कंप्यूटर के बारे में बेसिक जानकारी- Basic information about computer in Hindi

कंप्यूटर के बारे में बेसिक जानकारी- Basic information about computer in Hindi

कंप्यूटर ज्ञान का असीम भंडार है कंप्यूटर शब्द की उत्पत्ति अंग्रेजी के “compute” से हुई है। जिसका अर्थ होता है गणना करना। शुरुआती दिनों में कंप्यूटर का उपयोग (Use of computer in Hindi)मूल रूप से गणना सम्बंधित कार्यों के लिए ही हुआ था। लेकिन आज जीवन के हर क्षेत्र में कंप्यूटर का use किया जाता है।

“Computer एक यंत्र है जो data ग्रहण करता है और वह इसे software या program के अनुसार किसी परिणाम के लिए प्रोसेस करता है।”

कंप्यूटर को कृत्रिम बुद्धि( artificial intelligence) की संज्ञा दी गई है इसकी याद रखने की क्षमता मनुष्य की तुलना में उच्च होती है।

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कंप्यूटर के कार्य- function of computer in Hindi

कंप्यूटर को जानकारी का इंजन कहां गया है। जिस प्रकार गाड़ी में पेट्रोल या डीजल डालकर गाड़ी में यांत्रिक गतिक ऊर्जा उत्पन्न की जाती है। ठीक उसी प्रकार कंप्यूटर(computer in Hindi) में जानकारी डालकर उसे इस प्रकार से program किया जाता है कि उसका जीवन यापन में सीधा प्रयोग किया जा सके।

कंप्यूटर किसी भी कार्य को पलक झपकते ही कर देता है तकनीकी दृष्टिकोण से कंप्यूटर के चार कार्य मुख्य हैं।

1) डाटा का संकलन या निवेशन( collection and input)
2) डाटा का संचयन( storage)
3) डाटा संसाधन( processing)
4) इंफॉर्मेशन( information)

कंप्यूटर का इतिहास- History of computer in Hindi

कंप्यूटर ने हमारे जीवन के हर पल को किसी ना किसी तरह से छूआ है। यह किसी जादू से कम नहीं है पिछले लगभग 50 सालों में इसने हमारे समाज के रहन-सहन काम करने के तरीकों को बदल डाला है।

1) एबेकस-Abacus

प्राचीन समय में गणना करने के लिए एबेकस का उपयोग किया जाता था। यह गणना तारों में पिरोए मोतियों के सहारे किया जाता था। इसका आविष्कार चीन में हुआ था।

2) पास्कल केलकुलेटर- Pascal calculator

सर्वप्रथम गणना करने वाली मशीन 1645 में फ्रांस के गणितज्ञ ब्लेज पास्कल ने बनाई थी। इस केलकुलेटर में इंटरलॉकिंग गेयर का उपयोग किया गया था। जिसमें 0 से लेकर 9 तक की संख्याएं अंकित थी। यह केवल जोड़ घटाव करने में सक्षम थे। जिस कारण इसे adding machine कहां गया।

3) एनालिटिकल इंजन- analytical engine

सन 1801 मे जोसफ जैक्वार्ड स्वचालित बुनाई मशीन का आविष्कार किया जिसमें धातु के प्लेटों को छेद कर पंच किया गया था और जो कपड़ों की बुनाई को नियंत्रित करने में सक्षम था।

सन 1820 में एक अंग्रेज अविष्कारक चार्ल्स बैबेज(Charles Babbage) ने डिफरेंस इंजन बनाया। चार्ल्स बैबेज के इस कांसेप्ट का उपयोग कर दुनिया का पहला कंप्यूटर प्रोटोटाइप बनाया गया। इसी कारण चार्ल्स बैबेज को कंप्यूटर का जन्मदाता( father of computer) कहा जाता है।

4) प्रथम इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर- first electronic computer Eniac in hindi

1942 मे हावर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एच आइकन ने कंप्यूटर का निर्माण किया। यह कंप्यूटर मार्क-1 आज के कंप्यूटर का प्रोटोटाइप था। सन 1946 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ENIAC( electronic numerical integrated and calculator) का निर्माण हुआ। जो दुनिया का पहला इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर था।

5) यूनीभेक-1(UNIVAC-1)

इसे Universal automatic computer भी कहते हैं सन 1951 में व्यापारिक उपयोग के लिए उपलब्ध पहला कंप्यूटर था इसमें कंप्यूटर की प्रथम पीढ़ी के गुण थे।

