रव्य में प्रवेश करते हैं। सामान्यतः कोई ठोस पदार्थ किसी दूसरे ठोस पदार्थ में विसरित नहीं होता है, क्योंकि ठोस पदार्थ के कणों का गमन एक स्थान से दूसरे स्थान में नहीं होता है।

फिर भी, कुछ दृष्टांत ऐसे हैं जहाँ एक ठोस पदार्थ का विसरण दूसरे ठोस पदार्थ में होता है। यदि कॉपर (Cu) और जिंक (Zn) के दो टुकड़ों को परस्पर सटाकर बाँध दिया जाए तो कुछ वर्षों के पश्चात दोनों टुकड़े सट जाते हैं। इसका कारण यह है कि एक धातु के कण दूसरी धातु में कुछ हद तक प्रविष्ट हो जाते हैं।

पदार्थ की द्रव अवस्था (The Liquid State of Matter)

द्रव के कणों के बीच अंतरा-अणुक आकर्षण बल ठोस की तुलना में कमजोर होने के कारण द्रव के कण कम मजबूती के साथ परस्पर बँधे रहते हैं। अतः, द्रव के अंदर अंतरा-अणुक स्थान ठोस की अपेक्षा अधिक होता है। द्रव के कण अधिक स्वतंत्रतापूर्वक एक स्थान से दूसरे स्थान में गमन करते रहते हैं।

किंतु अंतरा-अणुक आकर्षण बल इतना कमजोर भी नहीं होता है कि ये कण द्रव की सतह छोड़कर बाहर निकल जाए।

द्रव के सामान्य गुण(Liquied states of matter and properties )

द्रव की सामान्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं।

आकृति और आयतन (Shape and volume)

द्रव की आकृति निश्चित नहीं होती, किंतु उसका आयतन निश्चित होता है। द्रव को जिस बरतन (पात्र) में रखा जाता है, वह उसी बरतन की आकृति प्राप्त कर लेता है। इसका कारण यह है कि द्रव के कण एक-दूसरे के ऊपर फिसल सकते हैं और अंत में स्थिर होकर बरतन की आकृति ग्रहण कर लेते हैं।

चूँकि द्रव के कण एक-दूसरे के और निकट नहीं आ सकते और न एक-दूसरे से और अधिक दूर जा सकते हैं, अतः द्रव के आयतन में कोई परिवर्तन नहीं होता है।

घनत्व (Density)

द्रव का घनत्व उसके ठोस-रूप के घनत्व से कम होता है। किसी पदार्थ की ठोस अवस्था की तुलना में उसके द्रव की अवस्था में अंतरा-अणुक स्थान अधिक होता है। इसीलिए द्रव का घनत्व ठोस से कम होता है।

संपीड्यता (Compressibility)

द्रव प्रायः असंपीड्य (incompressible) होते हैं। ठोस की तुलना में ये थोड़ा अधिक संपीड्य होते हैं। इसका कारण यह है कि द्रव में अंतरा-अणुक स्थान ठोस की तुलना में अधिक होता है।

द्रवणांक और क्वथनांक (Melting point and boiling point)

द्रवों के द्रवणांक और क्वथनांक ठोस पदार्थों से प्रायः कम होते हैं। द्रव पदार्थों के द्रवणांक कमरे के ताप से कम होते हैं, किंतु इनके क्वथनांक कमरे के ताप से उच्च होते हैं।

तरलता (Fluidity)

द्रव पदार्थों में बहने (flow) की प्रवृत्ति पाई जाती है। ठोस अवस्था की तुलना में द्रव अवस्था में अंतरा-अणुक स्थान अधिक और अंतरा-अणुक आकर्षण बल कमजोर होने के कारण द्रव कणों की गतिज ऊर्जा ठोस के कणों से उच्च होती है। द्रव में बहाव (flow) का गुण आ जाता है जिससे उसकी आकृति में परिवर्तन हो सकता है।

