उष्मीय प्रसार किसे कहते है(thermal expansion in Hindi)परिभाषा, उपयोग, उष्मीय प्रसार से जुडी बेसिक जानकारी

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उष्मीय प्रसार की परिभाषा- किसी वस्तु को गर्म करने पर उसकी लम्बाई, क्षेत्रफल और आयतन मे वृद्धि होने लगती है। चुकी यह वृद्धि गर्म करने पर होती है इसीलिए इसे उष्मीय प्रसार(thermal expansion)कहा जाता है।

•लम्बाई मे वृद्धि को α से सूचित किया जाता है।
•क्षेत्रफल मे वृद्धि को β से सूचित किया जाता है।
•आयतन मे वृद्धि को γ से सूचित किया जाता है।

उष्मीय प्रसार की व्याख्या -thermal expansion in Hindi

पदार्थ को ऊष्मा देने पर पदार्थ का आयतन बढ़ता है, क्योंकि ताप बढ़ने पर पदार्थ के अणुओं के बीच की दूरी बढ़ जाती है। लेकिन कुछ पदार्थ, जैसे पानी 0°C से 4°C के बीच.सिल्वर आयोडाइड (Silver iodide) 80°C से 140°C के बीच, तथा सिलिका -80°C के नीचे आदि का ताप बढ़ाने पर इनका संकुचन (Contraction) होता है।

जब हम पदार्थ को ठण्डा करते हैं तो ठीक विपरीत क्रिया होती है, अर्थात् पदार्थ के अणुओं के बीच की दूरी घटती है व उनका संकुचन होता है।

ठोसों का प्रसार (Expansion of solids)

जब किसी ठोस को गर्म करते हैं तो इसका सभी दिशाओं में प्रसार होता है, जिससे इसके आयतन में वृद्धि होती है। जब हम किसी लम्बी छड़ को गर्म करते हैं, तो इसके क्षेत्रफल में प्रसार इसकी लम्बाई की तुलना में बहुत कम होता है, अर्थात् छड़ की लम्बाई में वृद्धि होती है ।

लम्बाई में होने वाली इस वृद्धि को रेखीय प्रसार (Linear expansion) कहते हैं। यदि वस्तु का आकार एक आयताकार पटल के रूप में हो तो गर्म करने पर इसकी लम्बाई व चौड़ाई दोनों में वृद्धि होगी, फलतः उसके क्षेत्रफल में भी वृद्धि होगी। इसे क्षेत्रीय प्रसार’ (Superficial expansion) कहते हैं ।

यदि कोई वस्तु घन (Cube) के आकार की हो तो गर्म करने पर उसकी लम्बाई, चौड़ाई तथा ऊँचाई तीनो में वृद्धि होगी, फलतः वस्तु के आयतन में भी वृद्धि होगी। इसे आयतन प्रसार(Volume expansion) कहते है।

द्रवों का प्रसार (Expansion of liquids)-

ठोसों की भाँति द्रवों को भी गर्म करने पर उनका प्रसार होता है, लेकिन द्रवों के प्रसार व ठोसों के प्रसार(Solid expansion) में एक मुख्य अन्तर भी है। चूंकि द्रवों का ठोसों की भाँति अपना कोई आकार निश्चित नहीं होता है, अतः हम द्रवों के प्रसार में रेखीय या क्षेत्रीय प्रसार की बात नहीं करते।

द्रवों को गर्म करने से उनका सिर्फ आयतन बदलता है अर्थात् उनके आयतन में प्रसार (thermal expansion)होता है। दूसरा अन्तर यह है कि द्रवों को हमेशा किसी न किसी बर्तन में रखा जाता है।

जब द्रवों को गर्म किया जाता है तो बर्तन का भी प्रसार होता है जिससे प्रारम्भ में द्रवों का तल कुछ गिर जाता है तथा और अधिक गर्म करने पर द्रवों का प्रसार होता है व तल ऊपर उठता द्रवों को गर्म करने पर घनत्व में परिवर्तन-किसी पदार्थ के द्रव्यमान व आयतन के अनुपात को घनत्व कहते हैं।

जब किसी पदार्थ को गर्म किया जाता है तो इसका आयतन बढ़ता है जब कि द्रव्यमान नियत रहता है अत: पदार्थ का घनत्व गर्म करने पर घटता है। ठोसों को गर्म करने पर चूँकि उनके आयतन में परिवर्तन(Volume expansion) होता है।

इसलिए गर्म करने पर ठोसों का घनत्व लगभग नियत रहता है। द्रवों को गर्म करने पर उनके आयतन में प्रसार(Volume expansion) अधिक होता है फलतः गर्म करने पर द्रवों का घनत्व घटता (पानी को छोड़कर) जाता है।

पानी का असामान्य प्रसार (Anomalous expansion of water)—अधिकतर द्रवों को गर्म करने पर उनका आयतन बढ़ता बहुत कम है तथा घनत्व घटता है। लेकिन पानी का व्यवहार 0°C से 4°C के बीच ठीक उल्टा होता है।

यदि किसी पात्र में 0°C पर पानी को लेकर गर्म किया जाय तो 0°C से 4°C तक इसका आयतन घटता है व घनत्व बढ़ता है। 4°C पर पानी का आयतन न्यूनतम व घनत्व अधिकतम होता है।

4°C के आगे गर्म करने पर इसका व्यवहार सामान्य द्रवों की भाँति होता है अर्थात् 4°C के आगे गर्म करने पर इसका आयतन बढ़ता है व घनत्व घटता जाता है।

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