ध्वनि किसे कहते(Sound in hindi)हैं, ध्वनि की परिभाषा क्या है। संपूर्ण जानकारी(Sound meaning in hindi)

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Sound in hindi-ध्वनि से हम क्या समझते हैं। ध्वनि मतलब किसी चीज की आवाज या फिर विज्ञान की भाषा में समझे तो किसी चीज का कंपन(vibration) होता है , ध्वनि किसे कहते है, ध्वनि की परिभाषा (Sound meaning in hindi)क्या है। दोस्तों आज के इस आर्टिकल मे हम ध्वनि से जुडी बिभिन्न पहलुओं को समझेगे।

ध्वनि किसे कहते है-What is sound in hindi

ध्वनि की परिभाषा –“ध्वनि एक तरह का विक्षोभ है जो बिना रूप बदले माध्यम मे आगे की तरफ बढ़ता है। “ध्वनि के संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है।

ध्वनि तरंगों की प्रकृति क्या है-Nature of sound in hindi

ध्वनि तरंगे अनुदैर्ध्य तरंगे होते हैं। अनुदैर्ध्य तरंगे विभिन्न आवृत्ति की हो सकती हैं। जिन तरंगों की आवृत्ति 20hertz से 20,000hertz के बिच होता है। उनको हम अपने कानों द्वारा सुन सकते हैं। और इसे ही हम ध्वनि(Sound in hindi) के नाम से जानते हैं।

जिन अनुदैर्ध्य तरंगों की आवृत्ति इस सीमा से अधिक या कम होती है। उन्हें हम सुन नहीं सकते हैं।

ध्वनि तरंगे कैसे बनती है-How does form sound in hindi

जब कोई ध्वनि स्रोत कंपन करता है तो उसके संपर्क वायु के कण भी अपनी स्थिति के दोनों और दोलन करने लगते हैं। इससे वायु में संपीडन तथा विरल की अवस्थाएं उत्पन्न होकर वायु में तरंग संचालित होने लगती है।

जब यह तरंगे वायु से चलकर कान के पर्दे पर पहुँचती है तब कान का पर्दा कंपन करने लगता है। और हमें ध्वनि सुनाई देने लगती है।

ध्वनि तरंगो की चाल-Speed of sound in hindi

अनुदैर्ध्य यांत्रिक तरंगें होती है अतः इनके संचरण के लिये किसी न किसी माध्यम की आवश्यकता पड़ती है। निर्वात् (space) में ध्वनि तरंगों का संचरण नहीं होता।

ध्वनि की चाल उस माध्यम पर निर्भर करती हैं, जिसमें से होकर ध्वनि तरंगें गुजरती हैं तथा भिन्न-भिन्न माध्यमों में ध्वनि की चाल भिन्न-भिन्न होती है।

किसी माध्यम में ध्वनि की चाल मुख्यतः माध्यम की प्रत्यास्थता(Elasticity) तथा घनत्व पर निर्भर करती है। कोई माध्यम जितना अधिक प्रत्यास्थ्य होगा उसमें ध्वनि की चाल उतनी ही अधिक होगी। इसके विपरीत अधिक घनत्व वाले माध्यमों में ध्वनि की चाल कम होती है।

ठोस वस्तुयें द्रव तथा गैसों की अपेक्षा अधिक प्रत्यास्थ्य होती हैं अतः ठोसों में ध्वनि की चाल सबसे अधिक होती है। ठोसों के बाद इसकी चाल द्रवों में अधिक होती है तथा सबसे कम गैसों में होती है।

जल में ध्वनि की चाल लगभग 1450 मीटर प्रति सेकेण्ड होती है। भिन्न-भिन्न धातुओं में ध्वनि की चाल, उनकी प्रत्यास्थता पर निर्भर करती है। 0°C पर लोहे में ध्वनि की चाल लगभग 5100 मीटर प्रति सेकेण्ड तथा एल्युमिनियम में लगभग 6400 मीटर प्रति सेकेण्ड होती है।

