कोशिका क्या है(cell in hindi)कोशिका की परिभाषा, कोशिका के बारे में संपूर्ण जानकारी

कोशिका क्या है(cell in hindi)कोशिका की परिभाषा, कोशिका के बारे में संपूर्ण जानकारी

About cell in hindi-दोस्तों आज इस आर्टिकल में हम कोशिका के बारे में बात करने वाले है। अपने छोटी कक्षाओं में कोशिका के बारे में जरूर पढ़ा होगा। क्या आपने कभी सोचा है। पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीव जंतु किन चीजों से मिलकर बने हैं। इसका जवाब है-कोशिका(cell in hind)। अगर आप कोशिका के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानते है। तो मैं दावा करता हूं कि यह आर्टिकल आपके लिए हैं। आर्टिकल के अंत तक आपके कोशिका(cell meaning in hindi)से जुड़े सारे concept clear हो जाएंगे।

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कोशिका किसे कहते हैं-(What is cell in hindi)

कोशिका जीवन की आधारभूत संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है। पृथ्वी पर रहने वाले सूक्ष्म जीव से लेकर विशाल जीव तक सभी कोशिकाओं से मिलकर बने है। कोशिकाओं के भीतर ही वह सारी क्रियाएं होती है जो एक जीव को जीवन प्रदान करने के लिए आवश्यक होते हैं।

कोशिका की खोज-(Discovery of cell in hindi)

कोशिका की खोज (Discovery of cell)कोशिकाओं की खोज और उनका अध्ययन सूक्ष्मदर्शी(microscope) के आविष्कार के बाद ही संभव हो पाया। सर्वप्रथम सन् 1665 में राबर्ट हुक (Robert Hooke) नामक अंगरेज वैज्ञानिक ने कोशिका की खोज की।

जब वह अपने ही बनाए हुए पुराने किस्म के माइक्रोस्कोप में पौधे के कॉर्क (cork) की एक पतली अनुप्रस्थ काट का अध्ययन कर रहे थे तो उन्हें छोटी-छोटी कोठरियाँ (compartments) दिखाई पड़ी जो मधुमक्खी के समान दिखाई पड़ रही थीं। राबर्ट हुक ने इन खोखली कोठारिया को सेल का नाम दिया ।

सन् 1674 में ल्यूवेन हॉक नामक डच वैज्ञानिक ने अपने ही बनाए हुए उन्नत प्रकार के माइक्रोस्कोप में स्वतंत्र कोशिका जैसे बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ, लाल रक्त कणिकाओं (red blood cells)एवं शुक्राणु (sperms), का अध्ययन किया।

रॉबर्ट ब्राउन(Robert Brown) ने सन 1831 में पादप कोशिकाओं में केंद्रक(nucleus) को सर्वप्रथम देखा। जे.ई. परकिंजे (J.E.Purkinje) ने सन् 1939 में कोशिकाद्रव्य का नाम प्रोटोप्लास्ट (Protoplast) रखा।

सन 1866 में हैकेल (Haeckel) ने यह सिद्ध किया कि केंद्रक के भीतर आनु-वंशिक लक्षणों का संग्रह होता है। आगे चलकर अनेक वैज्ञानिकों ने कोशिका(cell in hind) के विभिन्न घटकों की रचना एवं कार्य की जानकारी दी।

कोशिका सिद्धांत क्या है(Cell theory in hindi)

एक वनस्पति वैज्ञानिक जैकॉब मैथ्यास श्लाइडन (Jakob Mathhais Schleiden) ने सन 1838 में बताया कि पादपों के शरीर सूक्ष्म कोशिकाओं(cell meaning in hindi) के बने होते हैं। सन 1839 में प्राणिविज्ञानी थिओडोर श्वान (Theodor Schwann) ने बताया कि जंतु का शरीर भी सूक्ष्म कोशिकाओं का बना होता है। इन दोनों जर्मन वैज्ञानिकों ने एक मत होकर कोशिका सिद्धांत दिया।

