उष्मा क्या(Heat in hindi) है। उष्मा की परिभाषा, उष्मा से जुडी बेसिक जानकारी (Heat meaning in hindi)

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उष्मा क्या(Heat in hindi) है

“उष्मा ऊर्जा का ही एक रूप है। किसी वस्तु का गर्म या ठंडा अनुभव होना उसके उष्मीय स्तर मतलब temperature से ही पता चलता है। कोई भी वस्तु गर्म होने पर अधिक ऊष्मा और ठंडी होने पर कम उष्मा लेती है।”

• उष्मा को कैलोरी या जुल में मापा जाता है।
• उष्मा मापने वाले यंत्र को कैलोरीमीटर कहां जाता है

उष्मा के मात्रक-Units of heat in hindi

उष्मा का S.I मात्रक जुल है लेकिन इसके लिए निम्न मात्रक भी प्रयोग में लाए जाते हैं।

(i) कैलोरी (Calorie)-

एक ग्राम जल का ताप 1°C बढ़ाने के लिए आवश्यक
ऊष्मा की मात्रा को कैलोरी कहते हैं। 1 कैलोरी ऊष्मा 4.2 जूल कार्य के बराबर होती है।

(ii) अंतर्राष्ट्रीय कैलोरी (International Calorie)-

एक ग्राम पानी का ताप 14.5°C से 15.5°C तक बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को अंतर्राष्ट्रीय कैलोरी कहते हैं।

(iii) ब्रिटिश थर्मल यूनिट (B.Th.U.)-

एक पौंड पानी का ताप 1 डिग्री फारेनहाइट बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को ब्रिटिश थर्मल यूनिट कहते हैं।

•1 B.Th.U =252 Calorie
•1 Calorie =4.18 joule

ऊष्माधारिता (Thermal Capacity)-

किसी वस्तु का ताप 1°C बढ़ाने के लिए, जितनी ऊष्मा की आवश्यकता होती है उसे वस्तु की ऊष्माधारिता कहते हैं। इसका मात्रक कैलोरी/°C अथवा जूल/°C होता है।

ऊष्माधारिता = वस्तु का द्रव्यमान (m) x पदार्थ की विशिष्ट ऊष्मा (s)

विशिष्ट ऊष्मा (Specific Heat in hindi)-

किसी पदार्थ के एकांक द्रव्यमान का ताप 1°C बढ़ाने के लिए जितनी ऊष्मा की आवश्यकता होती है, उसे उस पदार्थ की विशिष्ट ऊष्मा कहते हैं।

•इसे S से सूचित करते हैं। इसका मात्रक कैलोरी प्रतिग्राम/°C अथवा जूल/किग्रा/°C होता है।
Q=sm×dt, s=नियतांक है, Q=उष्मा है, m=द्रवमान है, dt =ताप मे वृद्धि।

ऊष्मा का संचरण (Transmission of Heat in hindi)-

ऊष्मा का एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने को ऊष्मा का संचरण कहते हैं।ऊष्मा-संचरण की तीन विधियाँ हैं।

(i) चालन(Conduction)
(ii) संवहन तथा (Convection)
(iii) विकिरण।(Radiation)

(i) चालन (Conduction) – इस विधि में पदार्थों के अणु अपना स्थान छोड़े बिना ही अपनी ऊष्मा समीपस्थ अणुओं को दे देते हैं। ठोसों में इसी विधि से ऊष्मा का संचरण होता है।

(ii) संवहन (Convection)-संवहन-विधि में पदार्थ के अणु ऊष्मा ग्रहण कर अपने स्थान से हट जाते हैं और उनके स्थान पर दूसरे अणु आ जाते हैं। यही क्रिया अनवरत रूप से चलती रहती है। द्रवों में इसी प्रकार से ऊष्मा का संचरण होता है।

•द्रव तथा गैसों में ऊष्मा का संचरणमुख्य रूप से संवहन-क्रिया द्वारा ही होता है।

(iii) विकिरण।(Radiation)-जब उष्मा एक स्थान से दूसरे स्थान बिना किसी माध्यम को प्रभावित किए पहुंचती है, तब इस विधि को विकरण कहा जाता है।

• ऊष्मा संचरण की इस विधि में माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है। मतलब इसी माध्यम से निर्वात में ऊष्मा का संचरण होता है।

तापमान और ऊष्मा में अंतर-Diffrence between temprature in hindi

किसी वस्तु के ताप व उसमें निहित उष्मा में एक बड़ा अंतर होता है। किसी वस्तु में निहित उष्मा उस वस्तु के द्रव्यमान व ताप पर निर्भर करती है।

लोहार के हथौड़े से निकली हुई चिनगारी (Spark) से हाथ नहीं जलता, जब कि वह बहुत अधिक ताप पर होती है। ऐसा इसलिये होता है क्योंकि चिनगारी का द्रव्यमान बहुत (Heat in hindi)कम होता है फलतः उसमें ऊष्मा की मात्रा बहुत कम निहित रहती है,

जबकि एक जग गर्म पानी जिसका ताप चिनगारी से बहुत कम होता है, हाथ में डालने से हाथ में जलन महसूस होती है, क्योंकि इसका द्रव्यमान चिन्गारी से बहुत अधिक होता है, फलतः इसमें उष्मा की अधिक मात्रा निहित रहती है।

पहले यह विश्वास किया जाता था कि उष्मा एक प्रकार का द्रव है, जिसे “कैलोरिक”(Caloric) कहते थे तथा यह द्रव द्रव्य (Matter) के अणुओं के बीच खाली स्थान में भरा रहता था और जब वस्तु का ताप अधिक होता था तो माना जाता था कि उसमें इस द्रव की अधिक मात्रा संचित थी। इस सिद्धान्त को “उष्मा का कैलोरिक सिद्धान्त” कहते थे। लेकिन ये सिद्धान्त बाद में कई घटनाओं की व्याख्या नहीं कर सका तथा अस्वीकार कर दिया गया।

उष्मा एक प्रकार की ऊर्जा है, जिसे कार्य में बदला जा सकता है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण सबसे पहले रमफोर्ड (Rumford) ने दिया। बाद में डेवी (Davy) ने दो बर्फ के टुकड़ों को आपस में घिसकर पिघला दिया। चूँकि बर्फ को पिघलने के लिये ऊष्मा का और कोई स्रोत न था, अत: यह माना गया कि बर्फ को घिसने में किया गया कार्य बर्फ पिघलने के लिये ली गई आवश्यक ऊष्मा(Heat in hindi) में बदल गया। बाद में जूल (Joule) ने अपने प्रयोगों से इस बात की पुष्टि की कि “ऊष्मा ऊर्जा का ही एक रूप है।”

जब कभी कार्य ऊष्मा (Heat meaning in hindi)में बदलता है, था ऊष्मा कार्य में बदलती है, तो किये गये कार्य व उत्पन्न ऊष्मा का अनुपात एक स्थिरांक होता है, जिसे “ऊष्मा का यांत्रिक तुल्यांक” कहते है। इसको j से प्रदर्शित करते है।

यदि W कार्य करने से उष्मा की मात्रा Q हो तो,

•W=JQ, J=4186 जूल/किलोकैलोरी है। इसका अर्थ हुआ कि यदि 4186 जूल यांत्रिक कार्य किया जाए तो उत्पन्न ऊष्मा की मात्रा 1 किलोकैलोरी होंगी।

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