स्टैटिस्टिक्स’ (Statistics meaning in hindi) क्या होता है। परिभाषा और उपयोग समझे

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वर्तमान समय में संख्याओं का उपयोग हर क्षेत्र में बढ़ता जा रहा है। संख्याओं ने ज्ञान को (Statistics meaning in hindi)निश्चयात्मकता तथा स्थिरता दी है। इसका उपयोग बहुत प्राचीन काल से होता चला आ रहा है। कौटिल्य के अर्थशास्त्र तथा अबुल फजल के आइने-अकबरी में संख्याओं का उपयोग प्रचुर मात्रा में मिलता है |

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Statistics का हिंदी मतलब क्या होता है

Statistics का हिंदी मतलब होता है सांख्यिकीय या आकड़ा।इन आंकड़ों का उपयोग कर हम बड़े पैमाने पर चीजों को समझ सकते हैं जैसे-Data science, machine learning मे इसका बेहतर उपयोग होता है

धीरे-धीरे सांख्यिकीय विज्ञान का विकास होता रहा और वर्तमान समय में इसका क्षेत्र इतना बढ़ गया है कि इसने व्यावहारिक गणित के रूप में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर लिया है। आजकल इसका उपयोग अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, भौतिक विज्ञान, जीव-विज्ञान, कृषिविज्ञान आदि में सफलतापूर्वक किया जा रहा है, अब तो सांख्यिकीय विधि अनुसंधान की महत्वपूर्ण विधि बन
गयी है।

व्यावहारिक रूप में किस्म नियन्त्रण (Quality Control) बाजारों के पर्यवेक्षण (Market Surveys) तथा जनसंख्या आदि में सांख्यिकीय विधियों का उपयोग सफलता से हुआ है। देश की आर्थिक उन्नति का आधार तो भिन्न-भिन्न विधियों में इकट्ठे किये हुए आंकड़े हैं। अब तो सभी राजकीय विभागों तथा व्यापारिक संस्थाओं में सांख्यिकीय विभाग खोला गया है।

सांख्यिकी(Statistics meaning in hindi) का शाब्दिक अर्थ संख्या से संबंधित शास्त्र है अतः सांख्यिकी विज्ञान की वह शाखा है जिसका संबंध संख्याओं एवं संख्यात्मक आंकड़ों से हो।

अंग्रेजी का स्टेटिस्टिक्स (statistics in hindi) शब्द लैटिन भाषा के स्टेट्स (status) अथवा इटैलियन भाषा के स्टेटिस्टा (Statista) या जर्मन के स्टेटिस्टिक (Statistic) से बना है इन सभी शब्दों का अर्थ राजनीतिक शास्त्र से है।

शेक्सपियर और मिल्टन ने भी अपनी रचनाओं में स्टेटिस्ट (Statist) शब्द का प्रयोग किया जिसका अर्थ ऐसे व्यक्ति विशेष से है जो राज्य संचालन में महत्वपूर्ण सहायता देता है । इस प्रकार इस विषय की उत्पत्ति राज्य विज्ञान के रूप में हुई।

शासन को व्यवस्थित रूप से चलाने के लिए राज्य आँकड़े एकत्र करवाते थे जैसे सेवा की संख्या, रसद की मात्रा, कर्मचारियों का वेतन आदि। आंकड़ों की सहायता से राज्य के आय-व्यय का सही अनुमान लगाया जाता था। राजाओं की नीति बहुत अंशों तक आंकड़ों पर निर्भर करती थी इसलिए सांख्यिकी मूल रूप में राज्य के लिए उपयोगी विभिन्न पक्षों पर संख्यात्मक आंकड़ों का संग्रह

स्टैटिस्टिक्स’ (Statistics meaning in hindi) शब्द का तीन अर्थों में प्रयोग होता है—


(1)समक या आंकड़े, (Data),
(2) सांख्यिकीय माप (Statistical Measure), तथा (3) सांख्यिकीय विज्ञान (Statistics meaning in hindi)।

सामान्यतः यह प्रथम और तृतीय अर्थों में ही प्रयोग होता है। बहुवचन मे संख्याकी का तात्पर्य समंको अथवा आकड़ो से होता है जो किसी क्षेत्र में से सम्वन्धित संख्यात्मक मान होते हैं यथा-राष्ट्रीय आय के समंक(data), जनसंख्या के समंक(Data), उत्पादन के समंक(data) आदि।

