विल्हेल्म कॉनराड रोंटजन की सम्पूर्ण जीवनी-Wilhelm Röntgen biography in hindi

विल्हेल्म कॉनराड रोंटजन की सम्पूर्ण जीवनी-Wilhelm Röntgen biography in hindi
  • जन्म-27 मार्च, 1845
  • जन्म स्थान-लेनेप, जर्मनी
  • निधन-10 फरवरी, 1923
  • निधन स्थान-म्यूनिख, जर्मनी

इस महान वैज्ञानिक ने एक्स किरणों का आविष्कार किया, जिसके लिए 1901 में इन्हें भौतिकी का प्रथम नोबेल पुरस्कार दिया गया। उस समय इन किरणों के विषय में किसी को जानकारी नहीं थी। इसलिए इन किरणों का नाम एक्स किरणें रखा गया। इन किरणों को रोंटजेन किरण(Röntgen ray’s) भी कहा जाता है।

विल्हेल्म रोंटजन का जन्म-Wilhelm Röntgen biography in hindi

विल्हेल्म रोंटजन का जन्म जर्मनी के लेनेप नामक स्थान पर 27 मार्च, 1845 में हुआ था। इनके पिता एक कृषक थे और मां डच महिला थीं। इनकी आरम्भिक शिक्षा(wilhelm röntgen education)हॉलैण्ड में हुई तथा उच्च शिक्षा स्विटजरलैण्ड के ज्यूरिख विश्वविद्यालय में हुई।

यहीं से उन्होंने 24 वर्ष की आयु में पी.एच.डी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने कई विश्वविद्यालयों में अध्यापन कार्य किया। सन 1885 में वे बुर्जबर्ग विश्वविद्यालय में भौतिकी के प्रोफेसर पद पर नियुक्त किए गए। यहीं उन्होंने 1895 में एक्स किरणों का आविष्कार किया।

एक्स किरणों का अविष्कार X-ray’s invention in hindi

एक्स किरणों( X-ray’s discovery)के उपयोगों ने आज सारे संसार में तहलका मचा रखा है। इन किरणों के आविष्कार की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। प्रोफेसर रोटजन अपनी प्रयोगशाला में एक विद्युत विसर्जन नलिका अर्थात कैथोड रे ट्यूब पर कुछ प्रयोग कर रहे थे।

उन्होंने पर्दे गिराकर प्रयोगशाला में अंधेरा कर रखा था और इस नलिका को काले गत्ते से ढक रखा था। रोटजन(about Wilhelm Röntgen)ने देखा कि नलिका के पास में ही रखे कुछ बैरियम प्लेटीनो साइनाइड के टुकड़ों से एक प्रकार की प्रकाशीय चमक निकल रही है।

तब उन्होंने चारो ओर देखा तो पाया कि उनकी मेज से कुछ फुट की दूरी पर एक प्रतिदीप्तिशील पर्दा भी चमक रहा है। यह देखकर उनकी हैरानी का ठिकाना न रहा क्योंकि नली तो काले गत्ते से ढकी हुई है और कैथोड किरणों का बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है।

उन्हें यह विश्वास हो गया कि निश्चय ही नलिका से कुछ अज्ञात किरणें निकल रही हैं, जो मोटे कागज से भी पार हो सकती हैं। चूंकि उस समय इन किरणों के विषय में कुछ ज्ञान न था इसलिए उन्होंने इनका नाम एक्स किरणें रख दिया। एक्स शब्द का अर्थ है अज्ञात।

अपने प्रयोगों के दौरान उन्हें इन किरणों के कुछ विशेष गुण पता लगे। उन्होंने देखा कि ये किरणें कागज,रबर तथा धातुओं की पतली चादर के आर-पार निकल जाती हैं।

तब उन्हें एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण किंतु सरल विचार सूझा। उन्होंने सोचा कि जैसे साधारण प्रकाश से फोटो फिल्म प्रभावित हो जाती है, हो सकता है इन रहस्यमयी किरणों का भी फोटो फिल्म पर कुछ प्रभाव पड़े।