यदि किसी गैस का ताप स्थिर रहे तो दाब बढ़ाने या घटाने से इसका ध्वनि की चाल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता । चूँकि आई वायु (जल वाष्प मिली हुई) का घनत्व शुष्क वायु से कम होता है, जिस कारण आर्द्र वायु में ध्वनि की चाल शुष्क वायु की अपेक्षा अधिक होती है। यही कारण है कि वर्षा ऋतु में रेल के इंजन, सायरन आदि की आवाज, ग्रीष्म ऋतु की अपेक्षा अधिक दूर तक सुनाई देती है।

ध्वनि तरंगों के संचरण के लिये किसी न किसी माध्यम का होना आवश्यक है, ये तरंगें निर्वात् में नहीं चल सकतीं, यहीं कारण है कि चन्द्रमा पर ध्वनि तरंगें(Sound in hindi) संचरित नहीं होती तथा वहाँ दो व्यक्ति एक दूसरे की बातों को नहीं सुन सकते ।

वायु में ध्वनि की चाल करीब 332 मीटर प्रति सेकेण्ड होती है तथा प्रकाश की चाल करीब 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकेण्ड होती है। इससे पता चलता है कि प्रकाश की चाल ध्वनि की चाल से बहुत अधिक होती है। यही कारण है.कि जब बरसात के दिनों में जब आसमान में बिजली कड़कती है

तो ध्वनि तथा प्रकाश साथ-साथ उत्पन्न होते हैं, किन्तु हमें पहले प्रकाश दिखायी देता है, उसके कुछ समय पश्चात् ध्वनि सुनाई देती है।

ध्वनि की चाल पर ताप का प्रभाव-माध्यम का ताप बढ़ने पर ध्वनि की चाल बढ़ जाती है ।

•प्रयोगों द्वारा यह पाया गया कि 1°C ताप बढ़ने पर वायु में ध्वनि की चाल लगभग 0.61 मी./से. बढ़ जाती है। 0°C पर शुष्क वायु में ध्वनि की चाल 332 मी./से होती है। यदि t°C पर वायु में ध्वनि की चाल हो तो

v, = 332 + 0.611

ध्वनि की चाल पर दाब का प्रभाव-Pressure effect on speed of sound in hindi

दाब परिवर्तन का वायु में ध्वनि की चाल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। सामान्य ताप व दाब पर वायु में ध्वनि की चाल 332 मी./से. होती है।

यदि ताप स्थिर रखते हुए दाब चार गुना कर दिया जाये तो ऐसी स्थिति में भी ध्वनि की चाल 332m/s ही रहेंगी।

आर्द्रता का प्रभाव (Effect of humidity)—

आर्द्रता या जलवाष्प मिली हुयी वायु का घनत्व, शुष्क वायु से कम होता हैं। अतः आर्द्र वायु में ध्वनि की चाल शुष्क वायु से अधिक होती है। बरसात के दिनों में रेल इंजन की सीटी की आवाज, गर्मियों के दिनों की अपेक्षा अधिक दूर तक सुनाई देती है।

गैसों में ध्वनि की चाल के लिये न्यूटन का सूत्र-

न्यूटन के अनुसार जब ध्वनि तरंगें किसी गैसीय माध्यम में संचरित होती हैं तो माध्यम का ताप नियत रहता है।

यदि गैस का प्रारम्भिक दाब P व घनत्व d हो तो ध्वनि की चाल-

•V=(p/d)^1/2

वास्तव में न्यूटन का यह मानना कि जब ध्वनि तरंगें किसी गैसीय माध्यम में संचरित होती हैं तो माध्यम का ताप नियत रहता है, जो गलत था। बाद में लाप्लास नामक वैज्ञानिक ने इसमें संशोधन किया।

लाप्लास का संशोधन (Laplace’s correction)-

लाप्लास के अनुसार जब ध्वनि तरंगें गैसीय माध्यम में संचरित होती हैं तो संपीडन व विरजन (compression and rarefaction) की दशायें एकान्तर क्रम में उत्पन्न होती हैं। जिससे माध्यम के ताप में परिवर्तन होता है।