किन्तु जब इसका प्रयोग एकवचन में होता है तो सांख्यिकी विज्ञान से है जिसमें समंकों का संकलन, प्रस्तुतीकरण, विश्लेषण तथा निर्वचन से संबंधित क्रियाओं, अर्थात् सांख्यिकीय विधियों(Statistics in hindi) का अध्ययन किया जाता है।

इस प्रकार यह एकवचन और बहुवचन दोनों रूपों में प्रयोग होता है। सांख्यिकी की परिभाषा जानने से पहले समंक और सांख्यिकी शब्दों का अन्तर जान लेना चाहिए। समंक(data)तथ्यों के समूह को व्यक्त करने वाले अंक होते हैं तथा सांख्यिकीय क्रियाएं इन्हीं समंकों को लेकर की जाती हैं जबकि इन समंकों (data)का संकलन, उनका अध्ययन तथा उनको सरल रूप में प्रस्तुत करना सांख्यिकी है।

सांख्यिकी की प्रमुख परिभाषाएं निम्न हैं-(Statistics defination meaning in hindi)

  1. समंक(data) अनुसंधान के किसी विभाग में तथ्यों के संख्यात्मक विवरण हैं, जिन्हें एक-दूसरे से संबंधित रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
  2. सांख्यिकी गणना(Statistics in hindi) का विज्ञान है।’
  3. ‘साख्यिकी को उचित रूप से औसतों का विज्ञान कहा जा सकता है।
  4. ‘सांख्यिकी वह विज्ञान है जो सामाजिक व्यवस्था को सम्पूर्ण मानकर सभी रूपों में उसका मापन करती है।’

सांख्यिकी विज्ञान, जिसका क्षेत्र प्राचीन काल में बहुत सीमित था, वर्तमान समय में अत्यधिक विस्तृत हो गया है। सांख्यिकी के क्षेत्र को अध्ययन की सुविधा के लिए दो प्रमुख भागों में बांटा जा सकता है –

(a) सांख्यिकीय रीतियां(Statistical Methods in hindi)

(b) व्यावहारिक सांख्यिकी (Applied Statistics in hindi)

(a) सांख्यिकीय रीतियां(Statistical Methods in hindi)

सांख्यिकी विज्ञान की विविध रीतियाँ हैं जिनके प्रयोग से अनुसंधान के किसी भी क्षेत्र के लिए सर्मकों का संकलन करके विश्लेषण किया जाता है, तत्पश्चात् उचित परिणाम निकाले जाते हैं। सांख्यिकीय रीतियों की सहायता से समंक एकत्र(data) किये जाते हैं तथा उन्हें सरल, समझने योग्य और तुलनात्मक बनाया जाता है। सांख्यिकीय(Statistics meaning in hindi) रीतियाँ उचित निष्कर्ष निकालने में भी सहायता प्रदान करती हैं।

प्रारम्भिक अवस्था में आंकड़े कच्चे पदार्थ की तरह होते हैं।
जिस प्रकार निर्मित माल के रूप में बदलने के लिए कच्चे पदार्थ को कई प्रारम्भिक प्रविधियों (Processes) से होकर निकलना पड़ता है, उसी प्रकार आंकड़ों को(Statistics in hindi)
प्रयोग में लाने योग्य बनाने के लिए कई विधियों की सहायता लेनी पड़ती है।

इन्हीं विधियों को सांख्यिकीय विधियाँ या रीतियाँ कहते हैं-
सांख्यिकीय विधियों का प्रयोग निम्न चरणों में किया जाता है-
(1) आंकड़ों का संकलन (Collection of data)

(2) आंकड़ों का वर्गीकरण (Classification of data)

(3) आंकड़ों का सारणीयन (tabulation of data)

(4) आंकड़ों का प्रस्तुतीकरण (presentation of data)

(5) आंकड़ों का विश्लेषण (Analysis of data)

(6) निर्वचन (Interpretation)

(7) पूर्वानुमान (Forecasting)

(1) आंकड़ों का संग्रह (Collection of Data)-

प्रत्येक सांख्यिकीय(Statistics in hindi) अनुसंधान के लिए यह सबसे पहला व आवश्यक कार्य है। समस्या के अनुसार ही यह निश्चित किया जाता है कि कब, कहाँ से, किस ढंग से और कितने
आंकड़े एकत्रित किए जायें जो समस्या पर समुचित प्रकाश डाल सकें।

