महान गणितज्ञ पाइथागोरस की अद्भुत जीवनी -Pythagoras biography in hindi

महान गणितज्ञ पाइथागोरस की अद्भुत जीवनी -Pythagoras biography in hindi
  • जन्म -500 ई. पहले
  • जन्म स्थान -सामोस, यूनान
  • निधन -मेटापोटम, इटली

आज के सम्पूर्ण विश्व मे कही भी गणित या गणितीय सिद्धांतो की बात चलती है.
तब Pythagoras का नाम अनजाने मे ही सबसे पहले जुबान पर आ जाता है.

यह जिस समय पैदा हुए. उस समय गणित अपनी प्रारंभिक अवस्था मे था. लेकिन अपनी अद्भुत प्रतिभा के कारण इन्होने एक ऐसे सिद्धांत का प्रतिपादन किया. जो आगे चलकर रेखा गणित का आधार बना.

जिसे आज हम pythagoras theorem के नाम से जानते है. इस theorem के अनुसार “किसी समकोण त्रिभुज मे दो भुजाऔ के वर्गो का योग तीसरी भुजा (कर्ण ) के वर्ग के बराबर होता है. ” pythagoras biography in hindi

पाइथागोरस का प्रारंभिक जीवन और जन्म (Birth and Early Life of Pythagoras)

विश्व के इस महान Mathematician और philosopher का जन्म 500 ईसा पूर्व हुआ था. उस समय लिखने के साधन का विकास भी नहीं हुआ था. कागज तो बहुत दूर की बात है.

उस समय भोजपत्र पर भी लिखना प्रचलन मे नहीं था. उनके सम्बन्ध मे जो भी जानकारी आज हमें उपलब्ध है. वह बाद के लेखकों द्वारा लिखी गयी है.

कुछ लेखक तो उन्हें वैज्ञानिक की श्रेणी मे रखने के लिए भी तैयार नहीं थे.
ईसा पूर्व यूनान बहुत धनी और सभ्य देश था. समोस टापू यूनानीयों का एक महत्वपूर्ण बाजार था. Pythagoras का जन्म एक धनी परिवार मे हुआ था. अतः इसमें कोई संदेह नहीं की उन्हें बहुत अच्छी शिक्षा दी गयी थी.

बचपन से ही pythagoras बहुत प्रतिभासाली थे. कहा जाता है. की 16 वर्ष की उम्र मे ही इनकी प्रतिभा इतनी विकसित हो गयी थी. की अध्यापक इनके सवाल के जवाब नहीं दे पाते थे.

कुछ समय बाद उन्हें थेल्स की देख रेख मे भेजा गया. उन्ही के साथ उन्होने अपने विश्व विख्यात “pythagoras theorem ” का सूत्रपात किया. और इसका प्रदर्शन भी किया.

यह भी कहा जाता है की pythagoras ही वह पहले वयक्ति थे . जिन्होंने सिद्ध करके दिखाया की किसी त्रिभुज के तीन angle का योग दो समकोण के बराबर होता है.

पाइथागोरस का संगीत से प्रेम (pythagoras biography in hindi)

उन दिनों अध्ययन के लिए पुस्तके उपलब्ध नहीं थी. इसलिए students को एक स्थान से दूसरे स्थान जाकर टीचर से संपर्क करना पडता था.

कहा जाता है की ज्ञान की तलाश मे pythagoras ने , 30 वर्षो तक फारस, बेबीलोन, अरब और यहां तक की भारत तक का भ्रमन किया.

उस समय गौतम बुद्ध अपने नये धर्म की स्थापना कर रहे थे. Pythagoras ने कई वर्ष मिश्र मे गुज़ारे. जहाँ उन्होंने संगीत और गणित के बिच मे सम्बन्ध जोड़ने का प्रयास किया.

कई लिखो मे ऐसे प्रमाण मिलते है जहाँ उन्होंने गणित के स्वरों पर भी काम किया. 50 वर्ष की अवस्था तक इन्होने बहुत कुछ सिख लिया था.
अब वह ऐसे स्कूल की स्थापना करना चाहते थे. जहाँ वह लोगो को कुछ पढ़ा सके.

Pythagoras का स्कूल की स्थापना करना

ईसा से 532 वर्ष पूर्व उन्होंने उन्होंने समोस के अत्याचारी शासन से छुटकारा पाने के लिए इटली भागना पड़ा. वहा उन्होंने ईसा पूर्व 529 मे crotonay मे एक स्कूल की स्थापना की.

जल्द ही इस स्कूल मे लगभग 300 छात्रों ने दाखिला लिया. यह स्कूल वास्तव मे एक धार्मिक संस्थान था. इस स्कूल मे मुख्य रूप से चार विषय ही पढ़ाया जाता था.

अंकगणित, , संगीत, ज्योतिष विज्ञान और ज्यामिति. Pythagoras का विचार था की मनुष्य को पवित्र जीवन बिताना चाहिए. उनका विचार था. की पवित्र जीवन द्वारा ही आत्मा को शरीर के संबधो से मुक्त किया जा सकता है.

Pythagoras मे अंको के सिद्धांत पर काम किया. इसके अतरिक्त उन्होंने गणित और संगीत के बिच सम्बन्ध भी स्थापित किया.

Pythagoras की मृत्यु

दुर्भाग्यवश pythagoras विचारों के अनुनाई होने के कारण राजनीति मे कूद पड़े. उन्हें जहाँ भी मौका मिलता था. वह अपना अधिकार जमाने की कोशिस करते. इससे उनका पतन हो गया और लोग उनके विरोधी हो गए.

जिसके कारण पाइथागोरस (pythagoras biography in hindi )को देश से निकला दे दिया गया. 80 वर्ष की आयु मे उनकी मृत्यु हो गयी.

उनकी मृत्यु के 200 वर्ष बाद pythagoras का रोम की सेनेट मे विशाल मूर्ति बनवाई गयी. और इस महान Mathematician को यूनान के महानतम व्यक्ति का सम्मान दिया गया.