स्वस्थ जीवन जीने के बेहतरीन टिप्स -Health tips in hindi

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Health tips in hindi-एक पुरानी कहावत है-‘स्वास्थ्य ही धन है’ (Health is wealth)इसका अर्थ यह नहीं है कि एक स्वस्थ व्यक्ति हमेशा धनी होगा या फिर एक अस्वस्थ व्यक्ति कभी धनी नहीं हो सकता।

इस कहावत का अर्थ यह है कि अच्छा स्वास्थ्य ही एक व्यक्ति का पूँजी है। अस्वस्थ जीवन गुजारना बेकार है स्वास्थ्य का सामान्य अर्थ है ‘अच्छा रहना’। अच्छा रहना शब्द अपने आप में एक पूर्ण शब्द है।

प्राचीन काल में ग्रीक दार्शनिक मानते थे कि रोग की अनुपस्थिति ही स्वास्थ्य(Health tips in hindi)है। आयुर्वेद विज्ञान में स्वास्थ्य का अर्थ है ‘आत्मनिर्भरता’ यानी बिना किसी की सहायता लिए जीवन की सभी क्रियाओं को संपन्न करने की क्षमता।

समय-समय पर स्वास्थ्य के प्रति हमारी धारणा बदलती रही है। बायोमेडिकल धारणा (biomedical concept) के अनुसार रोगमुक्त रहना ही स्वास्थ्य है।

मनोवैज्ञानिक धारणा (psychological concept) के अनुसार स्वास्थ्य सामाजिक, सांस्कृतिक,आर्थिक, मनोवैज्ञानिक एवं राजनीतिक क्रियाओं के प्रभाव का प्रकृतीकरण (manifestation) है।

इकोलॉजिकल धारणा (ecological concept) के अनुसार स्वास्थ्य मनुष्य एवं पर्यावरण के बीच एक सक्रिय संतुलन है। वर्तमान समय में स्वास्थ्य का अर्थ है-‘शारीरिक, मानसिक, सामाजिक जीवन क्षमता की पूर्णरूपेण समन्वित स्थिति और पर्यावरण के साथ उचित तालमेल’।

स्वास्थ्य की परिभाषा- विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार ‘स्वास्थ्य वह अवस्था है जिसमें पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक संपन्नता हो न कि केवल बीमारियों या पीड़ा का अनुपस्थित रहना।’

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स्वस्थ रहने के बेहतरीन टिप्स-(Health tips in hindi)

स्वास्थ्य न तो किसी को दिया जा सकता है और न ही इसे बाँटा जा सकता है। यह केवल हासिल किया जा सकता है। स्वस्थ रहना हर एक व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी है। अच्छे स्वास्थ्य(Health tips in hindi) इन नियमों का पालन करके पाया जा सकता है।

संतुलित आहार (Balanced diet Health tips in hindi) :

यह स्वस्थ(Health tips in hindi)रहने के लिए सबसे पहली शर्त है। संतुलित आहार ऐसा आहार है जिसमें सुचारू रूप से जीवन की सभी क्रियाओं को चलाने वाले सभी पोषक तत्त्व समुचित मात्रा में मौजूद होते हैं, जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज पदार्थ आदि। पोषक पदार्थ पौधों एवं जंतुओं को खाकर प्राप्त किए जा सकते हैं।

भोजन के संतुलित नहीं होने के कारण कई प्रकार के हीनताजनित रोग (deficiency diseases) हो सकते हैं। जैसे विटामिन की कमी से बेरी बेरी (beri-beri), रीकेट्स (rickets), पेलागरा (pellagra) आदि; लौह खनिज की कमी से एनीमिया (anaemia); प्रोटीन की कमी से मरस्मस (marasmus), क्वाशियोकोर (Kwashiorker) आदि बीमारियाँ हो सकती हैं।

