एनरिको फर्मी की जीवनी हिंदी-Enrico Fermi biography in hindi

एनरिको फर्मी की जीवनी हिंदी-Enrico Fermi biography in hindi
  • जन्म -29 सितम्बर, 1901, रोम
  • निधन-20 नवम्बर, 1954

इस महान वैज्ञानिक ने कोलंबिया में नियंत्रित नाभिकीय श्रृंखला प्रक्रिया पर महत्त्वपूर्ण कार्य किया और परमाणु भट्टी बनाने में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की |

एनरिको फर्मी का जन्म-Enrico Fermi biography in hindi

प्राचीन ज्ञान विज्ञान के महानतम् केंद्र रोम में जन्मे इस महान वैज्ञानिक का परिवार रोम के समृद्ध परिवारों में था। बचपन में वे बहुत प्रतिभाशाली छात्र थे। मात्र 21 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने पीसा विश्वविद्यालय से भौतिकी-विज्ञान में एक्स किरणों के क्षेत्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त कर ली थी।

26 वर्ष की उम्र में वे रोम विश्वविद्यालय में भैतिकी के प्राध्यापक नियुक्त किए गए। वे इतने योग्य व्यक्ति थे कि सन् 1929 में उन्हें इटली अकादमी का सदस्य चुना गया। यह किसी नागरिक को दिया जाने वाला इटली का महानतम् सम्मान है।

एनरिको फर्मी के अविष्कार-Enrico Fermi invention

सन् 1934 में 10 वर्ष तक कठिन परिश्रम करके उन्होंने एक मूलभूत खोज की। उन्होंने पता लगाया कि जब तत्त्वों पर धीमी गति के न्यूट्रॉनों की बौछार की जाती है तो पदार्थ रेडियो-धर्मी हो जाता है तथा इससे विकिरण होने लगता है।

इस प्रक्रिया में एक तत्त्व दूसरे तत्त्व में बदल जाता है। सन् 1933 में उन्होंने न्यूट्रॉनो नामक मूल पदार्थ की परिकल्पना की। न्यूट्रॉनों द्वारा बौछार करके फर्मी ने 80 नए कृत्रिम नाभिक (Nucleus) बनाए। वस्तुतः एनरिको फर्मी को नाभिकीय क्रियाओं (Nuclear Reactions) की खोज का जन्मदाता कहा जाता है।

वास्तव में वे परमाणु ऊर्जा के जन्मदाता कहे जाते
हैं क्योंकि उन्होंने ही सबसे पहले नाभिकीय शृंखला प्रक्रियाओं का आविष्कार किया था।

उस समय इटली की परिस्थितियां काफी खराब चल रही थीं क्योंकि यह देश मुसोलिनी के चंगुल में जकड़ा हुआ था। इसका फर्मी(Enrico Fermi contribution) पर सीधा प्रभाव पड़ा क्योंकि उनकी पत्नी यहूदी थी। सौभाग्य की बात थी कि उन्हीं दिनों उन्हें अमरीका के कोलम्बिया विश्वविद्यालय में एक भाषण देने के लिए आमंत्रित किया गया।

फर्मी(Enrico Fermi discovery)अपने परिवार के साथ अमरीका चले गए और कभी भी इटली लौटकर नहीं आए। सन् 1938 में उन्हें भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया। सन् 1939 में वे कोलम्बिया विश्वविद्यालय में भौतिकी के प्रोफेसर बन गए और सन् 1944 में उन्होंने अमरीका की नागरिकता ले ली।

फर्मी का जीवन पूर्णतः आडम्बर मुक्त था। फर्मी(enrico fermi life)के जीवन की एक घटना बड़ी ही प्रसिद्ध है। यह घटना उनकी सादगी के साथ-साथ भी इस बात को प्रदर्शित करती है

कि अपने प्रयोगात्मक कार्यों में वे पूरे मन से लगे रहते थे। एक बार की बात है कि फर्मी(Enrico Fermi invention) अपनी प्रयोगशाला के एक कमरे से दूसरे कमरे में कोई यंत्र ले जा रहे थे और एक प्रयोग चालू करने जा रहे थे।

तभी कोई अनजान व्यक्ति उनसे मिलने के लिए
आया। वह प्रोफेसर फर्मी को नहीं जानता था, उसने उन्हीं से पूछा कि मैं प्रोफेसर फर्मी(about Enrico Fermi) से मिलना चाहता हूं। क्या आप बता सकेंगे कि वे कहां मिलेंगे? प्रोफेसर फर्मी(Enrico Fermi)का मस्तिष्क अपने प्रयोग की तरफ लगा हुआ था।

उन्होंने उस व्यक्ति से कहा कि आप थोड़ी देर कमरे में बैठिए, मैं आपको प्रोफेसर फर्मी से मिला दूंगा। वे यह कह कर दूसरे कमरे में अपना प्रयोग चालू करने के लिए चले गए। अपना प्रयोग चालू करने के बाद वे उस व्यक्ति के पास आए और उससे कहा कि कहिए मैं ही फर्मी हूं।

