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तापमान किसे(Temperature in Hindi) कहते हैं, तापमान की परिभाषा क्या है तापमान से जुड़ी संपूर्ण जानकारी (Temperature meaning in Hindi)

Temperature in Hindi-तापमान से हमारा मतलब है किसी वस्तु का ठंडा या गर्म होना। किसी वस्तु को छूने पर ठंडा या गर्म महसूस होना उसके तापमान को इंगित करता है। विज्ञान की भाषा में तापमान की परिभाषा क्या होगी। तापमान को हम कैसे मापते हैं। इन सभी विषयों को विस्तार पूर्वक समझने वाले है।

तापमान किसे कहते हैं-What is temperature)

तापमान की परिभाषा- “किसी पदार्थ की ऊष्मा की मात्रा की माप को तापमान कहते हैं

ताप मापन (Measurement of temperature in hindi)-

ताप मापने के लिये जो उपकरण प्रयोग में लाया जाता है उसे तापमापी(thermometer)
कहते हैं। तापमापी कई प्रकार के होते हैं।

तापमापी में पदार्थ के किसी गुण का उपयोग करते हैं, जो ताप परिवर्तन के अनुपात में बदलता रहता हैं। इसे ‘तापमापक गुण’ (thermometric property) कहते हैं।

पारे के तापमापी में पारे के ऊष्मीय प्रसार के गुण का उपयोग किया जाता है। स्थिर आयतन गैस तापमापी में गैस के स्थिर आयतन पर दाब के गुण का प्रयोग किया जाता है क्योंकि गैस के ताप के साथ परिवर्तित होता रहता है और प्रतिरोध तापमापी में प्लेटिनम के तार के प्रतिरोध जो ताप के साथ बदलता है,के गुण का प्रयोग किया जाता है।

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ताप का मापक्रम बनाने के लिये पदार्थ की दो अवस्थाओं को चुनते हैं । इन अवस्थाओं में एक प्रामाणिक वायुमण्डलीय दाब पर गलते हुये बर्फ की अवस्था है व दूसरी, उबलते हुये जल की अवस्था है। इनमें से गलते हुये बर्फ के ताप को हिमांक (Ice point) कहते है तथा उबलते हुये जल की भाप के ताप को भाप-बिन्दु” (Steam point) कहते हैं।

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हिमांक व भाप-बिन्दु के अन्तर को बराबर-बराबर भागों में विभाजित कर लेते हैं।प्रत्येक भाग 1 डिग्री (degree) कहलाता है।

ताप के पैमाने (Scales of temperature in hindi)

(1) सेल्सियस पैमाना (Celsius Scale)—

इस पैमाने का आविष्कार स्वीडन के वैज्ञानिक सेल्सियस ने किया था, जिसके कारण उन्हीं के नाम पर इसे सेल्सियस पैमाना कहते हैं । इस पैमाने में हिमांक को 0°C व भाप-बिन्दु को 100°C में अंकित किया जाता है तथा इनके बीच की दूरी को 100 बराबर भागों में बाँट दिया जाता है। प्रत्येक भाग को 1°C कहते हैं।

इस पैमाने का उपयोग सामान्यतः वैज्ञानिक प्रयोगों (Temperature in Hindi)में किया जाता है।

(2) फारेनहाइट पैमाना (Fahrenheit Scale)—

इस पैमाने का आविष्कार जर्मन वैज्ञानिक फारेनहाइट ने किया था। इस पैमाने में ताप को अंग्रेजी के बड़े अक्षर ‘F’ से प्रदर्शित करते हैं। इस पैमाने में हिमांक या निचले बिन्दु को 32°F तथा भाप बिन्दु या ऊपरी बिन्दु को 212°F पर अंकित किया जाता है तथा इनके बीच की दूरी को 180 बराबर खानों में बाँट दिया जाता है।

एक खाने का मान 1°F होता है। कुछ समय पहले तक इस पैमाने का उपयोग वैज्ञानिक मौसम का अनुमान लगाने व चिकित्सा के क्षेत्र में करते थे।अब इसके स्थान पर सेल्सियस पैमाने का उपयोग
किया जाता है।

(3) यूमर पैमाना (Reamur Scale)—

इस पैमाने पर अधोबिन्दु या हिमांक को 0° तथा उर्ध्वबिन्दु या भाप बिन्दु को 80° पर अंकित किया जाता है। इन दोनों बिन्दुओं के बीच की दूरी को 80 बराबर भागों में बाँट दिया जाता है।

इस पैमाने पर ताप को R से प्रदर्शित करते हैं।

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(4) केल्विन पैमाना (Kelvin Scale)-

