pH full form क्या होता है, pH कैसे निकाला जाता है( About pH full form)

pH full form क्या होता है, pH कैसे निकाला जाता है( About pH full form)

हेलो दोस्तों आज इस आर्टिकल में हम जानेंगे pH का full form क्या होता है, full form of pH क्या होता है। pH किसे कहते है। pH का मतलब क्या होता है। अगर आपको pH के बारे जानकारी नहीं है। तो आप बिल्कुल सही जगह आये है। आर्टिकल के अंत तक आपको pH full form और उससे जुडी बेसिक जानकारी मिल जाएगी।

pH का फुल फॉर्म – Potential of hydrogen या power of hydrogen

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pH full form क्या है

दोस्तों पर हमने आपको बताया pH का फुल फॉर्म potential of hydrogen या power of hydrogen है। अब हम जानेंगे। ph क्या होता है।

pH का मान एक संख्या होता है। जो पदार्थों की अम्लीयता और क्षारीयता को प्रदर्शित करता है। इसका मान हाइड्रोजन आयन के सांद्रण के व्युत्क्रम के logarithm के बराबर होता है।

{\displaystyle {\ce {pH}}=-\log _{10}(a_{{\ce {H+}}})=\log _{10}\left({\frac {1}{a_{{\ce {H+}}}}}\right)}

pH का उपयोग

pH का उपयोग किसी भी पदार्थ के अम्लीय या क्षारीय होने के लिए पता लगाया जाता है। pH ज्ञात होने पर हम यह बता सकते हैं पदार्थ अम्लीय है या फिर क्षारीय।

pH का मान 0 से 14 के बीच होता है। जिन बिलियन का pH मान 7 से कम होता है। वह अम्लीय होते है। तथा जिन का मान 7 से अधिक होता है। वे क्षारीय होते है। जबकी उदासीन विलयन का pH मान 7 होता है।

कुछ पदार्थों के pH मान

पदार्थpH मान
शुद्ध जल7
सिरका2.5-3.4
शराब2.8-3.8
दूध6.4-6.6
समुद्री जल8.4
मनुष्य का लार6.5-7.5
मनुष्य का मूत्र4.8-8.4
मनुष्य का रक्त7.4
नींबू2.2-2.4

pH का उपयोग और महत्व

पाचन तंत्र में pH का महत्त्व

हमारे पेट में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बनते रहता है जो हमारे भोजन को पचाने में सहायक होता है। इसका pH 1.0 के लगभग कायम रहता है। इससे पेट को कोई नुकसान नहीं होता है, किंतु अपच (indigestion) के कारण जब पेट में अम्ल की मात्रा एक निश्चित सीमा से ऊपर हो जाती है तब पेट में गैस और जलन होने लगती है। अतः, बढ़े हुए अम्ल के प्रभाव को नष्ट करने के लिए हलके भस्म (mild base) का इस्तेमाल करना पड़ता है जिसे ऐंटासिड (antacid) कहते हैं।

मिल्क ऑफ मैग्नीशिया (मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड) और सोडियम हाइड्रोजनकाबेनिट जैसे हलके भस्म प्रायः इस्तेमाल किए जाते हैं।

pH परिवर्तन का दाँतों पर प्रभाव

जब हम शर्करायुक्त(sugary) भोजन करते हैं तब यह मुँह में मौजूद बैक्टीरिया द्वारा अपघटित होकर अम्ल बनाता है। जब मुँह का pH 5.5 से कम हो जाता है तब दाँत के दंतवल्क (enamel) क्षतिग्रस्त होने लगते हैं। हमारे मुँह का लार (saliva) हल्का क्षारीय होने के कारण कुछ अंश
तक अम्ल को उदासीन बना देता है, किंतु शेष अम्ल अप्रभावित रह जाता है।

अतः, शेष अम्ल को नष्ट करने के लिए टूथपेस्ट का इस्तेमाल करना पड़ता है जो क्षारीय होता है। नीम के दातून के रस में क्षार रहता है, अतः नीम के दातून से दाँत साफ करने से भी दाँत की रक्षा होती है।