(2) वर्गीकरण (Classification)-

इकट्ठे किये हुए आंकड़ों को अधिक सरल व तुलना योग्य बनाने के लिए किसी गुण विशेष के आधार पर विभिन्न वर्गों में बाँटते हैं। वर्गीकरण विशेषतः वजन, रंग, स्थान आदि किसी भी गुण पर आधारित हो सकता है। यह संक्षिप्तीकरण की दिशा में एक कदम है।

(3) सारणीयन (Tabulation)-

आंखों को अधिक अच्छा लगने,मस्तिष्क में आसानी से वैठ जाने तथा तुलना योग्य बनाने के लिए वर्गीकृत आंकड़ों को और अधिक सरल व स्पष्ट बनाया जाता है और सारणी बनाकर उसमें शीर्षक लिखकर संख्याओं को विभिन्न खानों में भरा जाता है।

(4)प्रस्तुतीकरण (Presentation)-

इस रीति के द्वारा इकट्ठा किए हुए आंकड़ों को केवल आंखों को अच्छा लगने वाला ही नहीं बनाया जाता बल्कि ऐसा भी प्रयल किया जाता है कि बिन्दु रेखाओं या चित्रों द्वारा उन्हें प्रदर्शित किया जाय ताकि उनकी एक अमिट छाप मस्तिष्क पर पड़ जाय ।

(5) विश्लेषण (Analysis)

विभिन्न विधियों के द्वारा आंकड़ों का विश्लेषण किया जाता है और उनकी विशेषताएं ज्ञात की जाती हैं। ये विधियाँ हैं – माध्य या औसत, अपकिरण, विषमता तथा सहसम्बन्ध का मापन । इन विधियों के द्वारा आंकड़ों की परस्पर तुलना भी की जाती है।

(6) निर्वचन (Interpretation)–

विश्लेषणात्मक अध्ययन के पश्चात् निर्वचन की विधि के द्वारा प्राप्त परिणामों से निष्कर्ष निकालते हैं।

(7) पूर्वानुमान (Forecasting)—

प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर भविष्य के बारे में अनुमान लगाया जाता है।

(b) व्यावहारिक सांख्यिकी (Applied Statistics in hindi)

सांख्यिकीय रीतियों से हमें सिद्धान्त का ज्ञान होता है। परन्तु उन रीतियों को व्यवहार में किस प्रकार प्रयोग किया जाय, इसका अध्ययन इस विभाग में किया जाता है। किसी समस्या से सम्बन्धित अंकों का किस प्रकार संग्रहण, विश्लेषण, प्रदर्शन व निर्वचन किया जाय, यह व्यावहारिक सांख्यिकी (Statistics meaning in hindi)का क्षेत्र है।

समस्या के समाधान में हम इसको मूर्तरूप देते हैं। जनसंख्या, उत्पादन, व्यापार या जन्म मरण से सम्बन्धित समकों को कैसे क्रियात्मक रूप दिया जाय वह इस विभाग का काम है।

एक महत्वपूर्ण व उपयोगी विज्ञान होते हुए भी सांख्यिकी की कुछ सीमाएं इस प्रकार हैं—Limitations of Statistics meaning in hindi

(1) सांख्यिकी व्यक्तिगत इकाइयों का अध्ययन नहीं करती है,
(2) सांख्यिकी के परिणाम असत्य सिद्ध हो सकते हैं यदि उनका अध्ययन विना सन्दर्भ के किया जाय,

(3) सांख्यिकी किसी समस्या के केवल संख्यात्मक स्वरूप का अध्ययन कर सकती है,

(4) सांख्यिकीय समंकों में एकरूपता और सजातीयता होना आवश्यक है,

(5) सांख्यिकी के नियम दीर्घकाल तथा औसत रूप में सत्य सिद्ध होते हैं,

(6) सांख्यिकीय रीति किसी समस्याके अध्ययन कि एक मात्र रीति नहीं है,

(7) सांख्यिकी का उचित प्रयोग उसकी प्रणालियों को ठीक तरह जानने वाला व्यक्ति ही कर सकता है,