कोशिका सिद्धांत के अनुसार “सभी जीवधारी एक या अनेक कोशिकाओं के बने होते हैं, अर्थात् कोशिका जीवधारियों के शरीर की आधारभूत संरचना और क्रियात्मक इकाई है।”

सन् 1855 में जर्मन वैज्ञानिक रूडॉल्फ विरचों (Rudolf Virchow) ने एक कहावत दी-ऑमनिस सेलुली अ सेलुला (ommis cellulae a cellula), अर्थात् नई कोशिकाएँ पूर्ववर्ती (pre-existing) कोशिकाओं के विभाजन से विकसित होती हैं। कोशिका सिद्धांत(Cell theory in hindi) के विशिष्ट तथ्य निम्नलिखित हैं।

•सभी जीव कोशिकाओं के एवं कोशिका उत्पादों (cell products) के बने होते हैं।
• सभी कोशिकाएँ केवल पूर्ववर्ती कोशिकाओं से विकसित होती हैं। कोई भी कोशिका नए सिरे से नहीं उत्पन्न हो सकती है।
• सभी कोशिकाएँ मूलरूप से रासायनिक संगठन एवं उपापचयी क्रियाओं में समान होती हैं। जीवों में हो रही सभी क्रियाएँ सामूहिक रूप से कोशिका(cell meaning in hindi)घटकों की गतिविधियों एवं अन्योन्यक्रिया (interaction) का परिणाम हैं।
• प्रत्येक जीव अपना जीवन केवल एक कोशिका के रूप में आरंभ करते हैं।
• प्रत्येक कोशिका के जीवद्रव्य में केंद्रक पाया जाता है और कोशिका के चारों ओर कोशिकाझिल्ली और कुछ जीवों में कोशिकाभित्ति का घेरा होता है।
•कोशिकाएँ(cell in hindi)जीवन की संरचनात्मक एवं प्रकार्यात्मक इकाइयाँ हैं।

कोशिका की आकृति आकार एवं संख्या-About Cell in hindi

पूरी दुनिया में विभिन्न प्रकार के जीव जंतु पाए जाते हैं। इन सभी की कोशिकाओं(cell meaning in hindi)के आकार, आकृति और संख्या में विभिन्नता पाई जाती हैं।

कोशिका की आकृति-(cell shape in hindi): कोशिका की आधारीय आकृति गोलाकार होती है किंतु विभिन्न प्रकार के कार्य करने हेतु अलग-अलग जीवों की कोशिका(cell in hindi) आकृति में विविधता पाई जाती यहाँ तक की एक पौधे या जंतु के शरीर के विभिन्न अंगों की कोशिकाएँ अलग-अलग आकार की हो सकती हैं।

कोशिका का आकार- विभिन्न पौधे और जंतु कोशिकाओं के आकार में भी विविधता पाई जाती है। अधिकतर कोशिकाओं का आकार 6.5 से 2.0 माइक्रोमीटर होती है।

सबसे छोटी कोशिका प्ल्यूरोन्योमोनिया जैसे जीव की है जिसका व्यास केवल 0.1\um होता है, जबकि दूसरी ओर शुतुरमुर्ग की अंडकोशिका(cell meaning in hindi) का आकार 15 सेमी तक हो सकता है। मनुष्य के शरीर की सबसे छोटी कोशिका लाल रक्त कणिकाएँ हैं जिनका व्यास 8um होता है और सबसे बड़ी तंत्रिका कोशिकाएँ होती हैं जो 90 सेमी तक लंबी हो सकती हैं । पौधों में मनिला हेम्प (Manila hemp) की तंतु कोशिकाएँ (स्कलेरेनकाइमा) की लंबाई 100 सेमी से भी अधिक होती है।

कोशिका संख्या (cell number in hindi): एककोशिकीय जीव, जैसे बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ आदि, केवल एक ही कोशिका के बने होते हैं, जबकि बहुकोशिकीय जीवों में कोशिकाओं की संख्या बहुत अधिक होती है।

