सैटेलाइट कैसे काम करती है। पूरी जानकारी हिंदी -How does work satellite in hindi

सैटेलाइट कैसे काम करती है। पूरी जानकारी हिंदी -How does work satellite in hindi

जब हम विज्ञान के इतिहास पर नजर डालते हैं तो पाते हैं कि मनुष्य ने विज्ञान के माध्यम से जो प्रगति की है वह अद्भुत और चौंकाने वाली रही है आदिकाल से 21 ईसवी सदी मे पहुंचने तक हमारा सफर नए नए अविष्कारों के साथ जारी रहा। अविष्कारो के इसी क्रम मे सैटेलाइट का आविष्कार(invention of satellite in hindi) हुआ जो अपने आप में पूरी दुनिया के लिए एक वरदान साबित हुआ।

आज भी काफी लोग सैटेलाइट(About satellite in hindi)के बारे में सही से नहीं जानते हैं उनके मन में क्या और क्यों जैसे सवाल घूमते रहते हैं जिन के जबाव में इस लेख में देने की कोशिश करूंगा।

सैटेलाइट क्या है-what is satellite in hindi

अपने कई बार यह जानने की कोशिश की होगी की आखिर यह सैटेलाइट होता क्या है? हम अपने दैनिक जीवन में जितने भी अधिकतर काम करते हैं उसमें से ज्यादातर काम किसी ना किसी सैटेलाइट पर ही निर्भर होता है।

हमारे मोबाइल में लगे जीपीएस(GPS)से लेकर घरों में लगे टेलीविजन तक सभी जीपीएस की वजह से ही काम करते हैं सैटेलाइट के बिना इन सब की कल्पना करना भी मुश्किल है।

सैटेलाइट एक छोटा सा ऑब्जेक्ट होता है जो पृथ्वी के बाहर एक बंद ऑर्बिट में चक्कर लगाता है सेटेलाइट कहलाता है। इसे हिंदी में उपग्रह भी कहते हैं।” इस हिसाब से हमारा चंद्रमा भी पृथ्वी का नेचुरल सैटेलाइट है।

सैटेलाइट के प्रकार-Type of satellite in hindi

सैटेलाइट मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं

1) प्राकृतिक उपग्रह(Natural satellite)
2) मानव निर्मित उपग्रह/ कृत्रिम उपग्रह(Artificial satellite)

1) प्राकृतिक उपग्रह(Natural satellite in hindi)-

प्राकृतिक उपग्रह मानव निर्मित उपग्रह नहीं होते हैं। बल्कि यह ऐसे उपग्रह होते हैं जिनका निर्माण किसी प्राकृतिक घटना के कारण हुआ होता है। जैसे – चन्द्रमा पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है

2) कृत्रिम उपग्रह(Artificial satellite in hindi)-

कृत्रिम उपग्रह मानव निर्मित उपग्रह है इन मानव निर्मित उपग्रह को हम रॉकेट की सहायता से आकाश में लांच कर देते हैं एक निश्चित ऊंचाई पर ले जाकर इनको 8 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से घूमने के लिए हमारे वायुमंडल में छोड़ दिया जाता है।

उसके बाद पृथ्वी की ग्रेविटेशनल फील्ड के कारण यह सेटेलाइट एक निश्चित कक्षा में परिक्रमा करने लगता है इसे ही हम पुत्र उपग्रह या आर्टिफिशियल सैटेलाइट कहते हैं

सैटेलाइट आसमान में कहां और कैसे टिके होते हैं। -Where and how satellites stick to the sky in hindi

इससे पहले कि हम यह समझे कि सैटेलाइट काम कैसे करते हैं यह जान लेते हैं कि सैटेलाइट आसमान टिके कैसे होते हैं सेटेलाइट सेंट्रीफुगल फोर्स और ग्रेविटेशनल फोर्स के बैलेंस के कारण आसमान में टिके होते हैं।

इनका यह बैलेंस हम मैथमेटिक्स के इक्वेशन से निर्धारित करते हैं इन दोनों फोर्सेज के बैलेंस के कारण ही किसी भी सैटेलाइट(satellite)को एक्सटर्नल एनर्जी की जरूरत नहीं पड़ती और अर्थ के चारों और बिना रुके सर्कुलर मोशन करते रहते हैं।

सैटेलाइट को Low earth orbit(LEO), Medium Earth Orbit(MEO)- या फिर GEO Synchronous Earth Orbit में रखा जाता है सैटेलाइट को किस अर्थ ऑर्बिट में रखना है यह उसके एप्लीकेशन पर निर्भर करता है।

1)Low earth orbit(LEO) –

यदि सैटेलाइट को weather casting, Earth imagine, Geographic area surveying या फिर satellite phone calling’s के लिए बनाया गया है तब उन्हें LEO में रखा जाता है।