(8) सांख्यिकी (Statistics in hindi)केवल साधन प्रस्तुत करती है, समाधान नहीं।

सांख्यिकी के कार्य (Function of Statistics meaning in hindi)-

एक महत्वपूर्ण समाज विज्ञान के रूप में सांख्यिकी मानव-विज्ञान के विकास में सराहनीय योग दे रही है। इसकी बढ़ती हुई उपयोगिता का मुख्य कारण है इसके द्वारा अनेक कार्यों का किया जाना। इसके महत्वपूर्ण कार्य निम्न हैं-

(1) सांख्यिकीय तथ्यों को निश्चयात्मकता प्रदान करना,

(2) सांख्यिकी जटिलता को सरल बनाती है

(3) सांख्यिकी व्यक्तिगत अनुभव व ज्ञान में
वृद्धि करती है

(4) सांख्यिकी सरलीकृत आंकड़ों की तुलना करती है और
सम्बन्ध मापन करती है,

(5) सांख्यिकी दूसरे विज्ञानों के नियमों की जाँच करती
है,

(6) सांख्यिकी नीति निर्माण में पथ-प्रदर्शन करती है,

(7) सांख्यिकी विस्तार का आभास करने की योग्यता प्रदान करती है,तथा

(8) सांख्यिकी वर्तमान तथ्यों का अनुमान करती है और भविष्य के लिए पूर्वानुमान करती है।

सांख्यिकी का महत्व (Importance of Statistics meaning in hindi)

मानव सभ्यता के विकास के साथ ही सांख्यिकी की उपयोगिता बढ़ने.लगी। आज तो मानव-ज्ञान के प्रत्येकक्षेत्र में यह प्रयुक्त होती है इसके निम्न प्रमुख महत्व हैं-

(1) सांख्यिकी मानव-समृद्धि का गणित है—

व्यवसायों की उन्नति व अवनति, लाभ व हानि, मुद्रा-स्फीति व संकुचन, मूल्यों में उतार-चढ़ाव, बेकारी,उत्पादन आदि मानव-सम्बन्धी इन बातों का पता सांख्यिकी(Statistics meaning in hindi) की सहायता से लगता है। अर्थशास्त्र के किसी भी नियम को ठीक तरह से समझने के लिए आंकड़ों का देना आवश्यक होता है। भविष्य की आर्थिक दशा का अनुमान भी इसी की सहायता से होता है।

(2) नियोजन के लिए अनिवार्य-

संसार का प्रत्येक राष्ट्र, चाहे वह शक्तिशाली हो या बहुत कमजोर, योजनाबद्ध विकास में लगा हुआ है। समुचित आंकड़ों के अभाव में कोई भी सुव्यवस्थित योजना बनाना असम्भव है।

पर्याप्त और विश्वसनीय समंकों के आधार पर ही उपलब्ध प्राकृतिक व मानवीय साधनों, पूंजी तथा अन्य आवश्यकताओं की ठीक-ठीक जानकारी सम्भव है। इन्हीं
समंकों से पता चलता है कि प्राथमिकता का क्रम क्या हो?संख्यात्मक तथ्यों के आधार पर ही अर्थ-व्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में लक्ष्य (Targets) निर्धारित होते हैं।
लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उपयुक्त व यथासमय वित्तीय साधनों के सांख्यिकीय (Statistics in hindi)अनुमान लगाए जाते हैं ।

(3) शासन-प्रबन्ध में सहायक-

समंक सरकारी प्रशासन के नेत्र (eyes) हैं। राज्य को ठीक तरह से चलाने के लिए सरकार को अस प्रकार की सूचनाएं रखनी पड़ती हैं। सरकार को यह जानकारी रखना आवश्यक है कि व्यापार की दिशा क्या है? औद्योगिक उत्पादन बढ़ रहा है या घट रहा है? आयात व निर्यात की गति कैसी है? कर-नीति कैसी है तथा उसका देश की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ रहा है? इन सब सूचनाओं के आधार पर ही सरकार अपनी विभिन्न नीतियाँ निश्चित करती हैं और शासन-व्यवस्था ठीक रखती है।

(4) व्यवसाय तथा वाणिज्य में सहायक

व्यवसाय तथा वाणिज्य को सफलतापूर्वक चलाने के लिए सांख्यिकी नितान्त आवश्यक है। अच्छे व्यापारियों के लिए यह जान लेना आवश्यक है कि जिन चीजों का वे व्यापार करते हैं

उनकी मांग कहां और कैसी है? भविष्य में मूल्य बढ़ने की आशा है या घटने की? पूर्ति की क्या दशा है? उस वस्तु के बारे में सरकार की नीति कैसी है

