मोल क्या है। मोल के की परिभाषा, बेसिक जानकारी-Mole Concept in hindi

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Mole Concept in hindi-मोल की उत्पत्ति लैटिन भाषा के एक शब्द मोल्स (moles) से हुई है जिसका सीधा मतलब ढेर अथवा समूह (heap or pile)होता है। मोल एक रासायनिक मात्रक है और ऐसा माना जाता कि सन् 1896 ई० में मोल शब्द सर्वप्रथम विल्हेल्म ओस्टवाल्ड (Wilhelm Ostwald) द्वारा सार्वजनिक तौर पर प्रस्तावित किया गया। लेकिन इसे सन् 1997 ई० में IUPAC द्वारा इकाई के रूप में पहली बार मान्यता मिली। इस प्रकार पदार्थ की मात्रा (amount of substance) का S.I मात्रक मोल होता है।

मोल क्या है। मोल की व्याख्या-What is Mole Concept in hindi

किसी पदार्थ के अत्यन्त ही अल्प मात्रा में परमाणुओं, अणुओं अथवा आयनों की संख्या बहुत ही अधिक होती है जिसके कारण व्यवहारिक जीवन में इसका उपयोग असुविधाजनक होने लगा जिसके चलते एक नई इकाई मोल की खोज हुई । उदाहरण के लिए एक दर्जन से 12 वस्तुओं का बोध होता है जबकि एक शतक से 100 वस्तुओं का बोध होता है। ठीक इसी प्रकार एक मोल से वस्तु के 6.022 x 10^23 कणों (परमाणुओं, अणुओं अथवा आयनों) का बोध होता है। अर्थात् एक मोल सरसों का तात्पर्य 6.022 x 10^23 सरसों के दाने (कण) से है।

1 मोल = 6.022 x 10^23 परमाणु अथवा अणु अथवा आयन

यदि पदार्थ (तत्व अथवा यौगिक) परमाणु, अणु अथवा आयन में होंगे तो कणों की संख्या 6.022 x 10^23 भी क्रमशः परमाणु, अणु अथवा आयन में होंगे।

मोल किसी पदार्थ की मात्रा (द्रव्यमान) एवं संख्या दोनों को निरूपित करता है। अतः किसी पदार्थ का 1 मोल उस पदार्थ की वह मात्रा है जिसमें उसके मौलिक कणों की संख्या 6.022×10^23 होती है। इस प्रकार एक मोल कहने से उस पदार्थ के परमाणु द्रव्यमान अथवा आण्विक द्रव्यमान का बोध होता है एवं इसके साथ-साथ उसके भार में इसके परमाणुओं की संख्या अथवा अणुओं की संख्या अथवा आयनों की संख्या 6.022 x 10^23 है, इसका भी बोध होता है। मतलब मोल, संख्या एवं द्रव्यमान दोनों का प्रतीक है।

मोलर द्रव्यमान किसे कहते है। Molar Mass of the substance in hindi

किसी पदार्थ का एक मोल का द्रव्यमान (सहति) उस पदार्थ का मोलर द्रव्यमान कहलाता है एवं पदार्थ के मोलर द्रव्यमान को Mसे दशति हैं। इसका मात्रक ग्राम प्रति मोल (C/mole) होता है। मोलर को हिन्दी भाषा में ग्राम अणुकता अथवा मोलीय कहा जाता है। आजकल मोलर को मात्रक के तौर पर g/mole के स्थान पर सिर्फ लिखा जाता है।

मोलर द्रव्यमान (संहति) तत्व और यौगिक (आण्विक पदाथ) दोनों का होता है। तत्व का मोलर द्रव्यमान उसके परमाणु द्रव्यमान के आंकिक (संख्यात्मक) मान के बराबर होता है जबकि यौगिक (आण्विक पदार्थ ) का मोलर द्रव्यमान उसके आण्विक द्रव्यमान के आंकिक (संख्यात्मको) मान के बराबर होता है।

इस प्रकार किसी पदार्थ के मोलर द्रव्यमान को पदार्थ के परमाण्विक अवस्था में ग्राम परमाण्विक द्रव्यमान और पदार्थ के आण्विक अवस्था में ग्राम आण्विक द्रव्यमान भी कहा जा सकता है।

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