अमोदेओ ऐवोगेड्रो की प्रेरणादायक जीवनी हिंदी -Biography of Amedeo Avogadro in hindi

अमोदेओ ऐवोगेड्रो की प्रेरणादायक जीवनी हिंदी -Biography of Amedeo Avogadro in hindi
  • जन्म-9 जून, 1776
  • जन्म स्थान–इटली
  • निधन–1856 ई.

एवोगैड्रो(Amedeo Avogadro)ने एक महत्त्वपूर्ण नियम संसार को दिया कि–’किन्हीं भी दो गैसों के समान परिमाणों में अणुओं की संख्या समान होती है बशर्ते उनका दबाव व तापमान वही हो।’ एक अणु में अनेक परमाणुओं की उपस्थिति का सिद्धांत भी क्रान्तिकारी सिद्ध हुआ।

विज्ञान जगत मे 50 सालो तक उनका कार्य पर्दे के पीछे रहा – interesting facts about amedeo avogadro

आज भी विज्ञान के विद्यार्थी को एक विदेशी भाषा आवश्यक तौर पर अपने पाठ्यक्रम में पढ़नी पड़ती है आज तो इलेक्ट्रॉनिक मशीनें भी इस काम के लिए तैयार हो चुकी हैं—कि विदेशी भाषाओं, विशेषतः रूसी, जबानों में उपलब्ध वैज्ञानिक सामग्री को अंग्रेजी में अनूदित किया जा सके और एक दूसरी किस्म की इलैक्ट्रॉनिक मशीनें भी बन चुकी हैं

जो हर देश में हो रही वैज्ञानिक प्रगति की अनगिनत रिपोर्टों को संक्षिप्त कर सकेंगी। वैज्ञानिकों का बहुत-सा समय इन रिपोर्टों के अध्ययन में ही गुजर जाता है।

वैज्ञानिक शायद कोई भी नहीं चाहता कि देश-देशान्तर में हो रही खोजें उससे नजर अंदाज हो जाएं। हालांकि कभी-कभी गफलत भी हो जाती है। एक लेख नजर में न आया, या उसका तात्पर्य समझने में कुछ गलतफहमी हो गई।

ऐसा एक निबंध फ्रांस में कभी प्रकाशित हुआ था। किंतु 50 साल से ज्यादा हो गए और किसी की निगाह उसपर नहीं पड़ी। उसमें प्रस्तुत विचारों का महत्त्व भौतिकी और रसायन में प्रगति लाने के लिए बहुत अधिक था।

अमोदेओ ऐवोगेड्रो का जन्म- Biography of Amedeo Avogadro in hindi

अमादेओ ऐवोगेड्रो (Amedeo Avogadro) का जन्म इटली के तूरीन शहर में 1776 में हुआ था। उनके पिता एक वकील थे और चाहते थे कि उनका पुत्र भी बड़ा होकर वकील ही बने।
बचपन से एवोगेड्रो होनहार थे और 15 वर्ष के होते-होते उन्होंने बी.ए. पास कर लिया और बीस वर्ष की उम्र तक उन्होंने ‘चर्च ला’ में डॉक्टरेट भी हासिल कर ली।

परंतु तीन साल वकालत की प्रेक्टिस करने के बावजूद वे खुद को वकालत से नहीं जोड़ पाए। उनकी वास्तविक रुचि गणित रसायन और भौतिकी के अध्ययन में थी परिणामस्वरूप उन्होंने वकालत छोड़ दी। विद्युत पर कुछ मौलिक अनुसंधान की बदौलत स्थानीय वैज्ञानिकों में उनकी पूछ होने लगी।

33 वर्ष की उम्र में ऐवोगेड्रो(Amedeo Avogadro)को इटली के उत्तर में वेर्सेलि के रॉयल कालिज में फीजिक्स की प्रोफेसरी मिल गई। दो साल बाद, 1811 में अणुओं के सम्बंध में उनका एक प्रसिद्ध लेख, फ्रांस के ‘जर्नाल दे फिजीक’ में छपा। इस लेख में ऐवोगेड्रो ने अणु और कण में परस्पर अंतर को स्पष्ट किया था। दुर्भाग्य से उस वक्त यह लेख वैज्ञानिक समुदाय की निगाह में नहीं आया।