थकान के समय शरीर के माँसपेशियों में अम्ल की उत्पत्ति

शारीरिक परिश्रम करने से लैक्टिक अम्ल बनता है जो हमारे शरीर की मांसपेशियों में दर्द और कड़ापन ला देता है। इस अवस्था में मांसपेशियों में ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है जिससे ऊर्जा का उत्सर्जन कठिन हो जाता है। फलतः वातनिरपेक्ष उपापचय (anaerobic metabolism) क्रिया का वेग बढ़ जाने से माँसपेशियों में लैक्टिक अम्ल एकत्र हो जाता है।

अम्ल के प्रयोग से बरतनों के धनों को दूर करना

कॉपर के बरतनों पर भास्मिक कॉपर ऑक्साइड की परत जम जाने के कारण उनकी चमक बदरंग हो जाती है। चूँकि नींबू के रस में सिट्रिक अम्ल रहता है, अतः बरतन की सतह को नींबू के एक टुकड़े से रगड़कर साफ कर देने से बरतन की चमक वापस लौट आती है। नींबू में उपस्थित सिट्रिक अम्ल भास्मिक कॉपर ऑक्साइड से अभिक्रिया करके कॉपर सिट्रेट बनाता है जो जल के साथ बाहर निकल जाता है।

मिट्टी का pH

मिट्टी का pH 7 के आसपास रहने पर ही अधिकांश पौधों की वृद्धि संतोषजनक ढंग से होती है। मिट्टी के अत्यधिक अम्लीय या क्षारीय होने पर पौधों की वृद्धि बाधित हो.जाती है। मिट्टी के अत्यधिक अम्लीय रहने पर उसमें कली चूना, भखरा चूना या कैल्सियम कार्बोनेट डालकर उसका pH नियंत्रित किया जाता है। इन रासायनिक पदार्थों के भास्मिक (क्षारीय) होने के कारण ये मिट्टी की अतिरिक्त अम्लीयता को कम कर देते हैं।

PH और जलीय जीव

जल का pH एक निश्चित सीमा के अंदर रहने पर ही उसमें वास करनेवाली मछलियाँ तथा अन्य जीव सुरक्षित रहते हैं। अम्ल-वर्षा या अन्य कारणों से जब नदियों/ तालाबों का pH बहुत कम हो जाता है, तो जलीय जीवों का अस्तित्व संकट में पड़ जाता है।

प्रकृति द्वारा उदासीनीकरण की व्यवस्था-

नेटल कई स्थानिक नामों से जाने जाते हैं, यथा बिच्छुत्ती, उरकुस्सी आदि। नेटल (nettle) एक झाड़ी में उगनेवाला पौधा होता है। इसके पत्तों में डंसनेवाले रोएँ होते हैं जिसके अचानक छू जाने से चमड़े में खुजली होती है। यह खुजली रोएँ द्वारा मेथेनोइक अम्ल (फॉर्मिक अम्ल) के स्राव से होती है। इस खुजली के उपचार हेतु डॉक पौधों (dock plant) के पत्तों को खुजली वाले स्थान पर रगड़ा जाता है।

डॉक पौधे नेटल पौधों के नजदीक ही उगते हैं। डॉक पौधों के पत्ते रगड़ने से खुजली दूर हो जाती है, क्योंकि इसके रस में क्षार की उपस्थिति रहती है।

अम्ल (Acid)

अम्ल वे पदार्थ हैं जिनमें हाइड्रोजन पाया जाता है एवं जलीय विलयन में वे हाइड्रोजन आयन उत्पन्न करते हैं। अम्ल साधारणतयः खट्टे फलों जैसे नीबू, इमली आदि में पाये जाते हैं। नीबू में साइट्रिक अम्ल व इमली में टारटैरिक अम्ल पाये जाते हैं। हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, सल्फयूरिक अम्ल, नाइट्रिक अम्ल, आक्जेलिक अम्ल,ऐसीटिक अम्ल, फार्मिक अम्ल आदि कुछ मुख्य अम्ल हैं।