द्रव में बहाव की प्रवृत्ति (fluidity) द्रव की प्रकृति पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए, यदि कमरे के फर्श पर थोड़ा जल गिरा दिया जाए तो यह फैलने लगता है और इसकी आकृति भी बदलने लगती है, किंतु जल का कुल आयतन अपरिवर्तित रहता है।

विसरण(Diffusion)

द्रव में परस्पर मिश्रित हो जाने की प्रकृति पाई जाती है। क्योंकि इसमें बहने का गुण होता है।

द्रव का जमना (Freezing of liquid)

किसी भी द्रव का ठोस के रूप में परिवर्तन ‘द्रव का जमना’ कहलाता है। उदाहरण के लिए, यदि जल को 0 °C (या 273 K) ताप तक ठंडा किया जाए तो जल बर्फ (ठोस) में परिवर्तित हो जाता है। हालाँकि यह परिवर्तन अस्थायी होता है।

वाष्पन (Evaporation)

आपने देखा होगा कि एक चिपटी थाली में रखे जल को खुली वायु में रख दिया जाए तो कुछ समय के पश्चात थाली का जल गायब हो जाता है। इसी प्रकार, छिछले तालाब या झील का जल भी, विशेषकर गर्मी के मौसम में, धीरे-धीरे गायब हो जाता है।

अब प्रश्न उठता है कि जल गायब होकर कहाँ चला जाता है? वस्तुतः, जल वाष्प या गैस के रूप में परिवर्तित होकर वायुमंडल में चला जाता है। जिस प्रक्रिया द्वारा जल (द्रव) वाष्प में परिवर्तित होता है उसे वाष्पन कहते हैं।

गर्मी के दिनों में हम कपास के बने कपड़े (सूती वस्त्र) क्यों पहनते हैं?

गर्मी के दिनों में हमारे शरीर से पसीना काफी मात्रा में निकलता है। पसीना हमारे शरीर से ऊष्मा प्राप्त कर वाष्पित होता है। इससे हमें ठंडक का एहसास होता है। चूंकि सूती वस्त्र जल का एक अच्छा शोषक है, अतः यह हमारे शरीर से निकले पसीने को आसानी से शोषित कर इसे वायु के संपर्क में ला देता है। इसीलिए गर्मी के दिनों में हम सूती वस्त्र पहनना पसंद करते हैं।

क्वथन और क्वथनांक (Boiling and boiling point)

जब किसी द्रव का वाष्प दाब वायुमंडलीय दाब के बराबर हो जाता है, तब वह द्रव उबलने लगता है। द्रव को गर्म करने पर उसका वाष्प दाब क्रमशः बढ़ने लगता है।

जब द्रव का वाष्प-दाब बढ़कर वायुमंडल के दाब के बराबर हो जाता है, तब द्रव उबलने लगता है। जिस ताप पर द्रव उबलना प्रारंभ करता है उस ताप को द्रव का क्वथनांक कहते हैं और यह प्रक्रिया क्वथन या उबलना कहलाती है।

यदि द्रव को गर्म किया जाए तो द्रव का ताप क्वथनांक पर तब तक स्थिर रहता है, जब तक कि पूरा-का-पूरा द्रव वाष्प में परिवर्तित नहीं हो जाता। द्रव का उबलना उसके संपूर्ण भाग में होता है और द्रव के भीतरी भागों से बुलबुले तीव्रता से ऊपर आने लगते हैं।

पदार्थ की गैसीय अवस्था(The Gaseous State of Matter)

गैसों में अंतरा-अणुक बल बहुत कमजोर होता है तथा अंतरा-अणुक स्थान बहुत अधिक होता है। अतः, गैस के कण पूर्णतः स्वतंत्र होकर समस्त उपलब्ध स्थान में इधर-उधर गमन करने लगते हैं।

गैसों के सामान्य गुण

आकृति और आयतन (Shape and volume)

गैस की न तो कोई निश्चित आकृति होती है और न कोई निश्चित आयतन। इसे जिस बरतन में रखा जाता है, उसी बर्तन की आकृति और आयतन ग्रहण कर लेती है। यह बरतन के अंदर संपूर्ण उपलब्ध स्थान को घेर लेती है, क्योंकि इसके कणों के मध्य अंतरा-अणुक आकर्षण इतना कमजोर होता है कि ये कण स्वतंत्रतापूर्वक इधर-उधर गमन करते रहते हैं।