बहुकोशिकीय जीवों में कोशिकाओं की संख्या उनके आकार एवं आयतन के अनुरूप होती है। पैन्डोरिना (Pandorina) नामक हरित शैवाल (green algae) में कोशिकाओं की संख्या केवल 8 से 32 होती है, जबकि एक 80 किलोग्राम वजन के मनुष्य में लगभग 60×10^15 कोशिकाएँ पाई जाती हैं।

कोशिका के प्रकार-Types of cell in hindi

कोशिका दो प्रकार की होती हैं (1) प्रोकैरियोटिक कोशिका(Prokaryotic cell in hindi) (2) यूकैरियोटिक कोशिका(Eukaryotic cell in hindi)। विज्ञानिक ने जीवाश्म इतिहास से पता लगाया है कि प्रोकैरियोटिक कोशिका आज से लगभग 3 मिलियन वर्ष पुरानी धरती पर पाए जाते थे। जबकि यूकैरियोटिक कोशिका की उत्पत्ति एक मिलियन वर्ष पहले ही हुई है।

प्रोकैरियोटिक कोशिका(Prokaryotic cell-GK., Pro = before ; karyon = nucleus)

ऐसी कोशिकाएँ(cell meaning in hindi) जिनमें केंद्रकझिल्ली नहीं होती है और वास्तविक केंद्रक अनुपस्थित होता है, उन्हें प्रोकैरियोटिक कोशिका कहा जाता है। केंद्रक के अभाव में इनके क्रोमैटिन पदार्थ एक अस्पष्ट क्षेत्र में रहते हैं, जिन्हें केंद्रकाय (nucleoid) कहते हैं। प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं (cell in hindi)में झिल्ली से घिरे अंगक (membrane-bound organelles) भी नहीं पाए जाते हैं।

प्रोकैरिओट्स के लक्षण-Prokaryotic cell in hindi

• प्रोकैरिओट्स हमेशा एककोशिकीय(cell in hindi)जीव होते हैं।
ये यूकैरिओट्स की तुलना में छोटे होते हैं। इनका आकार 1 से 10um होता है।
• इनकी कोशिकाओं में केवल एक झिल्ली अर्थात् कोशिकाझिल्ली उपस्थित रहती है।
• इनमें केंद्रक और केंद्रकझिल्ली नहीं पाई जाती है।
• केंद्रक पदार्थ (प्रोटीन एवं डी.एन.ए.) सीधे कोशिकाद्रव्य के संपर्क में रहते हैं।
• क्रोमैटिन पदार्थ अस्पष्ट क्षेत्र अर्थात् केंद्रकाय में सीमित रह सकते हैं। डी.एन.ए. हिस्टोन के साथ संबंधित नहीं होते हैं।
• झिल्ली रखने वाले कोशिका(cell meaning in hindi)अंगक जैसे माइटोकॉण्ड्रिया, गॉल्जी उपकरण, अंत:प्रद्रव्यी जालिका, लाइसोसोम, प्लैस्टिड आदि अनुपस्थित रहते हैं।
• राइबोसोम्स छोटे होते हैं और जीवद्रव्य में बिखरे रहते हैं।
• केवल एक ही क्रोमोसोम पाया जाता है।

यूकैरियोटिक कोशिका(Eukaryotic cell – GK., eu = good; karyon=nucleus)

ऐसी कोशिकाएँ जिनमें केंद्रक पूर्णरूप से विकसित होते हैं तथा केंद्रीय झिल्ली से घिरे होते हैं, उन्हें यूकैरियोटिक कोशिका कहा जाता है। बैक्टीरिया एवं नील हरित शैवाल को छोड़कर सभी जीवधारियों की कोशिकाएँ यूकैरियोटिक(Eukaryotic cell in hindi) होती हैं।

यूकैरियोट्स के सामान्य लक्षण-(Eukaryotic cell in hindi)