वह व्यक्ति विज्ञान में उनकी तन्मयता देखकर आश्चर्यचकित रह गया। इस घटना से यह स्पष्ट हो जाता है कि जितनी दिलचस्पी उन्हें अपने विज्ञान के कार्यों में थी उतनी किसी दूसरे में नहीं। कोलम्बिया विश्वविद्यालय में उन्होंने नियंत्रित नाभिकीय श्रृंखला प्रक्रियाओं पर कार्य आरम्भ किया।

वे न्यूट्रॉनों द्वारा यूरेनियम के नाभिकों को तोड़ने में सफल हो गए। इसी आधार पर कई वर्षों के अथक परिश्रम के बाद सन् 1942 में उनके निर्देशन में शिकागो में पहली नाभिकीय भट्टी बनाई गई। इस भट्टी में परमाणु विखंडन द्वारा ऊर्जा पैदा की गई थी।

इससे सारे विश्व में तहलका मच गया। लोगों ने तो यहां तक कहा कि इटली का यह नाविक अपने आविष्कारों द्वारा एक नई दुनिया में पहुंच गया है। इन्हीं दिनों ओटोहन (Otto Hann)फ्रिट्ज स्ट्रासमैनन (Fritz Strassmann) इस बात को सिद्ध करने की कोशिश कर रहे थे कि फर्मी यूरेनियम के नाभिकों को न्यूट्रॉन बौछार द्वारा छोटे-परमाणुओं में तोड़ने का प्रयास कर रहा है ।

फर्मी(Enrico Fermi) के समूह में काम करने वाले वैज्ञानिकों ने आइन्स्टीन पर इस बात का दबाव डाला कि वे राष्ट्रपति रूजवेल्ट को एक पत्र लिखें और उन्हें बताएं कि नाभिकीय विखंडन द्वारा एक शक्तिशाली बम का निर्माण किया जा सकता है और हो सकता है कि जर्मनी के वैज्ञानिक शायद इस प्रकार के विकास में लगे हुए हों ।

राष्ट्रपति रूजवेल्ट परमाणु बम विकसित करने के सुझाव पर सहमत हो गए। इस कार्य के लिए बहुत सारा धन मंजूर कर दिया गया। गुप्त रूप से फर्मी और उनके सहयोगियों ने परमाणु बम विकसित करने के लिए कार्य करना आरम्भ किया।

इस कार्य के लिए मेनहेटन प्रोजेक्ट पूरा करने के बाद वे परमाणु बम बनाने के लिए लॉस अलामोस चले गए। 16 जुलाई, 1945 को परमाणु बम का सफल परीक्षण सम्पन्न हुआ।

इस महाविनाशक बम को दूसरे विश्वयुद्ध में जापान के दो नगरों पर गिराया भी गया। अपने आविष्कार के महाविनाशक रूप को देखकर फर्मी( enrico fermi biography) को काफी दुख हुआ वे दूसरे विश्वयुद्ध के बाद शिकागो विश्वविद्यालय में आ गए। वहां उन्हीं के नाम पर नाभिकीय भौतिकी का अध्ययन करने के लिए एक संस्थान का निर्माण किया गया, जो आज भी नाभिकीय भौतिकी के अनेक क्षेत्रों में अनुसंधान कार्य कर रहा है।

फर्मी(enrico fermi biography)अपने समय के माने हुए अध्यापक एवं अन्वेषक थे। उन्होंने भौतिकी के विषयों पर कई पुस्तकें भी लिखी हैं।
फर्मी की वैज्ञानिक उपलब्धियां इतनी अधिक थीं कि उन्हें 19 मार्च, 1946 को ‘मैडल ऑफ मेरिट ऑफ द कांग्रेस ऑफ द यूनाइटेड स्टेट्स’ प्रदान किया गया।

एनरिको फर्मी की मृत्यु-Enrico Fermi death

जब वे अपनी ख्याति के उच्चतम शिखर पर थे तभी 53 वर्ष की अल्प आयु में उनका देहांत हो गया।विज्ञान के महापुरुष के सम्मान में एक तत्त्व का नाम फर्मियम (Fermium) रखा गया। अमरीकी सरकार ने उनके सम्मान में फर्मी पुरस्कार की स्थापना की, जिस प्रतिवर्ष विज्ञान के क्षेत्र में असाधारण कार्य के लिए अमरीकी वैज्ञानिकों को दिया जाता है।

आधुनिक विश्व के अनेक देशों में नाभिकीय भट्ठियां (Nuclear Reactors) हैं, जो भांति-भांति के समस्थानिकों (Isotopes) बनाने और विद्युत उत्पादन के लिए प्रयोग किए जा रहे हैं। इन सभी नाभिकीय भट्टियों के स्वरूप में थोड़ा-बहुत परिवर्तन अवश्य आया है लेकिन मूल सिद्धांत अभी भी वही है, जो फर्मी ने प्रतिपादित किया था।

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