घनत्व (Density)

ठोस एवं द्रवों की तुलना में गैसों के घनत्व निम्न होते हैं।

द्रवणांक और क्वथनांक (Melting point and boiling point)

सामान्य वायुमंडलीय दाब पर किसी गैस के द्रवणांक और
क्वथनांक कमरे के ताप से कम होते हैं। गैसों के द्रवणांक और क्वथनांक ठोस और द्रव की तुलना में निम्न होते हैं।

संपीड्यता (Compressibility)

गैसों की संपीड्यता बहुत अधिक होती है। गैसों में अंतरा-अणुक स्थान अधिक होने के कारण गैस का दाब बढ़ाकर गैस के कणों को अत्यधिक निकट और दाब घटाकर उन्हें एक-दूसरे से बहुत दूर किया जा सकता है। इसी कारण साइकिल के ट्यूब या गेंद के ब्लाडर के कम स्थान में वायु की अधिक मात्रा भरी जा सकती है।

ऊष्मा और ठंड का प्रभाव (Effect of heating and cooling)

गर्म या ठंडा करने पर गैस को क्रमशः प्रसरित या संकुचित (expand or compressed) किया जा सकता है। गैस को गर्म करने पर उसके कणों की ऊर्जा बढ़ जाती है। फलतः, गैस के कणों का वेग बढ़ जाता है और वे तेजी से गमन करने लगते हैं

एवं एक-दूसरे से अधिक दूर हो जाते हैं। इससे गैस का प्रसार (expansion) हो जाता है; अर्थात उसका आयतन बढ़ जाता है। इसके विपरीत, गैस को ठंडा करने पर उसके कणों की ऊर्जा कम हो जाती है जिससे कणों का गमन धीमा हो जाता है और वे एक-दूसरे के अधिक निकट आ जाते हैं। अतः, कणों के बीच अंतरा-अणुक आकर्षण बल बढ़ जाता है। इसी कारण गैस का संकुचन होता है, अर्थात गैस का आयतन घट जाता है।

गैसों का विसरण (Diffusion of gases)

आप जानते हैं कि गैस के कण तीव्र वेग से गमन करते हैं और गैसीय कणों के बीच अंतरा-अणुक स्थान बहुत अधिक होता है। इसी विशेषता के कारण एक गैस के कण किसी दूसरी गैस में आसानी से प्रविष्ट हो जाते हैं, अर्थात गैसें स्वतः एक-दूसरे से सम्मिश्रित हो जाती हैं। यह प्रक्रिया गैसों के घनत्व पर निर्भर नहीं करती हैं। इस प्रक्रिया को गैसों का विसरण (diffusion of gases) कहते हैं।

गैसों का संघनन (Condensation of gases)

पदार्थ के गैसीय रूप का द्रव रूप में परिवर्तन गैस का संघनन कहलाता है। गैस पर दाब बढ़ाकर या उसका ताप कम करके उसका संघनन किया जा सकता है।

गैस पर दाब बढ़ाने पर गैस के कण परस्पर काफी निकट आ जाते हैं, जिससे अंतरा-अणुक स्थान घट जाता है। ऐसा होने से गैस-कणों के बीच अंतराण्विक आकर्षण बल काफी बढ़ जाता है, जिससे गैस द्रव-रूप में परिवर्तित हो जाती है।

किंतु गैस के संघनन में दाब की अपेक्षा ताप का स्थान महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि प्रत्येक गैस के लिए एक निश्चित ताप होता है जिस निश्चित ताप से अधिक ताप पर गैस संघनित हो ही नहीं सकती, चाहे उसका दाब कितना भी अधिक क्यों न बढ़ा दिया जाए। इस ताप को गैस का क्रांतिक ताप (critical temperature) कहते हैं।

गैस का दाब (Pressure of gas)

