ग्रैगर मैंडल की सम्पूर्ण जीवनी हिंदी – Biography of Gregor Mendel in hindi

You are currently viewing ग्रैगर मैंडल की सम्पूर्ण जीवनी हिंदी – Biography of Gregor Mendel in hindi
  • जन्म-22 जुलाई, 1822
  • जन्म स्थान-चेकोस्लोवाकिया
  • निधन-6 जनवरी, 1884

ग्रेगोर मेण्डेल(gregor mendel biography)ने अपने अथक परिश्रम से ये सिद्ध किया कि माता-पिता के लक्षण पीढ़ी दर पीढ़ी संतानों में जाते हैं। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि आनुवांशिकी ही जीवों के विकास का आधार है।

ग्रैगर मैंडल का जन्म -Gregor Mendel biography

जीवन का विकास कैसे हुआ और जीवन के क्रमिक विकास में किन कारकों का महत्त्व रहा इसकी जिज्ञासा शुरू से ही मानव समाज को रही है। इस प्रश्न का समुचित उत्तर तलाशा । आनुवंशिकी के नियमों का प्रतिपादन करने वाले महान वैज्ञानिक मैंडल ने

उन्होंने सबसे पहले यह बताया कि बच्चे में मां-बाप की विशेषताएं किस तरह से आ जाती हैं और पितृ परम्परा के अनुगमन के नियम क्या हैं ।

ग्रैगर मैंडल का जन्म ऑस्ट्रिया के एक माली परिवार में जुलाई, 1822 में हुआ था। इनकी शिक्षा वियाना विश्वविद्यालय में सम्पन्न हुई। शिक्षा समाप्त करने के पश्चात वे एक ब्रून (जिसे आजकल ब्रनो कहते हैं) में आ गए और वहां पढ़ाना आरम्भ कर दिया। यहां वे प्रकृति विज्ञान विषय में शिक्षा देते थे।

वास्तविकता तो यह है कि बचपन (Gregor Mendel biography) से ही इनकी प्रकृति विज्ञान में विशेष रूचि थी।

ग्रैगर मैंडल का आनुवांशिकी से सम्बंधित प्रयोग -gregor mendel pea plant experiment

आनुवांशिकी से सम्बंधित प्रयोग करने के लिए मैंडल ने अपनी मॉनेस्ट्री के बगीचे में अनेक मटर के पौधे उगाए। इन मटर के पौधों से इन्होंने अनेक प्रयोग किए।

आनुवांशिकी के अनेक गुणों का अध्ययन करने के लिए उन्होंने मटर के पौधे के तनों की लम्बाई, फूलों की स्थिति तथा रंग, मटर के दानों की आकृति आदि अनेक चीजों पर पूर्णरूपेण ध्यान दिया। अनेक प्रयोगों(gregor mendel experiments)से उन्होंने अनेक निष्कर्ष निकाले और निश्चय किया कि प्रत्येक कण का एक दूसरे से क्या सम्बंध है।

मैंडल के मटर के लम्बे और बौने पौधों के बीच में संकरण कराया और पाया कि प्रथम पीढ़ी में सभी पौधे लम्बे थे लेकिन प्रथम पीढ़ी के आपसी संकरण से प्राप्त दूसरी पीढ़ी के पौधों में लम्बे तथा बौने पौधों का अनुपात क्रमशः 3:1 था।

इन प्रयोगों से मैंडल ने यह निष्कर्ष निकाला कि लम्बेपन का गुण प्रभावी होता है तथा बौनेपन का गुण अप्रभावी होता है। दूसरी पीढ़ी में यह गुण बहुत अधिक प्रभावी नहीं होता।