कंप्यूटर की पीढ़ियां- computer generation in Hindi

कंप्यूटर के विभिन्न पीढ़ियों को विकसित करने का उद्देश्य उसको छोटा तेज और सस्ता बनाना रहा है। इस प्रकार कंप्यूटर का पांच विभिन्न चरणों मे विकास हुआ। पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटरों पर आजकल अनुसंधान चल रहा है इस पीढ़ी के कंप्यूटर(computer in Hindi)उपरोक्त चारों पीढ़ियों के कंप्यूटर से बिल्कुल ही अलग होंगे। क्योंकि वैज्ञानिक इसमें मनुष्यों की तरफ सोचने समझने की क्षमता लाना चाहते हैं।

प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर की विशेषताएं- First generation computer in Hindi

  1. इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में निर्वात् ट्यूब का उपयोग ।
  2. प्राइमरी इंटरनल स्टोरेज के रूप में मैग्नेटिक ड्रम का उपयोग।
  3. सीमित मुख्य भंडारण क्षमता (Limited main storage capacity)|
  4. मंद गति के इनपुट-आउटपुट ।
  5. निम्न स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा, मशीनी भाषा, असेम्बली भाषा ।
  6. ताप नियंत्रण में असुविधा।
  7. उपयोग-पेरौल प्रोसेसिंग और रिकार्ड रखने के लिए।
  8. उदाहरण- IBM 650 UNIVAC

द्वितीय पीढ़ी की कंप्यूटर की विशेषताएं- Second generation computer in Hindi

  1. ट्रांजिस्टर का उपयोग आरम्भ ।
  2. प्राइमरी इन्टरनल स्टोरेज के रूप में चुम्बकीय कोर (Magnetic core) का
    उपयोग।
  3. मुख्य भंडारण क्षमता में वृद्धि ।
  4. तीव्र इनपुट-आउटपुट ।
  5. उच्च स्तरीय भाषा (कोबोल, फारट्रान).
  6. आकार और ताप में कमी।
  7. तीव्र और विश्वसनीय।

8.बेंच ओरिएन्टेड उपयोग-बिलिंग, पेरौल प्रोसेसिंग, इनभेन्टरी फाइल का अपडेसन ।

  1. उदाहरण- IBM 1401 Honey well 200 CDC 1604.

तृतीय पीढ़ी की कंप्यूटर की विशेषताएं- Third generation computer in Hindi

  1. इंटीग्रेटेड चिप का उपयोग ।
  2. चुम्बकीय कोर और सॉलिड स्टेट मुख्य भंडारण के रूप में उपयोग । (SSI
    और MSI)
  3. अधिक लचीला (More Flexible) इनपुट-आउटपुट ।
  4. तीव्र, छोटे, विश्वसनीय।
  5. उच्चस्तरीय भाषा का वृहत् उपयोग ।
  6. रिमोट प्रोसेसिंग और टाइम शेयरिंग सिस्टम, मल्टी प्रोग्रामिंग ।
  7. इनपुट आउटपुट को नियंत्रित करने के लिए सॉफ्टवेयर उपलब्ध ।
  8. उपयोग-एयरलाइन रिजर्वेशन सिस्टम, क्रेडीट कार्ड बिलिंग, मार्केट
    फोरकास्टिंग।
  9. उदाहरण- IBM System/360, NCR 395, Burrough B6500

चतुर्थ पीढ़ी के कंप्यूटर की विशेषताएं- Fourth generation computer in Hindi

  1. VLSI का तथा ULSI उपयोग ।
  2. उच्च तथा तीव्र क्षमता वाले भंडारण ।
  3. भिन्न-भिन्न हार्डवेयर निर्माता के यंत्र बीच एक अनुकूलता ताकि उपभोक्ता
    किसी एक विक्रेता से बँधा न रहे।
  4. मिनी कम्प्यूटर के उपयोग में वृद्धि ।
  5. माइक्रोप्रोसेसर और मिनी कम्प्यूटर का आरंभ ।
  6. उपयोग- इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर, व्यवसायिक उत्पादन और व्यक्तिगत
    उपयोग।
  7. उदाहरण- IBM PC-XT, एप्पल II

