व्यतिकरण क्या(Interference in hindi) है, व्यतिकरण की परिभाषा, व्यतिकरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझें?(Interference meaning in hindi)

व्यतिकरण क्या(Interference in hindi) है, व्यतिकरण की परिभाषा, व्यतिकरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझें?(Interference meaning in hindi)

व्यतिकरण की परिभाषा(Interference in hindi)- व्यतिकरण का अर्थ हुआ जब सामान आवृत्ति की दो तरंगे एक ही दिशा में चलकर माध्यम मे किसी बिंदु पर मिलती है तो व्यतिकरण की घटना होती है।

ध्वनि का व्यतिकरण (Interference of Sound)—

जब समान आवृत्ति या आयाम की दो ध्वनि-तरंगें एक साथ किसी बिन्दु पर पहुँचती हैं, तो उस बिन्दु पर ध्वनि-ऊर्जा का पुनः वितरण हो जाता है। इस घटना को ध्वनि का व्यतिकरण(Interference in hindi) कहते हैं।

यदि दोनों तरंगें उस बिन्दु पर एक ही कला (phase) में पहुँचती हैं, तो वहाँ ध्वनि की तीव्रता अधिकतम होती है। इसे सम्पोषी (constructive) व्यतिकरण कहते हैं।

यदि दोनों तरंगें विपरीत कला में पहुँचती हैं, तो वहाँ पर तीव्रता न्यूनतम होती है। इसे विनाशी(destructive) व्यतिकरण कहते हैं।

ध्वनि के व्यतिकरण का उदाहरण (Interference in hindi)

ध्वनि के व्यतिकरण के कई उदाहरण दैनिक जीवन में मिलते हैं। समुद्र में स्थान-स्थान पर ऊँचे प्रकाशघर (Light-House) बनाये जाते हैं, जहाँ से बड़े-बड़े साइरन बजाकर जहाजों को संकेत भेजे जाते हैं।

कभी-कभी जहाज ऐसे क्षेत्रों में आ जाते हैं जहाँ उसे साइरन की ध्वनि सुनाई नहीं देती। ऐसे क्षेत्रों को ‘नीरव-क्षेत्र (silence-zone) कहते हैं।

ऐसे क्षेत्रों में जहाज पर साइरन से सीधे आने वाली ध्वनि व पानी से परावर्तित होकर आने वाली ध्वनि के बीच विनाशी व्यतिकरण होता हैं। जिससे ध्वनि की तीव्रता अत्यन्त कम हो जाती है।

जब हम रेडियो का कार्यक्रम सुनते हैं तो वहाँ भी हमें व्यतिकरण का प्रभाव देखने को मिलता है ।

ब्रॉडकास्टिंग स्टेशन से चलने वाली तरंगें किसी दूर के स्थान पर दो प्रकार से पहुँचती है। ये तरंगें सीधे भी पहुँचती हैं तथा पृथ्वी के ऊपर स्थित आयन मण्डल से परावर्तित होकर भी पहुँचती हैं

इन दोनों तरंगों के बीच व्यतिकरण होता है। यह व्यतिकरण(Interference in hindi) कहीं पर संपोषी होता है तथा कहीं पर विनाशी होता है। जहाँ यह संपोषी है, वहाँ पर ध्वनि तीव्र सुनाई देती है तथा जहाँ यह विनाशी होता है, वहाँ ध्वनि अत्यन्त क्षीण सुनाई देती है।

यही कारण है कि कभी-कभी दूर के रेडियो स्टेशन साफ सुनाई देते हैं लेकिन पास के स्टेशन सुनाई नहीं देते । बड़े-बड़े कमरों व हॉलों में एक ही स्थान पर उत्पन्न ध्वनि दो प्रकार से श्रोता तक पहुँचती है।

एक तो सीधे पहुँचती है तथा दूसरी कमरों की छतों व दीवारों आदि से परावर्तित होकर पहुँचती है। इन दोनों ध्वनियों के बीच संपोषी व विनाशी व्यतिकरण होने के कारण कहीं-कहीं पर ध्वनि तीव्र सुनाई देती है, लेकिन कहीं-कहीं यह बिल्कुल सुनाई नहीं देती।

