रॉकेट कैसे उड़ता है, रॉकेट के बारे मे बेसिक जानकारी-What is rocket in hindi

रॉकेट कैसे उड़ता है, रॉकेट के बारे मे बेसिक जानकारी-What is rocket in hindi

Rocket in hindi-पृथ्वी के वायुमंडल से परे का क्षेत्र अंतरिक्ष या आकाश कहलाता है। अंतरिक्ष अन्वेषण, अर्थात् अंतरिक्ष में आकाशीय पिण्डों की खोज के लिए रॉकेटों और अंतरिक्ष शटलों का उपयोग यान के रूप में होता है।

रॉकेट के पिछले भाग में एक तुंड से होकर गैस अति उच्च वेग से बाहर निकलती है। गैस द्वारा वहन किए गए संवेग के बराबर और विपरीत संवेग रॉकेट प्राप्त करता है जो उसे आगे की ओर धक्का देने के लिए आवश्यक बल प्रदान करता है।

इस प्रकार अंतरिक्ष में रॉकेट चलता है। नाभिकीय रॉकेटों (space rocket)का उपयोग मानवरहित अंतरिक्ष उड़ान में होता है जिसमें प्रणोद नाभिकीय रिऐक्टर से प्राप्त होता है। अधिकांश रॉकेट बहुक्रम रॉकेट होते हैं, जिसमें पहला क्रम बूस्टर होता है जिसे ऊपरी वायुमंडल के कम सघन क्षेत्र में रॉकेट से अलग कर दिया जाता है।

रॉकेट ईंधन (Rocket Fuels)

रॉकेट(Rocket in hindi)आमतौर से प्रयुक्त ईंधन से नहीं चलाये जा सकते, बल्कि उन्हें चलाने के लिए एक विशेष प्रकार के ईंधन की आवश्यकता पड़ती है जिन्हें प्रणोदक (propellants) कहते हैं।

रॉकेट के प्रणोदन के लिए प्रणोदक ऊर्जा प्रदान करते हैं। प्रणोदक वैसे ईंधन हैं जिनके जलने पर अत्यधिक मात्रा में गैसें एवं ऊर्जा उत्पन्न होती हैं तथा इनका दहन बहुत तीव्र गति से होता है एवं दहन के पश्चात् कोई अवशेष नहीं बचता।

प्रणोदक के दहन के फलस्वरूप उत्पन्न गैसें रॉकेट के पिछले भाग से जेट के रूप में बहुत तीव्र गति से बाहर
निकलती है जिससे रॉकेट(Rocket meaning in hindi) की इच्छित दिशा में प्रणोदन होता है।

प्रणोदक तीन प्रकार के होते हैं-Types of rocket propellants


(i) द्रव प्रणोदक (Liquid propellants), (ii) ठोस प्रणोदक (Solid propellants) और (iii) मिश्रित प्रणोदक (Hybrid propellants)

(i) द्रव प्रणोदक(Liquid propellants)

ऐल्कोहॉल, द्रव हाइड्रोजन, द्रव अमोनिया, किरोसिन, हाइड्राजीन आदि द्रव प्रणोदक के उदाहरण हैं। द्रव ऑक्सीजन, द्रव फ्लुओरीन,
हाइड्रोजन परऑक्साइड अथवा नाइट्रिक अम्ल इनमें ऑक्सीकारक के रूप में प्रयुक्त होते हैं। द्रव H2 तथा O2 द्रव का मिश्रण, किरोसिन एवं द्रव O2 का मिश्रण, द्रव हाइड्रोजन एवं HNO3 का मिश्रण प्राय: रॉकेटों (rocket launch)में द्रव ईंधन के रूप में प्रयुक्त होते हैं।
4CH3NHNH2 + 5N2O4—->4CO2 + 9N2 + 12H2O

(ii) ठोस प्रणोदक(Solid propellants)

ठोस प्रणोदक ठोस ऑक्सीकारक एवं ठोस अवकारक पदार्थों का मिश्रण होता है, जो सामान्य ताप पर ठोस स्थिति में बिना क्रिया किए साथ-साथ रह सकता है। इसमें विभिन्न हाइड्रोकार्बन तथा क्लोरेट, परक्लोरेट या नाइट्रेट जैसा एक ऑक्सीकारक होता है । एक ऐसा ईंधन (space rocket)ऐलुमिनियम परक्लोरेट (ऑक्सीकारक) तथा ऐलुमिनियम चूर्ण, पॉली ब्युटाडाइन, ऐक्राइलिक अम्ल एवं अन्य योगजों (Odditives) का मिश्रण है। योगजों का कार्य ईंधन एवं ऑक्सीकारकों को एक साथ कायम रखना है।

(ii) मिश्रित प्रणोदक(Hybrid propellants)

यह प्रणोदक(rocket launch) ठोस अवकारक एवं द्रव ऑक्सीकारक पदार्थ के संयोग से बनता है जैसे-एक्राइलिक रबर (अवकारक) और डाई नाइट्रोजन टेट्रा ऑक्साइड (ऑक्सीजन) द्रव का मिश्रण ।

भू-उपग्रह का प्रक्षेपण(Satellite meaning in hindi)

यदि किसी पिण्ड को पृथ्वी सतह से सौ किलोमीटर ऊपर आकाश में भेजकर उसे करीब 8 किमी/से. का क्षैतिज वेग दिया जाए तो वह पिण्ड पृथ्वी के चारों ओर एक निश्चित कक्षा में परिक्रमा करने लगेगा। ऐसे पिण्ड को कृत्रिम उपग्रह कहते हैं ।

कृत्रिम उपग्रह को एक बहुक्रम रॉकेट(rocket launch) द्वारा कक्षा में स्थापित किया जाता है। कृत्रिम उपग्रह रेडियो-संचार व्यवस्था, कैमरा आदि यंत्रों से सजा रहता है। रिले उपग्रह पार्क-कक्षा में रखे जाते हैं ताकि टेलीविजन प्रोग्राम विश्व के एक भाग से दूसरे भाग तक लगातार संचारित किए जा सकें।

पृथ्वी सतह से पार्क-कक्षा में उपग्रह.पृथ्वी पर एक ही स्थान के ऊपर ठहरा होता है। पृथ्वी सतह से पार्क कक्षा (Rocket in hindi)की ऊँचाई करीब 3600 किमी. होती है और इस कक्षा में उपग्रह का वेग करीब 3.1 किमी./से. होता है।

कृत्रिम उपग्रह के महत्त्वपूर्ण उपयोग-

•मौसम के पूर्वानुमान करने में
• दूरदर्शन और रेडियो संचारण में
•संचार में
•मानव की अंतरिक्ष यात्रा में
• सूर्य से और अंतरिक्ष से आनेवाली विकिरणों के अध्ययन में
• कृषि-उत्पाद के सुधार में
•खनिज-सम्पत्ति के स्थान-निर्धारण में
• अंतरिक्ष के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने में जिससे सौर मंडल के ग्रहों और सभी आकाशीय पिंडों के विषय में नई जानकारी मिलती है।

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