नाभिकीय बल किसे कहते है। नाभिकीय बल की परिभाषा(Nuclear force in hindi)

नाभिकीय बल किसे कहते है। नाभिकीय बल की परिभाषा(Nuclear force in hindi)

Nuclear force in hindi-दोस्तों नाभिकीय बल को समझने से पहले हम परमाणु को समझेंगे। बिना परमाणु को समझे हम नाभिकीय बल को नहीं समझ सकते है। क्योंकि नाभिकीय बल परमाणु के केंद्र में लगता है।

परमाणु की व्याख्या-What is atom in hindi

परमाणु (Atom)—परमाणु वे सूक्ष्मतम कण हैं जो रासायनिक क्रिया में भाग ले सकते हैं परन्तु स्वतंत्र अवस्था में नहीं रह सकते । पदार्थ के अणुओं का निर्माण परमाणुओं से होता है। परमाणु मुख्यतः तीन मूल कणों इलेक्ट्रॉन, प्रोटान न्यूट्रॉन से मिलकर बना होता है। इसके केन्द्र में एक नाभिक होता है जिसमें प्रोटान व न्यूट्रॉन स्थिर होते हैं। इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर चक्कर लगाते हैं। परमाणु में इलेक्ट्रॉनों व प्रोटानों की संख्या बराबर होती है जिससे यह उदासीन होता है।

नाभिक व नाभिकीय बल (Nucleus and Nuclear forces in hindi)

परमाणु के नाभिक का आकार अत्यन्त छोटा होता है। इसकी लम्बाई लगभग 10-12 सेमी. होती है। परमाणु का समस्त द्रव्यमान इसके नाभिक में केन्द्रित रहता है। नाभिक का संघटन प्रोटानों व न्यूट्रॉनों से होता है। परमाणु का समस्त द्रव्यमान इसके नाभिक में होता है, जिसके कारण नाभिक काफी सघन (dense) व दृढ़ (rigid) होता है।

न्यूट्रॉन की खोज के पहले यह अभिधारणा थी कि नाभिक का निर्माण प्रोटानों व इलेक्ट्रॉनों से मिलकर होता है लेकिन यदि कोई इलेक्ट्रॉन नाभिक के अन्दर होगा तो वहाँ पर उसकी ऊर्जा करीब 100 मिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट के लगभग होनी चाहिये लेकिन रेडियो ऐक्टिवता से पता चलता है कि बीटा कण जो कि एक प्रकार के इलेक्ट्रॉन ही हैं, की ऊर्जा मात्र 4 मिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट होती है।

अतः नाभिक में इलेक्ट्रॉन की अवधारणा अमान्य हो गई। आधुनिक परिकल्पना के आधार पर यह माना जाता है कि नाभिक में न्यूट्रॉन व प्रोटान स्थित होते हैं एवं इलेक्ट्रॉन इसके चारों ओर बन्द कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं। न्यूट्रॉनों व प्रोटानों की कुल संख्या परमाणु भार (atomic weight) कहलाती है।

हल्के तत्वों के नाभिकों में न्यूट्रॉनों व प्रोटानों की संख्या लगभग समान होती है तथा भारी तत्वों में न्यूट्रॉनों की संख्या प्रोटानों की तुलना में बढ़ती जाती है। नाभिक के भीतर समान आवेश के प्रोटान स्थित होते हैं जिनके

बीच प्रतिकर्षण बल कार्य करता है। अब प्रश्न यह उठता है कि इस प्रतिकर्षण बल के बावजूद यह कण नाभिक के भीतर कैसे रहते हैं। इसका कारण यह है कि नाभिक के भीतर प्रोटानों व न्यूट्रॉनों के बीच कुछ तीव्र (strong) आकर्षण बल कार्यशील होते हैं जो इन कणों को आपस में बाँधे रहते हैं। इन बलों को नाभिकीय बल (nuclear force) कहते हैं।

जापानी वैज्ञानिक युकावा के अनुसार इन नाभिकीय बलों का कारण एक नये प्रकार के कण का उत्पन्न होना है। इन कणों को ‘मैसोन’ कहते हैं तथा ये कण प्रोटानों व न्यूट्रॉनों के परस्पर विनिमय (exchange) से उत्पन्न होते हैं अर्थात् नाभिक के भीतर प्रोटान व न्यूट्रॉन परस्पर एक दूसरे में बदलते रहते हैं तथा इस क्रिया में मैसोन कणों की उत्पत्ति होती है।

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