व्यापार की सफलता पर्याप्त समंकों पर निर्भर है। समकों के द्वारा ही व्यापारी माँग का पूर्वानुमान लगाता है और विज्ञापन व क्रय-विक्रय की नीतियों को निर्धारित करता है। माँग के पूर्वानुमान में उसे मुद्रा की मात्रा व उसकी क्रय-शक्ति, उपभोक्ताओं की रूचि व रीति-रिवाज, जीवन-स्तर, व्यापार-चक्र एवं मौसमी परिवर्तनों से सम्बन्धित समंकों का सहारा लेना पड़ता है। ये सभी बातें बहुत-कुछ सांख्यिकीय(Statistics in hindi) समंकों के आधार पर ही मानी जा सकती हैं।

समकों का संकलन (Collection of Data in hindi)

सांख्यिकीय रीतियों में समंकों का संकलन प्रथम महत्वपूर्ण रीति है। यदि इन समंकों में कोईदोष या त्रुटि रही तो यह सारे अनुसंधान को प्रभावित करेगा और निष्कर्ष अशुद्ध होगा। संकलन की दृष्टि से सर्मक दो प्रकार के होते है।

(1) प्राथमिक समंक (Primary Data)

ये वे समंक हैं जिन्हें अनुसंधान करने वाला अपने प्रयोग मेंलाने के लिए पहली बार इकट्ठा करता है। दूसरे शब्दों में, प्राथमिक समंक ऐसे मौलिक समंक होते हैं जो एकदम अछूते रहते हैं, उदाहरण के लिए यदि हमें इलाहाबाद जनपद की जनगणना करनी है तथा इस कार्य के लिए घर-घर जाकर जनसंख्या की गणना की जाये तो इस प्रकार एकत्रित की गई सामग्री को प्राथमिक सामग्री या समंक कहते हैं।

(2) द्वितीयक समंक (Secondary Data)

ये वे समंक हैं जिनका संकलन पहले से किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा किया जा चुका है और अनुसंधानकर्ता उनको ही प्रयोग में लाता है। यहाँ वह संकलन नहीं करता
बल्कि किसी अन्य उद्देश्य के लिए संकलित सामग्री को प्रयोग में लाता है।

उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति सरकार द्वारा प्रकाशित विदेशी आयात-निर्यात के समंकों का प्रयोग भुगतान संतुलन ज्ञात करने के लिए करता है तो यहाँ आयात-निर्यात के समंक उसके लिए द्वितीयक समंक होंगे। इस प्रकार की सामग्री अपने मौलिक रूप में नहीं होती है वरन् सारणी, प्रतिशत आदि में व्यक्त होती है।

प्राथमिक समंकों को एकत्र करने की रितियाँ-


प्राथमिक समंकों को एकत्र करने की रीतियाँ इस प्रकार हैं-

(1) प्रत्यक्ष व्यक्तिगत अनुसंधान के द्वारा,
(2) अप्रत्यक्ष मौखिक अनुसंधान के द्वारा,
(3) स्थानीय स्रोतों या संवाददाताओं द्वारा सूचना प्राप्ति के द्वारा,
(4)सूचना देने वालों द्वारा अनुसूचियों का भरना, तथा

(5) प्रगणकों द्वारा अनुसूचियों का भरना।

द्वितीयक समंकों को एकत्र करने की रीतियाँ-

द्वितीयक समंकों के प्रमुख स्रोत इस प्रकार है

(1) प्रकाशित स्रोत,
(2) अन्तर्राष्ट्रीय प्रकाशन,
(3) सरकारी प्रकाशन,
(4) अर्द्ध सरकारी संस्थाओं के प्रकाशन,
(5) आयोग व समितियों की रिपोर्ट,
(6) व्यापारिक संस्थाओं द्वारा,
(7) अनुसंधान संस्थाओं द्वारा,
(8) पत्र-पत्रिकाओं द्वारा,
(9) व्यक्तियों द्वारा, तथा
(10) संघों व संगठनों द्वारा ।

समंकों का वर्गीकरण तथा सारणीयन
(Classification and Tabulation of Data)