दूसरे प्रयोग में मटर के ऐसे पौधों में संकरण कराया गया, जिनमें से एक के बीज गोल तथ पीले थे तथा दूसरे में झुरींदार तथा हरे थे। इस संकरण के फलस्वरूप पहली पीढ़ी में गोल तथा पीले बीज वाले पौधे हुए लेकिन जब पहली पीढ़ी का आपसी संकरण कराया गया तो दूसरी पीढ़ी में गोल, पीले, हरे, झुरींदार पीले तथा झुरींदार हरे बीज वाले पौधे प्राप्त हुए। इनका अनुपात 9:3:3:1 था।

इस प्रयोग से यह सिद्ध हो गया कि मटर के दानों का गोल तथा पीलेपन का लक्षण झुरींदार तथा हरेपन के लक्षणों से अधिक प्रभावी है।

अपने प्रयोगों से प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर जौहान्न मैंडल(gregor mendel laws)ने सन् 1865 में आनुवंशिकता के तीन निम्न नियम प्रतिपादित किए-

  1. प्रभाविता का सिद्धांत (Law of Dominance) : दो विपरीत गुणों वाले पौधों के संकरण से पैदा हुई संतान में केवल एक ही लक्षण पैदा होता है और जो लक्षण संतान में प्रकट होता है उसे प्रभावी और दूसरे को अप्रभावी लक्षण कहा जाता है।
  2. विसंयोजन का नियम (Law of Segregation) : जब संतान में दो विभिन्न गुणों वाले कारक साथ-साथ हों तो दोनों मिश्रित नहीं होते हैं। वे अक्सर एक-दूसरे से अलग-अलग ही प्रकट होते हैं।
  3. स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment)
    : दो या दो से अधिक विपरीत गुणों वाले करक युग्मक बनते समय स्वतंत्र रूप से बंट जाते हैं। संयोजन के भी ये स्वतंत्र रूप से आपस में मिलकर विभिन्न गुणों वाले जीव उत्पन्न करते हैं।

मैंडल ने जिन कारणों को आनुवांशिक लक्षणों के संचार का आधार माना इन्हें ही अब जीन (Gene) कहा जाता है। ये जीन कोशिकाओं (Cells) पर स्थिर होते हैं

तथा जनन के समय एक पीढ़ी (माता, पिता) से दूसरी पीढ़ी (संतान) में स्थानांतरित होते हैं। आज आधुनिक आनुवांशिकता का सिद्धांत काफी जटिल है। इसमें जीन की आनुवांशिकता की इकाई (Unit) है।

मैंडल (gregor mendel contribution)ने जो निष्कर्ष निकाले उसके लिए उन्होंने नौ वर्ष तक अनुसंधान किए, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि उनके जीवन काल में उनके आविष्कारों को विश्व के दूसरे वैज्ञानिकों ने कभी भी नहीं जाना।

उन्हीं के ये नियम सन् 1900 में दूसरे वैज्ञानिकों द्वारा दुबारा से खोजे गए। उनके मरने के बाद ही वैज्ञानिक मैंडल के योगदानों को जान पाये।

मैंडल(gregor mendel discovery)ने अपने प्रयोगों से यह भली-भांति सिद्ध कर दिया था कि संतान अधिकांश लक्षणों में माता-पिता के समान होती है फिर भी सभी गुणों में वह उनके समान नहीं होती। संतान कभी भी पूर्ण रूप से माता-पिता की प्रतिलिपि(Prototype) नहीं होती। एक ही जाति के दो जीवों में कोई न कोई असमानता अवश्य ही होती है। इस असमानता को विभिन्नता कहते हैं।

ग्रैगर मैंडल की मृत्यु -gregor mendel Death

इस प्रकार आनुवंशिकता तथा विभिन्नतायें जीवों के विकास का मूल आधार हैं। जीव-विज्ञान का यह महान आविष्कारक 6 जनवरी, 1884 को भगवान को प्यारा हो गया।

ये article ” ग्रैगर मैंडल की सम्पूर्ण जीवनी हिंदी – Biography of Gregor Mendel in hindi ” पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया. उम्मीद करता हुँ. कि इस article से आपको बहुत कुछ नया जानने को मिला होगा