संतुलित आहार न केवल बीमारियों को उत्पन्न होने से रोकते हैं, बल्कि रोग से लड़ने में भी मदद करते हैं।

ताजा भोजन एवं स्वच्छ जल (Fresh food and clean water Health tips in hindi)

बहुत सी बीमारियाँ संदूषित (contaminated) भोजन और जल को खाने-पीने से उत्पन्न होती हैं। अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए हमें ताजा बने भोजन को खाना चाहिए।

सब्जियों एवं फल को खाने से पहले अच्छी तरह से साफ पानी से धो लेना चाहिए, ताकि उनकी सतह पर लगे कीटनाशक दवाओं के अंश, कृमि(worms) एवं अन्य हानिकारक पदार्थ हट जाएँ। खाना बनाने वाले बरतन भी अच्छी तरह धुले होने चाहिए ताकि जल-वाहित रोग (water-borne disease) से बचा जा सके।

शुद्ध एवं स्वच्छ हवा का अंतःश्वसन (Inhalation of pure and clean air ) :

जीवित रहने के लिए हमें लगातार साँस के द्वारा हवा के अंत:श्वसन (inhalation) की जरूरत होती है। शुद्ध एवं स्वच्छ वायु अच्छे स्वास्थ्य(health hindi tips) की प्राथमिक आवश्यकताओं में से एक है। प्रदूषित वायु को साँस द्वारा लेने से कई प्रकार के रोग जैसे अस्थमा (asthma), ब्रोंकाइटिस (bronchitis) आदि हो सकते हैं।

हालाँकि स्वच्छ और प्रदूषण रहित वायु की उपलब्धता किसी व्यक्तिविशेष के बस में नहीं है, किंतु कुछ मूल उपायों के द्वारा हम कम प्रदूषित हवा का सेवन कर सकते हैं, जैसे कम प्रदूषित स्थानों में रहना, घर का हवादार होना, धुआँरहित चूल्हे का उपयोग, अकृष्य हवा निकालने वाले पंखों (exhaust fan) का इस्तेमाल इत्यादि।

व्यक्तिगत स्वच्छता एवं मल-पदार्थ का निपटारा (Personal hygiene and sanitary disposal Health tips)

अच्छा स्वास्थ्य(health hindi tips) बनाए रखने के लिए हमें कुछ सामान्य व्यक्तिगत मूल शर्तों को पूरा करना चाहिए, जैसे स्नान करना, साफ धुले हुए कपड़े पहनना, दाँत एवं मुख की सफाई करना, नाखून काटकर रखना, खाने से पहले और खाने के बाद हाथ की सफाई करना, मल विसर्जन के पश्चात हाथों को साबुन से धोना आदि।

रोगी के मल के द्वारा अनेक बीमारियों के रोगाणु शरीर से बाहर निकल आते हैं, जो वाहक कीट (vectors) द्वारा फिर भोज्य पदार्थ तक पहुँच जाते हैं। भोज्य पदार्थ द्वारा यह रोगाणु फिर मनुष्य में पहुँचकर रोग उत्पन्न करते हैं। मल-पदार्थ के सुचारू रूप से निपटारा करने से ऐसे रोग होने की संभावना को कम किया जा सकता है।

नियमित व्यायाम एवं विश्राम (Regular exercise and relaxation Health tips )

नियमित रूप से व्यायाम जैसे टहलना, दौड़ना, साइकिल चलाना, वजन उठाना, खेलना, योगासन, एरोबिक्स (aerobics) आदि करने से शरीर एवं मस्तिष्क को स्वस्थ(Health tips in hindi)रहने में सहायता मिलती है।

व्यायाम के दौरान अधिक मात्रा में वायु का अंत:श्वसन होता है, जिस कारण अधिक ऊर्जा का निर्माण होता है, शरीर के सभी अंगों में पर्याप्त रक्त प्रवाह हो पाता है और मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं। नियमित रूप से व्यायाम करने से बहुत से रोगों, जैसे हृदय रोग, लकवा या फालिज, गठिया, जोड़ों के दर्द आदि के होने की संभावना को कम किया जा सकता है।

