जे. रॉबर्ट ओपनहीमर की जीवनी हिंदी-Biography of Robert Oppenheimer in hindi

जे. रॉबर्ट ओपनहीमर की जीवनी हिंदी-Biography of Robert Oppenheimer in hindi
  • जन्म-22 अप्रैल, 1904
  • जन्म स्थान-न्यूयॉर्क, अमरीका
  • निधन-18 फरवरी, 1967
  • निधन स्थान-प्रिन्स्टन, अमरीका

ये नाभिकीय अनुसंधान के क्षेत्र में अपने विशिष्ट योगदान के लिए जाने जाते | हैं। ओपनहीमर(Robert Oppenheimer) परमाणु बम के आविष्करकों में एक थे।

रॉबर्ट ओपनहीमर का जन्म -Robert Oppenheimer biography in hindi

ओपनहीमर का जन्म 22 अप्रैल, 1904 में हुआ था। उनके पिता जर्मनी के रहने वाले थे। माता और पिता दोनों ही यहूदी परिवार के थे। इनका परिवार धनी, सभ्य और दयालु था। बालक ओपनहीमर पढ़ाई-लिखाई में बहुत ही मेधावी था।

पांच दया की आयु में एक बार इनके दादा ने उन्हें कुछ चट्टानों के टुकड़े दिए, जिससे भू-विज्ञान में इनकी रुचि जाग्रत हो गई। उनकी मां ने उन्हें चित्रकारी और संगीत सिखाया। उनकी अभिलाषा एक शिल्पी बनने की थी।

जब ये सात वर्ष के हुए तब उन्होंने अपना विचार बदला और वे कवि बनने की इच्छा से कविताएं लिखने लगे। उनका मनपसन्द खिलौना सूक्ष्मदर्शी यंत्र था और उनका मनपसन्द खेल बरसात की बूंदों का निरीक्षण करना और छोटे जीवाणुओं को पहचानना था।

ओपनहीमर(Robert Oppenheimer)की शिक्षा बहुत ही अच्छे स्कूल में हुई, जहां उनमें आत्म-निर्भरता की भावना विकसित हुई । युवावस्था में ही उन्होंने फ्रेंच, स्पेनिश, इटेलियन और ग्रीक भाषाएं सीख ली।

जब उनकी उम्र बारह वर्ष की थी तब उन्हें एक क्लब में भाषण देने के लिए बुलाया गया। पहले तो उन्हें बहुत डर लगा और उन्होंने अपने पिता से कहा कि या तो वे कह दें कि मैं बीमार हूं या उन्हें सच बता दें।

उनके पिता ने उन्हें समझाया और वे निश्चित समय पर क्लब में भाषण देने के लिए गए। उनका भाषण मैनहेटन में पाए जाने वाली चट्टानों से सम्बंधित था। यह भाषण बहुत ही प्रभावशाली रहा और क्लब की पत्रिका में छापा गया।


17 साल की उम्र में उनके माता-पिता अमरीका चले गए। 19 वर्ष की आयु में ओपनहींमर शिक्षा(robert oppenheimer education)ग्रहण करने के लिए हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय चले गए।

उन्होंने स्नातक की परीक्षा में जितने अंक प्राप्त किए उतने हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय में पहले किसी के नहीं आए थे। उनके भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर का कहना था कि यह लड़का या तो भौतिक विज्ञान को या फिर सारे विश्व को हिला देगा। उन्होंने दोनों को ही हिला दिया।

परमाणु बम का अविष्कार -robert oppenheimer atomic bomb invention

हॉर्वर्ड से वे इंग्लैंड की प्रसिद्ध कैविण्डिश प्रयोगशाला में काम करने के लिए इंग्लैंड चले गए। वहां उन्होंने इंग्लैंड के अग्रणी भैतिकविदों के साथ काम किया और विचार-विमर्श किया। सन् 1929 में वे कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय में आ गए, जहां सन् 1931 में उन्हें ऐसोसिएट प्रोफेसर बना दिया गया। यहां वे नाभिकीय विज्ञान में अनेक प्रयोग करते रहे सन् 1941 से ओपनहीमर(Robert Oppenheimer atom bomb discovery)अमरीका की परमाणु बम बनाने की योजना में लग गए।

मई, 1942 में वे परमाणु बम विकसित करने वाले प्रोजेक्ट के कौर्डीनेटर बनाए गए। उसी वर्ष उन्हें परमाणु बम निर्माण(Atom bomb invention)करने वाले मैनहेटन प्रोजेक्ट का चीफ साइंस डाइरेक्टर बना दिया गया। सन् 1943 में ओपनहीमर की देख-रेख में परमाणु बम निर्माण के लिए लॉस अलामोस में वैज्ञानिकों की एक टीम बनाई गई।

परमाणु बम किस तरह बनाया गया यह तो आज भी गुप्त है लेकिन रात-दिन के कठिन परिश्रम से वैज्ञानिकों के इस दल ने ओपनहीमर(Robert Oppenheimer scientists)की देख-रेख में परमाणु बम बना ही डाला।