पंचमी पीढ़ी की कंप्यूटर की विशेषताएं- Fifth generation computer in Hindi

  1. ऑप्टिकल डिस्क का भंडारण में उपयोग ।
  2. इंटरनेट, ई-मेल तथा www का विकास ।
  3. आकार में बहुत छोटे, तीव्र तथा उपयोग में आसान प्लग और प्ले ।
  4. उपयोग- इंटरनेट, मल्टीमीडिया का उपयोग करने में ।
  5. उदाहरण- IBM नोटबुक, Pentium PC, सुपर कम्प्यूटर इत्यादि ।
  6. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग।

कंप्यूटर की भाषाएं- computer language in Hindi

कंप्यूटर में किसी भी प्रकार की बुद्धि नहीं होती जिस कारण उसे प्रोग्राम की सहायता से बुद्धि प्रदान की जाती है। यह प्रोग्राम कई स्तरों की भाषाओं में लिखे जाते हैं। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि कंप्यूटर(computer in Hindi) सिर्फ 0 और 1 की भाषा समझता है। जिनके बारे में अब हम जानेंगे।

कंप्यूटर के अविष्कार से लेकर अब तक तीन तरह की भाषाओं का उपयोग किया जाता रहा है-

1) मशीनी भाषा- Machine code

2) असेंबली भाषा- Assembly code

3) उच्च स्तरीय भाषा- High level languages.

1) मशीनी भाषा- Machine code

यह भाषा 0 और 1 के समूह से बनी होती है। जिसे कंप्यूटर सीधे समझ सकता है इस भाषा में प्रत्येक आदेश(instruction) के दो भाग होते हैं। एक operation code और दूसरा location code। यह दोनों code 0 और 1 क्रम में ही व्यक्त किए जाते हैं। जब कंप्यूटर का आविष्कार हुआ था उस समय ऐसी भाषा में program लिखे जाते थे।

2)असेंबली भाषा- Assembly code

असेंबली भाषा का आविष्कार मशीनी भाषा में आ रहे दिक्कतों को दूर करने के लिए किया गया था। इसमें मशीनी कोड के स्थान पर mnemonic code का प्रयोग किया गया था। जिसे मानव मस्तिक आसानी से पहचान सकता था। जैसे – SUB- substract, JMP- jump

इस तरह के कई mnemonic code जिन्हें आसानी से पहचाना या याद रखा जा सकता था। इस भाषा में प्रयोग किया गया था।

3) उच्च स्तरीय भाषा- High level languages

असेंबली भाषा में प्रोग्राम लिखना बहुत लंबा और कठिन था। जब कंप्यूटर का प्रयोग अधिक बढ़ने लगा तब ऐसी भाषाओं की आवश्यकता बढ़ने लगी। जो लगभग हमारे द्वारा बोली जाने वाली भाषा के जैसी ही हो ताकि सामान्य व्यक्ति भी कंप्यूटर(computer in Hindi) का प्रयोग कर सकें।

इस भाषा में प्रोग्राम लिखते समय programmer प्राकृतिक भाषा जैसे English और math का प्रयोग करते हैं। इस भाषा को बनाने में सबसे पहले IBM ने 1957 में कोशिश की। जिसके परिणाम स्वरूप फ्रोंटोन भाषा का आविष्कार हुआ। उस समय से अब तक कई सैकड़ों भाषाओं का आविष्कार हो चुका है।

कम्प्यूटर के इनपुट तथा आउटपुट उपकरण- output and input device in computer in Hindi

एक कम्प्यूटर में input तथा output दोनों उपकरण होते हैं। जिन यंत्रों के द्वारा डेटा input किया जाता है अर्थात् जिन यंत्रों से आँकड़ें, शब्द या निर्देश मेमोरी में डाले जाते हैं,

Input devices कहलाते हैं। दूसरे शब्दों में ये ऐसे यंत्र हैं जिनके द्वारा हम कम्प्यूटर(computer in Hindi) को निर्देश देते हैं और कम्प्यूटर उन पर प्रोग्राम के अनुरूप कार्य करता है। जैसे कि की-बोर्ड, माउस आदि ।

कुछ प्रमुख इनपुट डिवाइसेस निम्नलिखित हैं :

की बोर्ड (Key-Board)-

की-बोर्ड किसी भी computer की प्रमुख इनपुट डिवाइस है। जिनके प्रयोग से कम्प्यूटर में text तथा numerical data निवेश (entry) कर सकते हैं । की बोर्ड में सारे अक्षर typewriter की तरह क्रम में होते हैं, लेकिन इसमें टाइपराइटर से ज्यादा बटन होते हैं।