• इसके अंतर्गत एककोशिकीय तथा बहुकोशिकीय दोनों प्रकार के जीव आते हैं।
• इन कोशिकाओं का आकार अपेक्षाकृत बड़ा होता है तथा सामान्यतः 5 से 100\um हो सकता है।
•इन कोशिकाओं में निश्चित केंद्रक होता है जो केंद्रकझिल्ली से घिरा रहता है।केंद्रक में ही क्रोमोसोम्स एवं आनुवंशिक पदार्थ (genetic material) सीमित रहते हैं।
• DNA (डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) हिस्टोन नामक प्रोटीन से संबंधित रहते हैं।
• झिल्लीयुक्त कोशिका(cell in hindi)अंगक, जैसे गॉल्जी उपकरण, माइटोकॉण्ड्रिया, लाइजोसोम, क्लोरोप्लास्ट, अंत:प्रद्रव्यी जालिका आदि, उपस्थित होते हैं और विशिष्ट कार्यों को संपन्न करते हैं।
• राइबोसोम्स बड़े होते हैं। ये स्वतंत्र रूप से जीवद्रव्य में बिखरे रहते हैं या फिर अंत:प्रद्रव्यी जालिका से जुड़े रहते हैं।

कोशिका की संरचना-(Structure of cell in hindi)

दोस्तों आगे के इस भाग में हम कोशिका (cell meaning in hindi)की संरचना के बारे में जाने वाले हैं। अब हम पढ़ने वाले हैं कि कोशिका किन किन चीजों से मिलकर बनी होती है। किसी भी कोशिका(cell in hindi) को तीन प्रमुख भागों में बांटा जा सकता है।

1) प्लाज्मा झिल्ली
2) कोशिका द्रव और उसके घटक
3) केंद्रक

1) प्लाज्मा झिल्ली(Plasma membrane cell meaning in hindi )

प्रतेक कोशिका चारों ओर से एक पतली, नाजुक, लचीली, छिद्रयुक्त, चयनात्मक पारगम्य झिल्ली (selectively permeable membrane) जैविक झिल्ली से घिरी रहती है जिसे प्लाज्माझिल्ली अथवा कोशिकाझिल्ली कहा जाता है।

यह कोशिका की बाहरी सीमा बनाती है और कोशिकाओं में भीतरी रचनाओं को बाहरी वातावरण से अलग रखती है। संयुक्त सूक्ष्मदर्शी से देखने पर प्लाज्माझिल्ली एक स्तर की बनी दिखाई पड़ती है जोसामान्यत: 75-100 A (ऐन्स्ट्रॉम) मोटी होती है। किंतु इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से देखने पर यह प्लाज्माझिल्ली द्विस्तरीय दिखाई पड़ती है जिसमें लिपिड की दो लगातार स्तरें होती हैं जिसके साथ
प्रोटीन के अणु चिपके रहते हैं अथवा दोनों स्तरों के बीच तैरते रहते हैं।

रासायनिक दृष्टिकोण से प्लाज्माझिल्ली मुख्य रूप से लिपिड और प्रोटीन (Lipo-protein) की बनी होती है।


कार्य (Function)


• यह कोशिकाओं को एक निश्चित आकार बनाए रखने में सहायता करती है।
• यह कोशिकाओं को यांत्रिक सहारा (mechanical support) प्रदान करती है।
• यह एक सीमित झिल्ली का कार्य करती है जो कोशिकाओं की भीतरी रचनाओं को बचाव प्रदान करती है।

2) (i)जीव द्रव्य(Protoplasm – Gr., proto=first : plasma=something formed) :

प्रत्येक कोशिका में गाढ़ा, चिपचिपा, रंगहीन, पारभासी (translucent) जेली समान जीवद्रव्य पाया जाता है। हॅक्सले (Huxley) नामक वैज्ञानिक ने जीवद्रव्य को जीवन का भौतिक आधार माना।

कोशिकाभित्ति तथा रसधानियों के भीतर के पदार्थों को छोड़कर, जीवद्रव्य के अंतर्गत कोशिकाझिल्ली तथा कोशिका की सभी रचनाएँ आती हैं। जीवद्रव्य को दो रूप में बाँटा जा सकता है-कोशिकाद्रव्य या साइटोप्लाज्म और केंद्रकद्रव्य या न्यूक्लिओप्लाज्म

(ii)कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm)