भूला जा सकता है सोमवार 16 जुलाई, 1945 के उस दिन को, जब प्रातःकाल 5.30 बजे विश्व के प्रथम परमाणु बम का परीक्षण किया गया था। इस परीक्षण के लिए अमरीका के लॉस अलामोस (Los Alamos) से 200 मील दूर अलेमोगोड़ों के उत्तर के रेगिस्तानी भाग को चुना गया था। परमाणु बम के परीक्षण(Atoms bomb testing)के लिए एक पहाड़ी पर 32 टन भार की 100 फुट ऊंची धातु की मीनार पर बम रखा गया था।

इस परीक्षण को देखने के लिए पहाड़ी से बहुत दूर एक हजार दर्शक उपस्थित थे।निर्धारित समय पर परमाणु बम(atom bomb) का विस्फोट किया गया। एक भयानक आवाज के साथ सारे क्षेत्र में प्रकाश फैल गया। नौ मील की दूरी पर एक नियंत्रण कक्ष में बैठे ओपनहीमर(Robert Oppenheimer)को तेज गर्मी का अनुभव हुआ। बम के विस्फोट से चालीस हजार फुट ऊंचाई का धुंए का विशाल बादल बन गया।

100 फुट ऊंची मीनार का नामो-निशान न रहा। नीचे की मिट्टी भी पिघल कर कांच में बदल गई। एक मील तक के क्षेत्र में सारे जीव-जंतु मर गए। यहां तक कि जमीन के नीचे छिपे सांप और दूसरे जंतु भी मर गए। 20 से 30 मील की दूरी तक पशुओं के बाल उड़ गए। इस विस्फोट को 450 मील की दूरी तक लोगों ने देखा।

ओपनहीमर(Robert Oppenheimer inventor) की देखरेख में निर्मित इस बम की सफलता को देखकर सारा संसार कांप उठा। मानव को केवल परीक्षण से संतोष न हुआ। द्वितीय विश्वयुद्ध(Second world war) चल रहा था और जापान किसी के सामने घुटने टेकने को तैयार न था। 6 अगस्त, 1945 को यूरेनियम से बना परमाणु बम(atom bomb) अमरीका ने जापान के हिरोशिमा नगर पर गिरा दिया।

बीस हजार टन टी.एन.टी. के समतुल्य यह बम 1800 फुट की ऊंचाई पर विस्फोटित किया, जिससे 80,000 लोग तुरंत ही मौत के घाट उतर गए और 70,000 लोग घायल हो गए। इस नगर के दृश्य को देखकर ऐसा लगता था जैसे यहां सभ्यता का विनाश हो गया हो।

कितना क्रूर है मानव! इसे इतने विनाश से भी संतोष न हुआ और इसके तीन दिन बाद अर्थात 9 अगस्त को प्लूटोनियम से बना दूसरा बम जापान के नागासाकी(Nagasaki)नगर पर गिरा दिया गया। इससे 40,000 लोगों की मृत्यु हो गई और 25,000 लोग विकृत और घायल हो गए।

इस वीभत्स दृश्य को देखकर 10 अगस्त, 1945 को
जापान ने बिना किसी शर्त के घुटने टेक दिए। इस दृश्य को देखकर ओपनहीमर(Robert Oppenheimer)का मानस मन रो पड़ा और उन्होंने अपना त्याग-पत्र दे दिया। उन्होंने कहा था- ‘मैं हथियार बनाने वाला नहीं हूं।’

वास्तविकता तो यह है कि ओपनहीमर (Robert Oppenheimer atom bomb inventor)ने स्वयं परमाणु बम का निर्माण नहीं किया और न ही उन्होंने इसके बनाने का सिद्धांत प्रतिपादित किया। यह तो कई वैज्ञानिकों के मिले-जुले प्रयासों का परिणाम था। चूंकि ओपनहीमर परमाणु बम बनाने वाली वैज्ञानिकों की इस टीम के अध्यक्ष थे, इसलिए उन्हें बहुत से लोग परमाणु बम का जन्मदाता कहते हैं।

परमाणु बम के निर्माण में तथा सिद्धांत प्रतिपादित करने में ओपनहीमर के साथ-साथ ओटोहान, कौम्पटन, फर्मी, सजिलार्ड (Szilard),आइन्स्टीन आदि मुख्य थे। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद परिणामों से आहत होकर उन्होंने लॉस अलामोस से इस्तीफा दे दिया।

रॉबर्ट ओपनहीमर की मृत्यु-robert oppenheimer death

सन् 1947 में उन्हें परमाणु ऊर्जा विभाग का चेयरमैन बना दिया गया। सन् 1950 में युद्ध के लिए किए गए कार्यों के लिए उन्हें विशेष सम्मान दिया गया।

सन् 1963 में उन्हें परमाणु ऊर्जा विभाग का ऐनरीकोफर्मी पुरस्कार प्रदान किया गया। विज्ञान के क्षेत्र में यह अमरीका का उच्चतम पुरस्कार माना जाता है। 18 फरवरी, 1967 में इस कर्मठ वैज्ञानिक की मृत्यु हो गई

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