माउस(Mouse)-

माउस एक इनपुट डिवाइस है जिसका आविष्कार 1977 में किया गया था। इसमें लेफ्ट बटन, राइट बटन और बीच में एक स्क्रोल व्हील होता है। माउस के उपयोग करने से हमे कीबोर्ड के किसी बटन को याद रखने की आवश्यकता नहीं होती।

ट्रैकबॉल (Trackball)

यह माउस का ही एक विकल्प है। इसके ऊपर एक बॉल होता है जिसे की दिशा में परिवर्तन किया जाता है। मुख्यतः इसका उपयोग चिकित्सा के क्षेत्र में, कैड (CAD) तथा कैम (CAM) में किया हाथ से घुमाकर प्लाइंटर जाता है।

जॉयस्टिक (Joystick)

यह एक इनपुट डिवाइस है जिसका उपयोग विडियो तथा computer गेम खेलने में होता है। इसकी भी कार्य प्रणाली ट्रैक बॉल की तरह होती है, केवल बॉल की जगह इसमें एक छड़ी (Stick) लगी होती है।

स्कैनर (Scanner)

इसका उपयोग टेक्स्ट (Text) या चित्र (Image) को डिजिटल रूप में परिवर्तित करने में होता है जिसे हमलोग स्क्रीन पर देख सकते हैं। इन स्कैन चित्रों का उपयोग भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में किया जा सकता है। इन स्कैन चित्रों को मेमोरी या सीडी में सुरक्षित रखा या कोई process या editing किया जा सकता है। यह भी इनपुट डिवाइस है। यह फोटो कॉपियर मशीन की तरह दिखता है। काउन्टर पर बैठे सेल्स क्लर्क किसी वस्तु का टैग स्कैन कर सोस डाटा automation का प्रयोग करता है।

माइक्रोफोन (Microphone)

इस इनपुट डिवाइस का प्रयोग किसी भी आवाज
रिकार्ड करने में होता है।

वेब कैम (Web Cam)

इसका प्रयोग internet पर फोटो देखने तथा फोटो लेने के लिए होता है। इसका उपयोग कर इंटरनेट की सहायता से दूर बैठे आदमी का फोटो देख सकते हैं, परन्तु दूसरे व्यक्ति के पास भी webcam उपलब्ध होना चाहिए। यह डिजिटल कैमरे की तरह होता है जिसे कम्प्यूटर से जोड़कर input device के रूप में उपयोग होता है।

बार कोड रीडर (Bar Code Reader)

यह Point of sales डेटा रिकॉर्डिंग है। आजकल सुपर मार्केट में मूल्यों तथा डेटा अपडेट करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। सुपर मार्केट में सामान के ऊपर जो सफेद और काली लाइन बनी होती है, वह बार कोड है। जिसे बार कोड रीडर जो एक scanning device है के द्वारा स्कैन कर डिजिटल रूप में कम्प्यूटर में भेजा जाता है। आजकल बार कोड रीडर का उपयोग सुपर मार्केट, पुस्तकालय, बैंक तथा पोस्ट ऑफिस में भी किया जाता है।

ओ सी आर (OCR-Optical Character Reader)

यह type या हाथ से लिखे हुए डेटा को भी पढ़ सकता है। यह स्कैनर तथा विशेष सॉफ्टवेयर का संयोजन है जो printed data या हस्तलिखित डेटा को ASCII में रूपान्तरित कर देता है। इसका उपयोग कागजी रिकॉर्ड को electricfiling तथा स्कैन चालान को स्प्रेडशीट में परिवर्तित करने में होता है।

एम आई सी आर (MICR-Magnetic Ink Character Reader)

खास चुम्बकीय स्थाही से लिखे अक्षरों या डाक्यूमेंट को इसके द्वारा पढ़ा जाता है, या computer में संग्रह किया जाता है। बैंकों में इस तकनीक का व्यापक उपयोग होता है। चुम्बकीय स्याही और विशेष फॉन्ट का संयोजन से प्रति घंटे हजारों चेक स्कैन किया जा सकता है। जिससे समय की बचत तथा तीव्र गति से कार्य सम्पादित किया जा सकता है।

ओ एम आर (OMR-Optical Mark Reader)