जीवद्रव्य का वह भाग जो कोशिकाभित्ति एवं केंद्रक के बीच रहता है, उसे कोशिकाद्रव्य या साइटोप्लाज्म कहते हैं। रासायनिक दृष्टिकोण से साइटोप्लाज्म में 90% जल, 7% प्रोटीन, 2% कार्बोहाइड्रेट एवं वसा और 1% अकार्बनिक पदार्थ, खनिज, विटामिन आदि होते हैं।

कुछ विशिष्ट कोशिकाओं (जैसे-अमीबा) में साइटोप्लाज्म बाहरी दानेदार रहित एक्टोप्लाज्म तथा भीतरी एंडोप्लाज्म में बँटा रहता है। साइटोप्लाज्म में अनेक कोशिका घटक कोलाइडी (colloidal) रूप में मौजूद होते हैं, जिसके अंतर्गत कई प्रकार के जीवित कोशिका अंगक (cell organelles) तथा निर्जीव कोशिका अंतर्विष्ट(cell inclusion) आते हैं। कोशिका अंगकों की अपनी विशिष्ट रचनाएँ एवं कार्य होते हैं।

a)राइबोसोम (Ribosome in hindi)

यह कोशिका(cell in hindi)का सबसे छोटा अंगक है जिसे केवल इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से ही देखा जा सकता है। यह प्रोकैरियोटिक एवं यूकैरियोटिक दोनों प्रकार के जीवों की कोशिकाओं में पाए जाते हैं।

पैलेड (Palad) नामक वैज्ञानिक को सन् 1974 में जंतु कोशिका से राइबोसोम को अलग करने के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया। राइबोसोम सघन, गोलाकार, दानेदार कण होते हैं जो या तो कोशिकाद्रव्य में बिखरे रहते हैं या फिर अंत:प्रदव्यी जालिका से संलग्न रहते हैं। रासायनिक दृष्टिकोण से राइबोसोम, राइबोन्युक्लियोप्रोटीन (ribonucleoprotein) की बने होते हैं। ऐसे राइबोसोम जो गुच्छे के रूप में रहते हैं, उन्हें पॉलीराइबोसोम (polyribosome) या पॉलीसोम (polysome) कहते हैं।

कार्य (Function)

राइबोसोम प्रोटीन संश्लेषण में सहायता करते हैं, अत: उन्हें कोशिका का प्रोटीन कारखाना (protein factory of the cell) कहा जाता है।

b)लाइसोसोम (Lysosome-Gr., lysis=digestive ; soma=body) :

लाइसोसोम की खोज सर्वप्रथम क्रिश्चियन डि डवे (Christian de Duve) ने सन्1958 में चूहे की यकृत कोशिकाओं के अध्ययन के दौरान किया।

यह यूकैरियोटिक कोशिकाओं, मुख्य रूप से जंतु कोशिकाओं, में पाया जानेवाला अंगक है।लाइसोसोम, साइटोप्लाज्म में समरूप वितरित, गोलाकार, छोटी-छोटी थैली समान रचनाओं के रूप में रहते हैं। प्रत्येक लाइसोसोम चारों ओर से अकेली झिल्ली से घिरा रहता है। लाइसोसोम के भीतर कई प्रकार के पाचक रस उपस्थित रहते हैं जिनमें सभी कार्बनिक पदार्थों को तोड़ने और पचाने की क्षमता होती है। लाइसोसोम का निर्माण गॉल्जी उपकरण द्वारा होता है।

कार्य (Function)

लाइसोसोम अंतरकोशिकीय पाचन से संबंधित है।

• यह कोशिका में प्रवेश करने वाले जीवों जैसे बैक्टीरिया, वाइरस तथा अन्य पदार्थों को नष्ट कर देता है।
• यह टूटे-फूटे और कमजोर कोशिकीय अंगकों को भी पचाकर कोशिका को साफ रखता है,अर्थात् यह कोशिका का कचरा निपटारी तंत्र (garbage disposal system) है।
• लाइसोसोम जिस कोशिका में रहता है, आवश्यकता पड़ने पर (जैसे-भुखमरी की अवस्था में या कोशिका(cell meaning in hindi)के पुराने हो जाने पर) यह पूरी कोशिका को ही अपने पाचक रस के द्वारा पचा जाता है। इस क्रिया को ऑटोलाइसिस (autolysis) कहते हैं। इसलिए लाइसोसोम को कोशिका की आत्महत्या की थैली (suicide bag of the cell) भी कहा जाता है।