गैस के कण विभिन्न वेगों के साथ विभिन्न दिशाओं में अनवरत गमन करते रहते हैं। इस क्रम में ये कण एक-दूसरे से तथा बरतन की दीवारों से टकराते रहते हैं। इन टक्करों के कारण ये कण बरतन की दीवारों पर एक बल आरोपित करते हैं।

बरतन की दीवारों के प्रति इकाई क्षेत्रफल पर गैस के कणों द्वारा आरोपित बल गैस का दाब कहलाता है। वायु का दाब वायुमंडलीय दाब (atmospheric pressure) कहलाता है। समुद्र-तल पर वायु का दाब 1 वायुमंडल कहलाता है।

•दाब की इकाई पास्कल (pascal, Pa) कहलाती है।
•1 वायुमंडल दाब = 1.01 x 10^5Pa

पदार्थ की प्लाज्मा अवस्था(The states of matter plasma)

आज के वैज्ञानिकों ने पदार्थ की एक नई अवस्था का आविष्कार किया है जिसे प्लाज्मा अवस्था (plasma state) कहते हैं। प्लाज्मा अवस्था अब तक ज्ञात पदार्थों की तीनों अवस्थाओं (ठोस, द्रव एवं गैसीय) में किसी के साथ भी समानता नहीं रखती है। इसीलिए, इसे पदार्थ की चतुर्थ अवस्था (fourth state of matter) कहते हैं।

प्लाज्मा अवस्था में पदार्थ अत्यधिक आयनीकृत (ionized).गैस के रूप में रहता है। इसमें पदार्थ के कण अति ऊर्जावान (super energetic) और अति उत्तेजित (super excited) अवस्था में रहते हैं। पदार्थ की प्लाज्मा अवस्था का उपयोग प्रतिदीप्त ट्यूब (fluorsescent tube) और नियॉन संकेत वाले बल्ब (neon sign bulbs) के निर्माण में किया जाता है।

प्रतिदीप्त ट्यूब में हीलियम या कुछ अन्य गैसें भरी रहती हैं। गैस से होकर विद्युत-धारा प्रवाहित होने पर विशिष्ट रंगयुक्त उद्दीप्त (glowing) प्लाज्मा उत्पन्न होते हैं। यह विशिष्ट रंग गैस की प्रकृति पर निर्भर करता है। उच्च ताप के कारण सूर्य और तारों में भी प्लाज्मा की उत्पत्ति होती है। प्लाज्मा की उपस्थिति के कारण ही ये चमकीले दिखाई पड़ते हैं।

बोस-आइंस्टाइन कंडेन्सेट

1920 में भारत के सुप्रसिद्ध भौतिक विज्ञानवेत्ता सत्येंद्रनाथ बोस ने अपने सांख्यिकी गणनाओं के आधार पर पदार्थ की पंचम अवस्था (fifth state) की अवधारणा प्रस्तुत किया। विश्वविख्यात वैज्ञानिक आइंस्टाइन ने भी पदार्थ की इस अवस्था की संभावना का पूर्वानुमान लगाया।

बाद में अमेरिका के तीन वैज्ञानिकों की एक टीम ने पदार्थ की इस अवस्था को प्राप्त करने में सफलता पाई।
इनलोगों ने अतिनिम्न घनत्व (वायु के घनत्व का 10^-5 भाग) वाली गैस को अतिशीतलित (super cooled) करके (लगभग 2 x 10^-7K ताप पर) इस अवस्था को प्राप्त किया। इस अवस्था को बोस-आइंस्टाइन कंडेन्सेट (BEC) कहते हैं।

हमने क्या सीखा

दोस्तों इस आर्टिकल मे हमने जाना state of matter क्या होता है, different state of matter क्या होता है। matter किसे कहते है। the state of matter का मतलब क्या होता है। state of matter से जुड़े हमें जितनी भी जानकारी प्राप्त हुई। उसे हमने आपके सामने प्रस्तुत किया है। अगर आपके मन में इस आर्टिकल से संबंधित कोई डाउट है। तो आप बेफिक्र होकर हमें कमेंट या ईमेल कर सकते हैं।

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