व्यायाम करने से पाचन क्रिया ठीक रहती है तथा नींद भी अच्छी आती है। व्यायाम के साथ-साथ शरीर एवं मस्तिष्क को स्वस्थ(Health tips in hindi)रखने के लिए आराम की भी आवश्यकता होती है।

आराम शारीरिक एवं मानसिक तनाव को कम करता है। प्रत्येक व्यक्ति को हर एक दिन कम से कम 6 घंटे लगातार सोना चाहिए। मानसिक तनाव को कम करने के लिए इच्छानुसार संगीत सुनना, किताबें पढ़ना, टेलिविजन देखना, दोस्तों के साथ हँसना-बोलना, बागवानी करना, योगासन करना आदि उपयोगी हैं।

अच्छी आदतें और स्वस्थ जीवन-शैली (Good habits and healthy life style Health tips )

अच्छी आदतों और स्वस्थ जीवन-शैली द्वारा बहुत से रोगों से बचा जा सकता है। धूम्रपान, मादक द्रव (drugs), तंबाकू सेवन, शराब पीना, पान खाना इत्यादि ऐसी आदतें हैं जिनसे हमारे स्वास्थ्य(Health tips in hindi) के बिगड़ने की संभावना रहती है।

शराब पीने से यकृत कैंसर होने का डर रहता है, पान खानेवालों को मुख का कैंसर हो सकता है, धूम्रपान करने वालों को श्वसन तंत्र से संबंधित बीमारियाँ हो सकती हैं, ड्रग्स लेने वाले व्यक्तियों को मानसिक संतुलन अव्यवस्था होने का भय रहता है। अतः स्वस्थ रहने के लिए बुरी आदतों को छोड़ना होगा और स्वस्थ जीवन-शैली अपनानी होगी।

सक्रिय प्रतिरक्षीकरण कार्यक्रम (Active immunization programme) :

स्वस्थ रहने के लिए और कई प्रकार की बीमारियों से बचाव के लिए प्रतिरक्षीकरण कार्यक्रम के तहत टीकाकरण करवाना चाहिए जिससे उस रोग के होने की संभावना खत्म हो जाती है।

टीकाकरण द्वारा पोलियो,.चेचक, हेपेटाइटिस, हैजा, टाइफाइड, टिटेनस, डिप्थेरिया, क्षय-रोग, टी. बी. जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है।

स्वास्थ्य शिक्षा (Health education) :

स्वास्थ्य शिक्षा(Health tips in hindi) की कमी के कारण भी बहुत-से लोग रोगग्रसित हो जाते हैं। जन-जागरण के विभिन्न स्रोतों द्वारा स्वास्थ्य शिक्षा देकर इनमें रोग की रोकथाम के प्रति जागरूकता पैदा करनी चाहिए। स्वास्थ्य शिक्षा प्राप्त कर हर व्यक्ति अपने स्वास्थ्य का स्वयं ध्यान रख सकता है।

स्वास्थ्य बिगड़ने के मुख्य कारण

आनुवंशिक तत्व (hereditary factors)-

मनुष्य में होने वाले बहुत से रोग ऐसे हैं जो जीन(genes) के द्वारा नियंत्रित होते हैं। अगर किसी मनुष्य में रोग पैदा करनेवाले जीन्स मौजूद हैं, तो उसमें वह रोग निश्चित रूप से उत्पन्न होगा और ऐसे रोग का निदान भी संभव नहीं है। ऐसे रोग वंशानुगत होते हैं।