किसी गैसीय माध्यम में ध्वनि की चाल v = (γp/d)^1/2, यहाँ γ=Cp/Cv

•Cp→ स्थिर दाब पर विशिष्ट ऊष्मा
•Cv→ स्थिर आयतन पर विशिष्ट ऊष्मा

विभिन्न गैसों में ध्वनि की चाल-भिन्न-भिन्न गैसों में ध्वनि की चाल भिन्न-भिन्न होती है। जो गैस जितनी हल्की होती है। उसमे ध्वनि की चाल उतनी ही अधिक होती है। ऑक्सीजन गैस की अपेक्षा हाइड्रोजन गैस में ध्वनि की चाल अधिक होगी।

यदि गैसों के अनुसार गैस में ध्वनि की चाल अधिक होगी। यदि गैसों के अणुभार M1 व M2 तथा उनमें ध्वनि की चालें क्रमशः V1 और V2 हो तो-

•v1/v2=(M2/M1)^1/2

ध्वनियों के लक्षण (Characteristics of sound in hindi)-

ध्वनियों के मुख्यतः तीन लक्षण होते हैं—
(1) तीव्रता(Intensity)
(2) तारत्व (Pitch)
(3) गुणता (Quality)।

(1) तीव्रता (Intensity) तीव्रता ध्वनि का वह लक्षण है, जिसके कारण हमें कोई ध्वनि धीमी अथवा तेज सुनाई देती है। तीव्रता, ध्वनि उत्पन्न करने वाली कम्पनशील वस्तु के कम्पन के आयाम पर निर्भर करती है।

कम्पन का आयाम जितना अधिक होगा, ध्वनि की तीव्रता उतनी ही अधिक होगी तथा वह ध्वनि हमें उतनी ही तेज सुनाई देगी। ध्वनि की तीव्रता डेसीबल (Decible) मे मापी जाती है।

(2) तारत्व (Pitch)-तारत्व ध्वनि का वह लक्षण है, जिसके कारण हम ध्वनि को मोटी (Grave) या पतली (Shrill) कहते हैं। यदि तारत्व अधिक होता है तो ध्वनि को पतली या तीक्ष्ण ध्वनि कहते हैं तथा यदि तारत्व कम होता है तो ध्वनि को मोटी या सपाट (flat) ध्वनि कहा जाता है।

ध्वनि का तारत्व उसकी आवृत्ति पर निर्भर करता है। अधिक आवृत्ति की ध्वनि का तारत्व (Sound in hindi)अधिक होता है। पुरुषों की ध्वनि मोटी तथा स्त्रियों की ध्वनि प्राय: बारीक होती है, क्योंकि पुरुषों की ध्वनि का तारत्व,स्त्रियों की अपेक्षा कम होता है या पुरुषों के ध्वनि की आवृत्ति,स्त्रियों के ध्वनि की अपेक्षा कम होती है।

शेर की दहाड़ तथा मच्छर की भिनभिनाहट में, मच्छर की भिनभिनाहट का तारत्व अधिक होता है तथा शेर की दहाड़ का तारत्व कम होता है। मच्छर की भिनभिनाहट की आवृत्ति शेर की दहाड़ से अधिक होती है।

(3) गुणता (Quality)—गुणता ध्वनि का वह लक्षण है, जो समान तीव्रता व समान आवृत्तियों की ध्वनियों में अन्तर स्पष्ट करता है । यदि हम दो भिन्न-भिन्न यन्त्रों से समान आवृत्तियों व समान तीव्रता की ध्वनि उत्पन्न करें, तो भी हमें उनकी ध्वनियों में कुछ अन्तर महसूस होता है व हम समझ लेते हैं। गुणता के कारण ही हम किसी आवाज(Sound in hindi) को सुनकर पहचान लेते है।

यह article “ध्वनि किसे कहते(Sound in hindi)हैं, ध्वनि की परिभाषा क्या है। संपूर्ण जानकारी(Sound meaning in hindi) ” पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया उम्मीद करता हुँ। कि इस article से आपको बहुत कुछ नया जानने को मिला होगा।