इस अनावश्यक प्रभाव को रोकने के लिये कमरे की दीवारों व छतों को ऐसे पदार्थों से ढक देते हैं, जो ध्वनि का अवशोषण कर सकें, ताकि यह परावर्तित होकर व्यतिकरण(Interference in hindi) को न उत्पन्न कर सके।

व्यतिकरण के प्रभाव के कारण ही जब किसी स्थान पर दो लाउडस्पीकर साथ-साथ बजते हैं तो किसी विशेष स्थान पर बैठे श्रोता को इनकी ध्वनि नहीं सुनाई देती। यदि एक लाउडस्पीकर बन्द कर दिया जाये, तो उसे ध्वनि सुनाई देने लगती है।

तरंगों के अध्यारोपण का सिद्धांत क्या है( principle of superposition of waves)

अध्यारोपण के सिद्धांत अनुसार- “किसी माध्यम में दो या दो से अधिक तरंगे जब एक साथ चलती है तो माध्यम के प्रत्येक कण का किसी भी क्षण परिणामी विस्थापन दोनों तरंगों द्वारा अलग-अलग उत्पन्न विस्थापितों के सदिश योग के बराबर होता है। “

प्रकाश तरंगों का व्यतिकरण (Interference of light waves)—

प्रकाश तरंगों के व्यतिकरण का सिद्धान्त प्रकाश के ‘तरंग-प्रकृति’ की पुष्टि करता है। थामस यंग (Thomos Young) ने सर्वप्रथम 1802 ई० में प्रकाश के व्यतिकरण को प्रयोगात्मक रूप से दर्शाया ।

जिब समान आवृत्ति व समान आयाम की दो प्रकाश तरंगें जो मूलतः एक ही प्रकाश स्रोत से एक ही दिशा में संचारित होती हैं तो माध्यम के कुछ बिन्दुओं पर प्रकाश की तीव्रता अधिकतम व कुछ बिन्दुओं पर तीव्रता न्यूनतम या शून्य पायी जाती है।

कुछ बिन्दुओं पर प्रकाश अधिकतम होता है व कुछ बिन्दुओं पर अंधेरा होता है। इस घटना को ही प्रकाश तरंगों का व्यतिकरण (Interference in hindi)कहते हैं।

जिन बिन्दुओं पर प्रकाश की तीव्रता अधिकतम होती है, न बिन्दुओं पर हुए व्यतिकरण को ‘संपोषी व्यतिकरण'(Constructive interference) तथा जिन बिन्दुओं पर तीव्रता न्यूनतम होती है, उन बिन्दुओं पर हुये व्यतिकरण को विनाशी (Destructive interference) कहत है दो अलग-अलग प्रकाश स्रोतों से निकली हुई प्रकाश तरंगों में व्यतिकरण की घटना नहीं होती है

प्रकाश तरंगों के व्यतिकरण का उदाहरण-

प्रकाश के व्यतिकरण के दैनिक जीवन में अनेक उदाहरण पाये जाते हैं। जैसे-जल की सतह पर फैली हुई मिट्टी के तेल की परत का सूर्य के प्रकाश में रंगीन दिखायी देना। साबुन के बुलबुलों का रंगीन दिखायी देना आदि ।

जल सतह पर फैली तेल की पर्त पर जब सूर्य का प्रकाश पड़ता है तो इसका कुछ भाग पर्त की ऊपरी सतह से परावर्तित होकर लौटता है तथा कुछ भाग पर्त की निचली सतह से परावर्तित होकर लौटता है।

दोनों परतो से परावर्तित प्रकाश तरंगें कुछ बिन्दुओं पर संपोषी व्यतिकरण तथा कुछ बिन्दुओं पर विनाशी व्यतिकरण उत्पन्न करती हैं। वे रंग जिनकी तरंगें विनाशी व्यतिकरण(Interference in hindi) उत्पन्न करती हैं लुप्त हो जाते हैं तथा शेष बचे रंग ही दिखाई होते हैं।

इसी कारण तेल की पर्ते व साबुन के बुलबुले रंगीन दिखायी देते हैं। जिसका अर्थ है कि व्यतिकरण की घटना में शून्य तीव्रता वाले स्थानों की ऊर्जा नष्ट नहीं होती बल्कि जितनी ऊर्जा विलुप्त होती है उतनी ही ऊर्जा अधिकतम तीव्रता वाले स्थानों पर प्रकट हो जाती है।

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