कार्बनिक यौगिकों का शोधन कैसे किया जाता है(Purification of Organic Compounds in hindi)

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कार्बनिक यौगिकों के शोधन के लिए अनेकों विधियाँ प्रयोग में लाई जाती हैं। ये विधियाँ कार्बनिक यौगिक की प्रकृति तथा उसमें उपस्थित अशुद्धियों के प्रकार पर निर्भर करती हैं

साधारण क्रिस्टलन (Ordinary Crystallization)

यह ठोस कार्बनिक यौगिकों के शोधन की सबसे सामान्य विधि है। यह इस तथ्य पर आधारित है कि कुछ कार्बनिक यौगिक कमरे के ताप पर विलायकों में आंशिक विलेय होते हैं और विलेयता ताप में वृद्धि के साथ बढ़ती है।

प्रभाजक क्रिस्टलन (Fractional Crystallization)

यह विधि उन ठोस कार्बनिक यौगिकों के शोधन में प्रयुक्त होती है जिनमें ऐसी अशुद्धियाँ होती हैं, जो समान विलायक में कार्बनिक यौगिकों से विलेयता में भिन्न होती हैं। कम विलेय पदार्थ पहले क्रिस्टलित हो जाते हैं।

ऊर्ध्वपातन (Sublimation)

ऊर्ध्वपातन एक ऐसा प्रक्रम है जिसमें यौगिक बिना द्रव अवस्था में आए ठोस अवस्था से सीधे वाष्प अवस्था में बदल जाते हैं और वाष्प ठण्डी होने पर सीधे ठोस अवस्था में बदल जाती है। यह विधि उन पदार्थों के शोधन के लिए प्रयुक्त होती है जो गर्म करने पर अवाष्पशील अशुद्धियों से ऊर्ध्वपातित हो जाते हैं।

उदाहरण कपूर, नेफ्थालीन, एन्थ्रासीन एन्थ्राक्विनोन, बेन्जोइक अम्ल, थैलिक एनहाइड्राइड, आदि ऊर्ध्वपातन की क्रिया प्रदर्शित करते हैं।

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साधारण आसवन (Ordinary Distillation)

यह विधि इस सिद्धान्त पर आधारित है कि नियत दाब पर प्रत्येक शुद्ध द्रव एक निश्चित ताप पर उबलता है, जो इसका क्वथनांक कहलाता है। जो द्रव बिना अपघटित हुए अवाष्पशील अशुद्धि देकर उबलते हैं, उनके शोधन के लिए यह विधि प्रयुक्त होती है।

पृथक्करण कीप द्वारा दो द्रवों का पृथक्करण(Separation of Two Liquids Using Separation Funnel)

यह दो अमिश्रणीय द्रवों के लिए प्रयुक्त होता है। इस विधि में कार्बनिक द्रवों के मिश्रण को एक पृथक्करण कीप में लेकर कुछ समय तक स्थिर रखते है। भारी द्रव नीचे बैठ जाते है जबकि हल्के द्रव ऊपर तैरते रहते है। इन्हें सावधानीपूर्वक पृथक कर लेते है।

प्रभाजक आसवन (Fractional Distillation)

यह विधि निकट क्वथनांक वाले दो या अधिक वाष्पशील द्रवों के मिश्रण (जैसे-ऐसीटोन, क्वथनांक = 60°C तथा मेथेनॉल, क्वथनांक = 65°C) को पृथक करने में प्रयुक्त होती है।

समानीत दाब पर आसवन अथवा निर्वात् आसवन(Vacuum Distillation)

साधारण आसवन केवल उन द्रवों के लिए उचित है जो वायुमण्डलीय पर बिना अपघटित हुए उबल जाते हैं, परन्तु कुछ कार्बनिक यौगिक क्वथनांक तक गर्म करने पर अपघटित हो जाते हैं।

इसलिए ऐसे यौगिकों को साधारण आसवन द्वारा शुद्ध नहीं किया जा सकता है। ऐसी स्थितियों में आसवन निम्न ताप पर करना चाहिए जिस पर यौगिक अपघटित नहीं होता है। यौगिक को समानीत दाब पर गर्म करके क्वथनांक की अपेक्षा निम्न ताप पर उबलने योग्य बनाया जा सकता है। समानीत दाब पर एक बड़ी मात्रा में ईंधन की बचत होती है,