माता-पिता से उनकी संतानों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी पहुँचते हैं। ऐसे रोगों को आनुवंशिक रोग कहते हैं। ऐसे कुछ रोगों के उदाहरण हैंहिमोफिलिया (haemophilia), डाइबेटिज(diabetes), रंग नहीं पहचानना (colour blindness) तथा अनेकों प्रकार के सिंड्रोम्स (syndromes)। ये सभी हमारे स्वास्थ्य पर खराब असर डालते हैं। स्वास्थ्य(hindi health tips)पर खराब असर डाल सकते हैं।

वातावरण (environment)–

वातावरण में मौजूद रासायनिक पदार्थ, जैविक पदार्थ एवं भौतिक पदार्थ का सीधा प्रभाव मनुष्य पर पड़ता है और इनमें उत्पन्न होने वाले परिवर्तन हमारे जंगल काटने की क्रिया, वायु, जल एवं अन्य प्रकार के प्रदूषण आदि तत्त्व मनुष्य के स्वास्थ्य के बिगड़ने के कारण हैं।

सामाजिक एवं आर्थिक तत्त्व (social and economic factors)-

किसी देश की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति वहाँ के रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य का संकेत है। उच्च आर्थिक स्थित में रहने वाले लोग स्वच्छ(Health tips in hindi)परिवेश में रहते हैं और उनमें रोग कम होते हैं, जबकि निम्न आर्थिक स्थिति में रहने वाले लोगों में रोग उत्पन्न होने की संभावना अधिक होती है और इलाज करने की क्षमता भी कम होती है।

इस प्रकार आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति धनी लोगों से अधिक रोगग्रसित होते हैं। अतः खराब सामाजिक एवं आर्थिक अवस्था हमारे स्वास्थ्य बिगड़ने का एक कारण है।

शिक्षा (education)-

शिक्षा मनुष्य के स्वास्थ्य को प्रभावित करने का एक मुख्य कारण है। शिक्षित व्यक्ति और शिक्षित समाज अपनी तथा अपने समुदाय के स्वास्थ्य(hindi health tips) की ज्यादा अच्छी तरह देखभाल कर सकते हैं। इसके विपरीत अशिक्षित व्यक्ति ज्ञान के अभाव में अधिक रोगग्रसित हो जाते हैं।

जनसंख्या वृद्धि (population growth)-

जनसंख्या वृद्धि खास तौर से गरीब तथा अल्पविकसित देशों की अर्थव्यवस्था पर खराब असर डालते हैं। ऐसे देशों में रहने वाले लोगों को पर्याप्त मात्रा में भोजन, रहने का स्थान और अन्य सुविधाएँ नहीं मिलने के कारण स्वास्थ्य के बिगड़ने की संभावना अधिक हो जाती है।

स्वास्थ्य सेवा (health services)-

स्वास्थ्य सेवा के अंतर्गत टीकाकरण, स्वच्छ पेय जल का इंतजाम, गर्भवती महिलाओं तथा शिशुओं की देखभाल, रोग का इलाज, मल-पदार्थ का निपटारा, स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना आदि बातें आती हैं। स्वास्थ्य सेवा की कमी के कारण स्वास्थ्य(health hindi tips)बिगड़ने की संभावना बढ़ जाती हैं।

जीवन-शैली (life-style)-

हमारे स्वास्थ्य(Health tips in hindi)पर जीवन शैली का काफी प्रभाव पड़ता अनेकों बीमारियाँ जैसे हृदय रोग, मोटापा, फेफड़े का कैंसर, यकृत का कैंसर आदि गलत जीवन शैली के कारण उत्पन्न होती हैं। संतुलित आहार, व्यायाम, दुर्व्यसन (addiction) का नहीं होना, तनाव-मुक्त जीवन आदि बहुत से तत्त्व हैं, जो मनुष्य के शरीर को कई प्रकार के रोगों से बचाव प्रदान करते हैं।

यह article “स्वस्थ जीवन जीने के बेहतरीन टिप्स -Health tips in hindi“पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया उम्मीद करता हुँ। कि इस article से आपको बहुत कुछ नया जानने को मिला होगा।