विज्ञान के क्षेत्र मे ऐवोगेड्रो का योगदान-amedeo avogadro contribution to chemistry

1811 में अमादेओ ऐवोगेड्रो( Amedeo Avogadro)ने अणु और कण में परस्पर अंतर को स्पष्ट किया था। इस अंतर की तब तक उपेक्षा ही होती आ रही थी, हालांकि विज्ञान में यह भेद बहुत ही मौलिक महत्त्व का है।

आज हर कोई जानता है पानी हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का मिश्रण है और वैज्ञानिकों ने इन अणुओं को परिगणित करने की विधि भी निकाल ली है, किंतु वैज्ञानिकों द्वारा अणु-गणना प्रणाली के आविष्कृत किए जाने से बहुत पहले ही ऐवोगेड्रो ने यह विचार विज्ञान-जगत के सम्मुख उपस्थित कर दिया था

कि” किन्हीं भी दो गैसों के समान परिणामों में इन अणुओं(Amedeo Avogadro mole) की संख्या भी समान ही होती है, बशर्ते कि उनका तापमान और दबाव वही हो। आज रसायन-शास्त्र में इस सिद्धांत को ऐवोगेड्रो का नियम कहा जाता है।”

अणु-विज्ञान का जनक था डाल्टन, किंतु वह भी जल को HO, मान कर ही संतुष्ट था और सामान्यतः रसायनविद इतने से ज्ञानवर्धन से ही संतुष्ट हो भी जाते हैं कि जिस वस्तु को हम इतने अरसे से एक तत्त्व मानते आए थे वह वस्तु एक यौगिक है। किंतु इतना ही ज्ञान हर चीज की व्याख्या कर सकने के लिए पर्याप्त नहीं होता।

वैज्ञानिकों के लिए अवयवों की निश्चित मात्रा का ज्ञान भी आवश्यक होता है। एवोगेड्रो(about Amedeo Avogadro) के 1811 में प्रकाशित लेख पर तकरीबन अगले पचास वर्षों तक किसी का ध्यान न गया और वैज्ञानिकों के सामने अणु और कणों की गणना सम्बंधी समस्या बनी ही रही।

1860 में जर्मनी के कार्ल्सरूहे शहर में एक विज्ञान परिषद् इसी प्रश्न को सुलझाने के लिए बुलाई गई। कितने ही विद्वानों ने अपने विचार इस विषय पर अभिव्यक्त किए। परंतु कोई उचित निष्कर्ष नहीं निकला।

तब एक इटैलियन रसायनविद् स्तालिनस्लाओ कैनिजारों ने ऐवोगेड्रो(Amedeo Avogadro in hindi)के लेख को प्रस्तुत किया। पहली बार ही वैज्ञानिकों की नजर इस लेख पर पड़ी, किंतु किसी भी निर्णय पर पहुंचने से पूर्व ही सभा विसर्जित कर दी गई। किंतु कैनिजारो की इस लेख में आस्था थी।

उसने इस लेख के संदेश को सिद्ध करने और दुनिया की नजरों में लाने के अपने प्रयास जारी रखे। उसने कक्षाओं में पढ़ाया, लेख लिखे, और ऐवोगेड्रो के नियम का जगह-जगह प्रचार किया। परिणाम यह हुआ कि दुनिया ने आखिर उसे सुना भी, और सब एवोगेड्रो के नियम को मानने लग गए।

1891 में रॉयल सोसायटी की ओर से कैनिजारों को काप्ले मेडल मिला और उसके अथक प्रयासों के फलस्वरूप एवोगेड्रो(Biography of Amedeo Avogadro in hindi )का नाम विज्ञान जगत में अमर हो गया।

ऐवोगेड्रो की मृत्यु -Amedeo Avogadro death

ऐवोगेड्रो का पूरा जीवन विज्ञान के अध्ययन-अध्यापन में ही बीता। 80 साल की उम्र में जब उनकी मृत्यु हुई, दुनिया को उनकी वैज्ञानिक प्रतिभा के विषय में अभी कुछ भी ज्ञान न था।

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