क्षार (Base)

क्षार वे पदार्थ हैं जिनमें हाइड्राक्सिल समूह पाया जाता है तथा जिनके जलीय विलयन में हाइड्राक्सिल आयन उपस्थित रहते हैं। क्षार लाल लिटमस पेपर को नीला कर (OH-) देते हैं। कास्टिक सोडा (सोडियम हाइड्राक्साइड) व कास्टिक पोटाश (पोटेशियम हाइड्राक्साइड) प्रमुख क्षार हैं ।

कास्टिक सोडा का प्रयोग पेट्रोलियम के शुद्धीकरण व कागज बनाने में किया जाता है। कास्टिक पोटाश विभिन्न साबुन बनाने में व कार्बनडाइआक्साइड गैसे को शोषित करने में काम आता है।

लवण (Salt)

अम्लों व क्षारों की परस्पर क्रिया से लवण बनते हैं। साधारण नमक, जिसे सोडियम क्लोराइड कहते हैं, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल व सोडियम हाइड्राक्साइड की परस्पर अभिक्रिया से बनता है।

ग्लिसरीन (Glycerine) क्या है

ग्लिसरीन रंगहीन, गाढ़ा व स्वाद में मीठा द्रव है । यह जल में विलेय होता है । यह नाइट्रो सेलुलोस से क्रिया करके अत्यन्त विस्फोटक पदार्थ जिलेट्न बनाता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से विस्फोटक पदार्थ डाइनामाइट बनाने में किया जाता है । इसके अतिरिक्त यह पालिश,स्याही,कल-पुर्जा को चिकना करने, पारदर्शक साबुन बनाने व फलों के संरक्षण के काम भी आता है।

लाल-लेड (Red-lead)

लाल-लेड का रासायनिक नाम ट्राइप्लम्बिक टेट्राक्साइड है। यह लाल रंग का जल में अविलेय चूर्ण होता है। इसका प्रयोग लाल पेन्ट बनाने, सीमेंट बनाने व माचिस उद्योगों में किया जाता है।

ग्लूकोज (Glucose)

इसे अंगूर का शक्कर भी कहते हैं। यह अंगूरों,मीठे फलों व मूत्र में पाया जाता है । मधुमेह के रोगियों के मूत्र में इसकी मात्रा अधिक पायी जाती है। यह एल्कोहल में विलेय व स्वाद में मीठा होता है । यह चाँदी के लवण, अमोनियम सिल्वर नाइट्रेट के साथ मिलकर चाँदी की तरह सफेद पर्त बनाता है, जिसे चाँदी का दर्पण (silver-mirror) कहते हैं। इसका प्रयोग शराब बनाने में, फलों को सुरक्षित रखने में, औषधि के रूप में तथा शक्तिवर्धक आदि के रूप में किया जाता है।

फीनाल

फीनाल एक विषैला, रंगहीन, तीक्ष्ण गंध वाला पदार्थ है। यह ब्रोमीन के साथ मिलाने पर सफेद रंग का अवक्षेप देता है। इसका मुख्य प्रयोग जीवाणुनाशक के रूप में किया जाता है । विस्फोटक पिकरिक अम्ल, विभिन्न रंग, ऐस्प्रिन, सेलौल आदि दवायें बनाने में व संश्लेषित रेजिन बनाने में भी इसका प्रयोग किया जाता है।

एनिलीन (Aniline)

यह तेल के समान द्रव है, जो कि अत्यन्त विषैला होता है। एल्कोहल, ईथर आदि में यह विलेय परन्तु जल में अविलेय होता है। इसका उपयोग रबर बनाने में व विभिन्न प्रकार की औषधियों व रंगों आदि के बनाने में किया जाता है।

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