सांख्यिकीय सामग्री के संकलन के पश्चात समंकों की विशेषताओं अथवा गुणों के आधार पर उनको विभिन्न वर्गों में विभाजित किया जाता है। विभाजित करने की इस क्रिया को वर्गीकरण (Classification) कहते हैं। दूसरे शब्दों में, वर्गीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा उपलब्ध सांख्यिकीय(Statistics meaning in hindi) सामग्री को उनकी अनुरूपता तथा समानता के आधार पर विभिन्न वर्गों अथवा समूहों में विभाजित किया जाता है।

आदर्श वर्गीकरण के लक्षण

(1) वर्गीकरण की रीति व्यापक एवं विशाल होनी चाहिए ताकि कोई पद छूटने न पाये

(2) वर्गीकरण एक ही सिद्धान्त पर आधारित होना चाहिए।

(3) विभिन्न वर्गों एवं समूहों में पारस्परिक निर्भरता होनी चाहिए।

(4) वर्गीकरण उद्देश्यों के अनुरूप होना चाहिए।

(5) प्रत्येक वर्ग की इकाइयों में सजातीयता का गुण मौजूद होना चाहिए।

(6) वर्गीकरण संदेह रहित होना चाहिए।

(7) वर्गीकरण एक निश्चित आधार पर होना चाहिए।

(8) वर्गीकरण अत्यन्त स्पष्ट होना चाहिए।

वर्गीकरण के उद्देश्य (Objects of Classification)

समंकों के वर्गीकरण के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हो सकते हैं-

(1) समानता अथवा विषमता स्पष्ट करना–समकों के वर्गीकरण का एक प्रमुख उद्देश्य समंकों की समानता एवं असामनता को स्पष्ट करना होता है।
(2) सरल एवं सुविधाजनक बनाना—वर्गीकरण का एक उद्देश्य जटिल एवं अव्यवस्थित समंकों को सुव्यवस्थित करके सरल एवं सुविधाजनक बनाना है
(3) संक्षिप्त रूप प्रदान करना—विखरे हुए समंकों को वर्गीकरण की सहायता से समूह के रूप में बाँध कर उन्हें संक्षिप्त रूप प्रदान करना वर्गीकरण का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है ।
(4) तुलना योग्य बनाना—विखरे एवं अस्त-व्यस्त समंकों को वर्गीकरण की सहायता से भिन्न-भिन्न वर्गों में वर्गीकृत कर दिया जाता है, इससे वे तुलना योग्य बन जाते हैं। इस प्रकार वर्गीकरण का एक उद्देश्य समंकों को तुलना योग्य बनाना भी है।
(5) उपयोगी एवं आकर्षक बनाना—वर्गीकरण का एक उद्देश्य समंकों को उपयोगी बनाकर उन्हें आकर्षक रूप प्रदान करना है ताकि वे मानव के मस्तिष्क में आसानी से प्रवेश कर जायें तथा लम्बे समय तक स्मरण पटल में बैठे रहें।
(6) तर्क पूर्ण व्यवस्था वर्गीकरण एक तर्क पूर्ण व्यवस्था मानी जाती है जिसमें समंकों को व्यवस्थित तरीके से रखा जाता है।
(7) सारणीयन के लिए आधार–वर्गीकरण के विना सारणीयन सम्भव नहीं है। अतः वर्गीकरण का उद्देश्य सारणीयन के लिए आधार प्रस्तुत करना
(8) पारस्परिक सम्बन्ध स्पष्ट करना वर्गीकरण का एक उद्देश्य किसी घटना के कारण एवं परिणाम में सम्बन्ध स्थापित करना भी है।

वर्गीकरण की प्रमुख रीतियाँ (Major Methods of Classification)

वर्गीकरण की रीतियों का सांख्यिकीय(Statistics in hindi) तथ्यों से गहरा सम्बन्ध है। अत: वर्गीकरण की रीतियों का विवेचन करने से पूर्व सांख्यिकीय तथ्यों का विश्लेषण कर लेना आवश्यक है। सांख्यिकीय तथ्य दो प्रकार के होते हैं—संख्यात्मक तथा गुणात्मक। संख्यात्मक (Statistics meaning in hindi)तथ्य वे होते हैं जिनकी माप सम्भव होती है जैसे आयु,भार, ऊचाई आदि।

इसके विपरीत गुणात्मक तथ्य वे होते हैं जिनकी प्रत्यक्ष माप सम्भव नहीं है। गुणात्मक तथ्य के अन्तर्गत बेरोजगारी, बीमारी, ईमानदारी, भ्रष्टाचार, मनोवल, नैतिकता आदि आते हैं।

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