इस पैमाने पर हिमांक या अधोबिन्दु को 273°K तथा भाप बिन्दु को 373°के पर अंकित किया जाता है। इन दोनों बिन्दुओं के बीच की दूरी को समान 100 भागों में विभाजित कर दिया जाता है।

इस पैमाने पर ताप को केल्विन (K) से व्यक्त किया जाता मे मध्यबिन्दु 0°K जल के हिमाँक से 273°K नीचे होता है। केल्विन पैमाने पर 0°K को परम शून्य (absolute zero) कहते है। इसके नीचे कोई ताप संभव नहीं है।

तापमापी किसे कहते हैं

तापमापी (Thermometers)–तापमापी एक ऐसा यन्त्र है,जिससे ताप मापा जाता है। साधारणतया यह तापमापी का सिद्धान्त है कि ताप के बढ़ने पर इनमें डाले गये द्रवों में फैलाव होता है।

मुख्य रूप से अल्कोहल व पारा ही ऐसे द्रव है, जो थर्मामीटर में प्रयोग किये जाते हैं। अल्कोहल का प्रयोग उन तापमापियों(Temperature in Hindi) में किया जाता जो -40°C नीचे ताप मापने के काम आते हैं।

विभिन्न परिसरों का ताप मापने के लिये निम्न तापमापी प्रयोग में लाये जाते हैं।

(1) द्रव-तापमापी-

इस प्रकार के तापमापी का उदाहरण पारे का तापमापी हैं। इसमें पारा काँच में रखा जाता है। पारे का तापमापी 357°C तक के ताप का मापन कर सकता है, क्योंकि 357°C पर पारा उबलने लगता है।

(2) गैस तापमापी-

इस प्रकार के तापमापियों में स्थिर आयतन हाइड्रोजन तापमापी से 500°C तक के ताप को मापा जा सकता है। 500°C के ऊपर हाइड्रोजन की जगह नाइट्रोजन गैस लेने पर 1500°C के ताप का मापन किया जा सकता है।

(3) प्लेटिनम प्रतिरोध तापमापी—

“ताप बढ़ाने से धातु के तार के विद्युत प्रतिरोध में परिवर्तन होता है” इसी सिद्धान्त पर प्लेटिनम प्रतिरोध तापमापी कार्य करता है। इसका प्रयोग गैस तापमापी की तुलना में सरल है तथा इसके ताप मापन का परिसर -200°C से 1200°C तक होता है।

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(4) ताप-युग्म तापमापी (Thermo-couple Thermo-meter)—

जब दो भिन्न-भिन्न धातुओं के तारों के सिरों को जोड़कर एक बन्द परिपथ बनाते हैं तथा इस परिपथ की सन्धियों (Junctions) को अलग-अलग तापों पर रखते हैं तो परिपथ में धारा बहने लगती है। इसे ताप विद्युत धारा (Thermo electric current) कहते हैं तथा इस प्रभाव को सीबेक का प्रभाव कहते हैं।

ताप युग्म तापमापी सीबेक के प्रभाव पर ही आधारित हैं। भिन्न-भिन्न धातुओं के तारों को लेकर हम इस प्रकार के तापमापी से –200°C से लेकर 1600°C तक के ताप(Temperature in Hindi) का मापन कर सकते हैं।

(5) पूर्ण विकिरण उत्तापमापी, (Total radiation Pyrometer)—

इस तापमापी की सहायता से अत्यधिक ऊँचे तापों की माप की जाती है। यह तापमापी स्टीफैन के नियम(Stefan’s law) पर आधारित है।

जिसके अनुसार उच्च ताप पर किसी वस्तु से उत्सर्जित विकिरण की मात्रा इसके परमताप के चतुर्थ घात के अनुक्रमानुपाती होती है।

किसी निश्चित समय में वस्तु द्वारा उत्सर्जित विकिरण ऊर्जा को माप कर वस्तु के ताप की गणना कर ली जाती है। इस ताप मापी में तापमापी को वस्तु के सम्पर्क में नहीं रखना पड़ता अतः दूर की वस्तुओं जैसे सूर्य आदि का ताप इसी प्रकार के ताप मापी(Temperature in Hindi) के द्वारा मापा जाता है।

इस तापमापी से करीब 800°C से नीचे का ताप नहीं मापते क्योंकि इससे कम ताप पर वस्तुयें ऊष्मीय विकिरण का उत्सर्जन नहीं करती।

यह article “तापमान किसे(Temperature in Hindi) कहते हैं, तापमान की परिभाषा क्या है तापमान से जुड़ी संपूर्ण जानकारी (Temperature meaning in Hindi)” पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया उम्मीद करता हुँ। कि इस article से आपको बहुत कुछ नया जानने को मिला होगा।

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