अन्योन्य क्रियाएँ एवं बल की अनुभूति (Interactions and Feeling of Force)

प्रतिक्रिया कणों के बीच परस्पर आकर्षण-विकर्षण (attraction-repulsion) अथवा क्रिया(action-reaction) के रूप में लगनेवाले बल को अन्योन्य क्रिया (interaction) कहा जाता है। प्रकृति में होनेवाली सभी घटनाएँ (events) इसी अन्योन्य क्रिया के कारण घटित होती हैं तथा दो कणों अथवा वस्तुओं के बीच बल अनिवार्यतः आरोपित होता है। उदाहरण के लिए, दो कणों के बीच उनके द्रव्यमान (mass) के कारण गुरुत्वाकर्षण बल (gravitational force) लगता है। यदि इन कणों पर विद्युत आवेश भी हों तो गुरुत्वाकर्षण के अतिरिक्त वैद्युत बल (electrical force) भी लगता है। गुरुत्वाकर्षण बल की प्रकृति हमेशा आकर्षण (attraction) की होती है, जबकि वैद्युत बल, आवेश की प्रकृति पर निर्भर करते हुए आकर्षण (विजातीय आवेशों के बीच) अथवा विकर्षण (सजातीय आवेशों के बीच) का होता है। यदि ये आवेशित कण अन्य वैद्युत अथवा चुंबकीय क्षेत्र में (गतिशील होने पर) हों तब इनपर अतिरिक्त बल भी कार्य करते हैं।

साधारणतः जब हम किसी वस्तु को धकेलते (push) हैं तो हम वस्तु पर अपने से आगे की ओर (away from self) बल लगाते हैं। इसी प्रकार वस्तु को अपनी ओर खींचने (pull) के क्रम में बल अपनी ओर लगाते हैं। इस प्रकार, बल का मूल अर्थ धकेलना अथवा खींचना है। (Force is basically a push or a pull.) बल हमेशा जोड़े के रूप में रहते हैं। (Forces always exist in pair.) उदाहरणार्थ,

(a) टेबुल पर रखी पुस्तक टेबुल पर (अपने भार के कारण) नीचे की ओर (downward) बल लगाती है, जबकि टेबुल द्वारा पुस्तक पर ठीक विपरीत दिशा में ऊपर की ओर बल लगता है।

(b) जब किसी भार (weight) को एक रस्से (rope) से निलंबित (suspend) करते हैं तब रस्सा उसे रोके रखने के लिए बल लगाता है, जबकि भार उस रस्से को कसे (tight) रखने के लिए बल लगाता है। यह बल रस्से में तनाव (tension) उत्पन्न करता है। तनाव हमेशा संपर्क-बिंदु से दूर की ओर लगता है। (Tension always acts away from the point of contact.)

स्पष्टतः, अन्योन्य क्रियाओं में बल का अस्तित्व (existence) हमेशा जोड़े में के गति के तीसरे नियम (Newton’s third law of motion) के रूप में व्यक्त न्यूटन होता है जो होता है।

आवेशित कण हैं जिनपर आवेश का बराबर परिमाण (1.6×10^-19C) होता है। प्रत्येक परमाणु में सभी इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन द्वारा आरोपित विद्युत-चुंबकीय बल के कारण ही बद्ध (bound) रहते हैं। ऐसे सभी परमाणु विद्युत-चुंबकीय बलों के अधीन मिलकर अणु बनाते हैं। आणविक एवं परमाणविक घटनाएँ भी इसी विद्युत-चुंबकीय बल के कारण होती हैं।