यह एक इनपुट डिवाइस है जिसका प्रयोग फार्म या कार्ड पर विशिष्ट स्थानों पर डाले गये चिहों को पढ़ने में होता है। इसमें उच्च तीव्रता वाले प्रकाशीय किरणों को डालकर चिह्नों को पढ़ा जाता है। इसका उपयोग लॉटरी टिकट,ऑफिसियल फार्म तथा वस्तुनिष्ठ उत्तर पुस्तिकाओं को जाँचने में होता है।

किमबॉल टैग रीडर (Kimball Tag Reader)

किमबॉल टैग एक छोटा-सा कार्ड है, जिसमें छेद पंच रहते हैं। जैसे किसी दुकान में कपड़े में कार्ड लगा रहता है जिसे खरीदने के बाद निकाल दिया जाता है और कम्प्यूटर केन्द्र में प्रोसेसिंग के लिए भेज दिया जाता है।

स्पीच रेकग्निशन सिस्टम (Speech Recognition System)

स्पीच रिकग्निशन माइक्रोफोन या टेलीफोन द्वारा बोले गये शब्दों के सेट को पकड़कर ध्वनि में परिवर्तित करने
की क्रिया है। recognised शब्दों को कमांड और नियंत्रण, data entry और दस्तावेज तैयार करने के लिए उपयोग किया जा सकता है। स्पीच रेकग्निशन सिस्टम, बोले हुए शब्दों को मशीन के पढ़ने लायक इनपुट में बदल देता है। इसका उपयोग Voice डायलॉग, सरल डाटा प्रविष्टि, स्पीच से टेक्स्ट प्रोसेसिंग तथा हवाई जहाज कॉकपिट में होता है। जो व्यक्ति कम्प्यूटर इनपुट के लिए अपने हाथों का प्रयोग नहीं कर पाते, वे speech recognition system की सहायता से कम्प्यूटर पर कार्य कर सकते हैं।

लाइट पेन (Light Pen)

यह एक इनपुट डिवाइस है। इसका उपयोग (direct)
स्क्रीन पर कुछ भी लिखने, चित्र बनाने में होता है।

टच स्क्रीन (Touch Screen)

यह एक इनपुट डिवाइस है। जब हम इस स्क्रीन को स्पर्श करते हैं तो यह पता लगा लेता है कि हमने इसे कहाँ स्पर्श किया है। इसका उपयोग बैंकों में एटीएम तथा सार्वजनिक सूचना केन्द्रों में स्क्रीन पर उपलब्ध विकल्पों का चयन करने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग संगीत सुनने के लिए होता है।

आउटपुट डिवाइस
Output Devices

ये ऐसे उपकरण हैं जो process के उपरांत रिजल्ट देते या प्रदर्शित करते हैं। इसके द्वारा कम्प्यूटर(computer in Hindi) द्वारा प्रोसेड जानकारी को देखते या ग्रहण करते हैं।
कुछ आउटपुट डिवाइस निम्नलिखित हैं-
1.मॉनिटर (Monitor)

  1. प्रिन्टर (Printer)
  2. स्पीकर (Speaker)
  3. प्लॉटर (Plotter) )
  4. स्क्रीन इमेज प्रोजेक्टर (Screen Image Projector)

कंप्यूटर का विभिन्न क्षेत्रो मे उपयोग-Use of computer in hindi

1) शिक्षा(education)-

सबसे पहले computer का उपयोग गणित के बड़े-बड़े प्रश्नों को हल करने में होता था। इन बड़े computer का उपयोग विश्वविद्यालय के शिक्षक और उच्च कक्षाओं के विद्यार्थी अपने शोध विषयों में करते थे। जबसे माइक्रो कंप्यूटर्स का आविष्कार हुआ। यह एक घरेलू चीज बन कर रह गई।

2) व्यवसाय में उपयोग(Use in business)-

शुरुआती दिनों में जहां कंप्यूटर अंकगणित गणित की गणनाओ को सरल करने के लिए बनाए गए थे। वही आगे चलकर विभिन्न कार्यों में इनका प्रयोग किया जाने लगा। आज कंप्यूटर पर होने वाला 50% कार्य व्यवसायिक कार्य किस श्रेणी में आता है।