इस विचार को प्रयोगात्मक रूप से परखने के लिए उन्होंने एक फोटो प्लेट ली और उस पर अपनी पत्नी का हाथ रखकर एक्स किरणें डाली। जब फोटो फिल्म को डेवलप किया तो इन दोनों ने देखा कि प्लेट पर हाथ की हड्डियां स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं और उनके चारों ओर मांस धुंधला-सा दिखाई दे रहा है।

प्रोफेसर रोटजन(Wilhelm Röntgen discoveries)की पत्नी ने अंगूठी पहन रखी थी। एक्स किरणों से लिए गए चित्र में यह अंगूठी भी स्पष्ट दिखाई दे रही थी। यह पहला अवसर था जब किसी जीवित व्यक्ति के ढांचे का चित्र लिया गया था।

निश्चय ही वह महिला(wilhelm roentgen wife) इस चित्र को देखकर कांप गई होगी। उस समय तक इन किरणों के विषय में मनुष्य को कोई जानकारी नहीं थी। इसलिए इनका नाम एक्स अर्थात अज्ञात किरणें रखा गया। रोंटजन(Wilhelm Röntgen experiment)के काम पर इन किरणों

को रोटजेन रेज (Rontgen Raze) भी कहते हैं। इस महत्त्वपूर्ण आविष्कार के लिए सन् 1901 में भौतिकी का प्रथम नोबेल पुरस्कार प्रोफेसर रोटजन को दिया गया था।

एक्स किरणों के आविष्कारक प्रोफेसर रोंटजन(Wilhelm Röntgen inventor)और उनके दो साथियों, जिन्होंने इन किरणों के विकास में अत्यंत महत्त्वपूर्ण योगदान दिया था, की इनके घातक प्रभाव से बड़ी ही दयनीय मृत्यु हुई ।

यद्यपि यह किरणें जीवनदायी हैं लेकिन शरीर पर इनके बड़े घातक प्रभाव होते हैं। एक्स किरणों का उपयोग केवल शरीर की हड्डियों को ही चित्रित करने में नहीं किया जाता बल्कि इनके द्वारा कैंसर जैसे भयानक रोग का इलाज भी किया जाता है।

इन किरणों से रिंगवार्म जैसे त्वचारोगों का भी इलाज किया जाता है। इनके द्वारा शरीर में घुसी गोली, गुर्दो की पथरी तथा फेफड़ों के विकारों का भी पता लगाया जाता है। इन किरणों के द्वारा अपराधियों द्वारा शरीर के हिस्से में छिपाई गई हीरे-मोती या सोने जैसी मूल्यवान वस्तुओं का पता लगाया जाता है।

अनुसंधान प्रयोगशालाओं में एक्स किरणों की सहायता से मणिमों की संरचना का पता लगाया जाता है। कुछ ही वर्ष पूर्व इन किरणों को प्रयोग में लाकर कैट-स्कैनर नामक मशीन विकसित की गई है, जिससे शरीर की आंतरिक बीमारियों का पता पल भर में लग जाता है।

विल्हेल्म रोंटजन की मृत्यु-Wilhelm Röntgen death

रोटजन(Wilhelm Röntgen) द्वारा खोजी गई ये किरणें हमारे लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध हुई हैं। प्रोफेसर रोंटजन(Wilhelm Röntgen biography) ने एक्स-किरणों के अतिरिक्त और भी कई अनुसंधान किए। वे एक महान भौतिक शास्त्री थे। उन्होंने घूर्णन करते कुछ विशिष्ट पदार्थों पर चुम्बकीय प्रभावों से सम्बंधित प्रयोग किए।

मणिभों के साथ उन्होंने कुछ विद्युत सम्बंधी प्रयोग भी किए। अंत में वे बुर्जबर्ग से म्यूनिख आ गए और 77 साल की उम्र में इसी शहर में उनका देहांत हो गया।

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