LEO ऑर्बिटल में सैटेलाइट को 160 से लेकर 2000 किलोमीटर के बीच में छोड़ा जाता है। जिसका ऑर्बिटल टाइम डेढ़ घंटे का होता है।

2)Medium Earth Orbit(MEO)-

जीपीएस जैसे नेविगेशन एप्लीकेशन के लिए MEO ऑर्बिट में सैटेलाइट को छोड़ा जाता है क्योंकि इस ऑर्बिट में सैटेलाइट एक्यूरेट स्पीड से घूमते हैं

इसका आर्बिटल पीरियड लगभग 12 घंटे है।

3) GEO Synchronous Earth Orbit –

इस ऑर्बिट में सैटेलाइट 35786 किलोमीटर की ऊंचाई पर रहते हैं और Earth के बराबर angular speed से घूमते हैं इसका मतलब यह हुआ कि सैटेलाइट को एक चक्कर पूरा करने में 23 घंटे 56 मिनट 4 सेकंड लगते हैं।

टीवी प्रसारण के लिए हम इन सैटेलाइट की मदद लेते हैं क्योंकि यह constant speed से पृथ्वी के साथ घूमते हैं।

सैटेलाइट काम कैसे करते हैं। How does work satellite in hindi

सैटेलाइट(satellite)में छोटे-छोटे इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेंट्स जैसे ट्रांसपोंडर, एंटीना आदि लगे होते हैं जिनकी वजह से यह काम करते हैं यह छोटे-छोटे इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्पोनेंट्स पृथ्वी से आने वाले किसी भी फ्रीक्वेंसी की शक्ति को बहुत ही ज्यादा बढ़ा देते हैं। और रिफाइन करके वापस रिसीवर को भेज देते हैं।

यह सभी काम करने के लिए सैटेलाइट को ऊर्जा की जरूरत पड़ती है जो सेटेलाइट में लगे सोलर पैनल से पूरी हो जाती है सेटेलाइट में सोलर पैनल के साथ बैटरी भी लगी होती है सूर्य ग्रहण के दौरान इन बैटरीयों का इस्तेमाल किया जाता है।

खराब होने के बाद सैटेलाइट का क्या होता है। -What happens to a satellite after a malfunction in hindi

सभी मशीनों की तरह सेटेलाइट(satellite)भी खराब होती हैं इन खराब सैटेलाइट को वैज्ञानिक धीरे-धीरे धरती की कक्षा में वापस लेकर आते हैं ताकि खराब होने के बाद किसी और सेटेलाइट से दूसरी सेटेलाइट ना टकरा जाए।

अब इन खराब हुए सैटेलाइट(satellite)को नीमों में गिराया जाता है। यह एक समुद्री क्षेत्र है जिसे धरती पर सेटेलाइट का कब्रिस्तान(Satellite cemetery)भी कहा जाता है निमो शब्द लैटिन भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ होता है कोई नहीं।

प्वाइंट नेमो ऑस्ट्रेलिया दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच में पड़ता है अंतरिक्ष का कचरा गिराने के लिए इससे इसलिए चुना गया क्योंकि यहां का सबसे नजदीक द्वीप भी करीब 2000 किलोमीटर दूर पड़ता है और यहां कोई रहना नहीं चाहता है

साथ ही यह किसी देश की सीमा में भी नहीं आता है जिसके कारण किसी को कोई दिक्कत नहीं होती है।

सैटेलाइट फोन क्या है-satellite phone in hindi

सेटेलाइट फोन(satellite phone) को सेट फोन के नाम से भी जाना जाता है यह हमारी नॉर्मल फोन से बिल्कुल ही अलग होते हैं क्योंकि इन्हे मोबाइल टावरों की बजाय सीधा सेटेलाइट से सिंगल प्राप्त करते हैं।

इनकी खास बात यह होती है कि इनकी मदद से हम कहीं से भी कॉल कर सकते हैं बिना किसी नेटवर्क प्रॉब्लम के।
इसका सिग्नल गहरे पानी के अंदर भी मिल जाता है आप पानी के अंदर से भी कॉल कर सकते हैं।

सेटेलाइट फोन(satellite phone) खरीदने के लिए हर देश में अलग-अलग कानून बनाए गए हैं इनसे कॉल करना भी बहुत ही खर्चीला होता है पर मिनट के हिसाब से लगभग आपको 25 से ₹30 पेमेंट करना पड़ता है

ये article ” सैटेलाइट कैसे काम करती है। पूरी जानकारी हिंदी -How does work satellite in hindi ” पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया. उम्मीद करता हुँ. कि इस article से आपको बहुत कुछ नया जानने को मिला होगा