3) बैंकिंग(Banking)-

बैंक ऐसे संस्थान है। जहां पर लेखे जोखे का जबरदस्त कार्यभार होता है यहां जो व्यक्तिगत रिकॉर्ड ग्राहक के लिए बनाया जाता है। वह काफी अहमियत रखता है यहां अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज रखा जाता है जिसे भविष्य में कभी भी इसमें से सूचना मांगी जा सकती है। कंप्यूटर (computer in Hindi)के आ जाने से यह प्रक्रिया और आसान हो गई है। बैंकों की तरह इंश्योरेंस कंपनियों को भी बहुत बड़ा हिसाब किताब रखना होता है कई ग्राहकों का आजीवन रिकॉर्ड मेंटेन करना पड़ता है। यह सभी काम कंप्यूटर से ही संभव हो पाया है।

4) इंजीनियरिंग डिजाइन(Engineering design)-

इंजीनियरिंग डिजाइन एक बेहद महत्वपूर्ण कठिन विषय है। अच्छी डिजाइन के अच्छे परिणाम सामने आते हैं जबकी कमजोर डिजाइन से पूल के गलत बनकर गिरने का खतरा है बांध के बह जाने की संभावना है कार के उलट जाने या हवाई जहाज के कठिन समय में दुर्घटनाग्रस्त हो जाने का खतरा बना रहता है। हवाई जहाज और कारो की बनावट को संतुलित बनाने में भी कंप्यूटर की सहायता ली जा रही है।

5) अंतरिक्ष विज्ञान व मौसम की जानकारी(Space Science and Weather Information)

अंतरिक्ष कि सूचनाओं को कंप्यूटर द्वारा प्राप्त करना फिर विश्लेषण करके निष्कर्ष निकालना आजकल बहुत प्रचलित है। मौसम की भविष्यवाणी प्राप्त सूचनाओं के आधार पर ही किया जाता है। अगर यह कहा जाए कि चंद्रमा पर पहुंचना केवल कंप्यूटर(computer in Hindi) के वजह से संभव हो पाया तो इसमें कोई गलती ना होगी। क्योंकि बिना कंप्यूटर के हम इस आधुनिक जगत की कल्पना भी नहीं कर सकते।

6) दूर संचार(Communication)-

दूरसंचार एक ऐसा क्षेत्र है। जहां कंप्यूटर के बिना कुछ संभव ही नहीं है। हवाई यात्रा रेलवे यातायात नियंत्रण तार व टेलीफोन इत्यादि के सुचारू रूप से संचालन में इसका उपयोग बढ़ता ही जा रहा है। जैसे जैसे हवाई जहाज की रफ्तार तेज होती जाती है। वैसे वैसे निर्णय तुरंत लेने की आवश्यकता बढ़ती जाती है। जिसमें कंप्यूटर हमारी मदद करता है।

7) चिकित्सा क्षेत्र में उपयोग(Use in medical fields)

चिकित्सा के क्षेत्र में भी कंप्यूटर बहुत उपयोगी सिद्ध हो रहे है। सामान्य उपकरणों में अस्पताल का रिकॉर्ड रखना, दवाइयों की स्टाफ सूची रखना, उपकरणों की उपलब्धता का ब्यौरा रखना यह सभी काम कंप्यूटर(computer in Hindi) बहुत आसानी से कर लेते हैं।

इसके अलावा दवाइयों की उचित मात्रा का निर्धारण करने में भी कंप्यूटर सहायक होता है। उदाहरण के लिए कैंसर के रोग में radiotherapy द्वारा रोग का निदान किया जाता है। इसमें रेडियम की एक निश्चित मात्रा शरीर के अंदर डाली जाती है इस तरह की बेहद महत्वपूर्ण निर्णय कंप्यूटर द्वारा लिए जाते हैं।

8) प्रतिरक्षा(Defence)-

कंप्यूटर का अधिक से अधिक उपयोग प्रति रक्षा उपकरणों में भी हो रहा है जैसे-टैंकर, तोप आदि बड़ी-बड़ी मिसाइलों से लेकर परमाणु हमलों तक सभी कंप्यूटर द्वारा ही नियंत्रित होते हैं। कंप्यूटर के बिना इन सभी चीजों की कल्पना करना अंधेरे में तीर चलाने के समान होगा। आज हम उन्नति के जिस शिखर पर खड़े हैं। इसमें computer का सबसे बड़ा योगदान है।

ये article “कंप्यूटर के बारे में बेसिक जानकारी- Basic information about computer in Hindi” पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया. उम्मीद करता हुँ. कि इस article से आपको बहुत कुछ नया जानने को मिला होगा