माइटोकॉन्ड्रिया-(Mitochondria in Hindi)

माइटोकॉन्ड्रिया कोशिकाद्रव्य में पाई जाने वाली बहुत ही महत्वपूर्ण कोशिका अंग है, जिसेसबसे पहले कोलिकर (Koll-icker) नामक व्यक्ति ने सन 1850 में मांसपेशियों की कोशिकाओं में देखा। Benda नामक वैज्ञानिक ने सन् 1898 में इसका नाम माइटोकॉण्ड्रिया डी.एन.
रखा। स्तनधारियों की लाल रक्त कणिकाओं को छोड़कर
ये सभी यूकैरिओट्स की कोशिकाओं में पाई जाती हैं। प्रोकैरिओट्स में ये नहीं पाई जाती हैं।

माइटोकॉण्ड्रिया(Mitochondria in Hindi) विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं में अलग-अलग आकृति एवं आकार की दिखाई देती हैं। संयुक्त माइक्रोस्कोप से देखने पर यह छड़ (rod) समान सूक्ष्म रचना के रूप में दिखाई पड़ती हैं, किंतु इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से देखने पर प्रत्येक माइटोकॉण्ड्रियोन प्लेट या तश्तरी समान दिखती हैं। एक माइटोकॉण्ड्रियोन का आकार 5 से 10um तथा व्यास 0.6 से 2.0 um तक होता है।

कार्य (Function mitochondria in Hindi))

• माइटोकॉण्ड्यिा कोशिकीय श्वसन का स्थान है, जहाँ ATP (ऐडिनोसिन ट्राइफॉस्फेट) के रूप में ऊर्जा का निर्माण होता है, अर्थात् यह कोशिका का ऊर्जा घर (power house of the cell) है।
• माइटोकॉण्ड्रिया में अपना राइबोसोम और DNA होता है. ये अपने निजी प्रोटीन बनाने की क्षमता रखते हैं। अतः इन्हें अर्धस्वायत्त कोशिकांगक (semiautonomous organelles) माना जाता है।

केंद्रक या न्यूक्लियस (Cell nucleus in hindi) :

केंद्रक कोशिका का सबसे बड़ा एवं सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है जो सभी कोशिकीय(cell meaning in hindi)क्रियाओं का नियंत्रण करता है। इसके अंदर जीवों की आनुवंशिक सामग्री मौजूद होती है और यह उन्हें दूसरी पीढ़ी में पहुँचाने का कार्य भी करता है।

केंद्रक के अध्ययन को कैरिलॉजी (Karylogy) कहा जाता है। न्यूक्लियस की खोज राबर्ट ब्राउन (Robert Brown) ने सन् 1831 में की। केंद्रक कोशिका द्रव में स्थित एक बड़ी गाढ़ी (dense) रचना है। इसकी संख्या सामान्यतः एक कोशिका में एक ही होती है, किंतु कुछ विशिष्ट प्रकार की कोशिकाओं में इनकी संख्या दो या और ज्यादा भी हो सकती है। केंद्रक सभी यूकैरियोटिक कोशिकाओं में पाया जाता है, परंतु यह स्तनधारियों के RBC तथा पादप कोशिकाओं में नहीं होता है।

केंद्रक के कार्य-


• केंद्रक हमारे शरीर में हो रही सभी क्रियाओं के नियंत्रण का मुख्य केंद्र है।
•यह कोशिका(cell meaning in hindi)विभाजन में सक्रिय भाग लेता है।
• यहाँ राइबोसोम और RNA का निर्माण होता है।
• यह गुणों (characters) को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुँचाने में सहायता करता है

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