अत: उद्योग में इसकी अत्यधिक महत्ता होती है।उदाहरण शर्करा फैक्ट्रियों में कच्चे रस के सान्द्रण के लिए यह विधि उपयोग की जाती है।

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भाप आसवन (Steam Distillation)

यह विधि उन पदार्थों के शोधन के लिए प्रयुक्त की जाती है जो

(i) जल में विलेय होते हैं।
(ii) भाप में वाष्पशील होते हैं।
(iii) भाप में अवाष्पशील अशुद्धियों से जुड़े होते हैं।
(iv) इनका अणुभार अधिक होता है।
(v) लगभग जल के क्वथनांक पर उच्च दाब वाले होते हैं। उदाहरण तारपीन के तेलों, जो पौधों से प्राप्त किये जाते हैं, के शोधन के लिए यह विधि प्रयुक्त होती है। इस विधि में, भाप द्रव को आसवित करने के लिए क्वथनांक को कम कर देती है। इसलिए यह विधि समानीत दाब पर आसवन के समरूप होती है।

उदाहरण एनिलीन भाप की उपस्थिति में 98.7°C पर उबलती है(क्वथनांक = 181 °C) अत: एनिलीन को भाप आसवन की सहायता से शुद्ध किया जाता है।

वर्णलेखन (Chromatography)

यह विधि दो प्रावस्थाओं, एक स्थिर तथा दूसरी गतिशील (चालित) के बीच मिश्रण के वितरण पर निर्भर करती है। स्थिर प्रावस्था एक अधिशोषक स्तम्भ (एक ठोस रासायनिक यौगिक) या एक कागज की पट्टी हो सकती है। चालक प्रावस्था द्रव या गैस हो सकती है।

पृथक किए जाने वाले मिश्रण को चालक प्रावस्था में घोला जाता है तथा स्थिर प्रावस्था के ऊपर से गुजारा जाता है। सामान्यत: यह विधि जटिल कार्बनिक पदार्थों जैसे ऐमीनों अम्ल, शर्कराओं, विटामिन, हारमोन्स तथा पादप लवको के पृथक्करण के लिए प्रयुक्त होती है।

वर्णलेखन के निम्न प्रकार होते हैं

(i) अधिशोषित वर्णलेखन (Adsorption Chromatography)

इस विधि में स्थिर प्रावस्था एक ठोस होती है उदाहरण ऐलुमिना, Mgo, सिलिका जैल आदि) तथा चालक प्रावस्था एक द्रव होती है। विभिन्न अवयव, अधिशोषक के विभिन्न भागों में अधिशोषित किए जाते हैं।

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अवयव, जिसकी अधिशोषक के लिए अधिशोषण बन्धुता अधिकतम होती है, लगभग आरम्भिक बिन्दु पर अधिशोषित कर लिया जाता है। इसी प्रकार,न्यूनतम अधिशोषण बन्धुता का अधिशोषण, अधिशोषक से दूरस्थ बिन्दु पर होता है।

इस प्रकार, स्तम्भ के विभिन्न भागों पर विभिन्न पट्टियाँ, क्षेत्र अथवा वर्णलेख बनते हैं। फिर अधिशोषित अवयव उचित विलायक की सहायता से निष्कर्षित कर लिए जाते हैं।

पतली पर्त वर्णलेखन(Thin layer chromatography)

इसका विशेष उदाहरण है, जिसमें काँच की पट्टी पर अधिशोषक की पतली पर्त चढ़ायी जाती है।

(ii) विभाजन वर्णलेखन(Partition Chromatography)

इसमें स्थिर प्रावस्था ठोस अथवा द्रव हो सकती है, जबकि चालक प्रावस्था द्रव होती है।उदाहरण कागज वर्णलेखन (paper chromatography)| इसमें अधिशोषण स्तम्भ एक कागज की पट्टी (ठोस) होती है।

(iii) गैस वर्णलेखन (Gas Chromatography)

इसमें स्थिर प्रावस्था ठोस या द्रव हो सकती है, जबकि चालक प्रावस्था, गैसों का मिश्रण होती है।

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