हैनरी कैवेंडिश की जीवनी – Biography of Henry Cavendish in hindi

हैनरी कैवेंडिश की जीवनी – Biography of Henry Cavendish in hindi
  • जन्म-अक्टूबर, 1731
  • जन्म स्थान-नीस शहर, फ्रांस
  • निधन-1810 ई.

रसायनशास्त्र ही नहीं विद्युत के क्षेत्र में भी हैनरी कैवेंडिश ( Henry Cavendish ) ने बड़े विलक्षण अनुसंधान किए। न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांतों का उपयोग करके उन्होंने.पूरी पृथ्वी का भार भी नाप-तोलकर रख दिया था। हाइड्रोजन तथा नाइट्रोजन की खोज, वायुमंडल का भौतिक विश्लेषण, पानी का तात्त्विक विभेदन आदि का श्रेय हैनरी को जाता है जिसने उन्हें विज्ञान के दिग्गजों में ले जाकर खड़ा कर दिया।

हैनरी कैवेंडिश का जन्म – henry cavendish biography in hindi

कैवेंडिश का जन्म फ्रांस के नीस शहर में 1731 के अक्टूबर महीने में हुआ था।वे इंग्लैंड में लार्ड चार्ली तथा लेडी एन. कैवेंडिश के दो पुत्रों में पहली संतान थे। हेनरी के पिता लार्ड चार्ली एक माने हुए वैज्ञानिक थे जिसे मैक्सिमम मिनिमम थर्मामीटर के आविष्कार की बदौलत लंदन की रॉयल सोसायटी की ओर से कॉप्ले मेडल मिल चुका था।

बचपन में ही उनकी मां स्वर्ग सिधार गई। हेनरी की शिक्षा-दीक्षा काफी सादा तौर तरीकों से हुई। 11 साल की उम्र में उन्हें हैकनी के बोर्डिंग स्कूल में भेज दिया गया और 15 साल का होने पर उन्हें डिग्री की पढ़ाई के लिए कैम्ब्रिज भेज दिया गया।

हेनरी और उनके भाई फ्रेडरिक, गणित और भौतिकी के अध्ययन के लिए लंदन.और उसके बाद पेरिस निकल गए। 40 तक पहुंचते-पहुंचते वे एक भारी जायदाद के उत्तराधिकारी बन गए।

लड़कियों में उन्हें कोई रुचि नहीं थी। परिणामस्वरूप वह आजीवन अविवाहित रहे। वह अपनी सम्पत्ति की व्यवस्था करने के सम्बंध में भी नहीं सोच सकते थे।
दुनिया से उनका कुछ नाता था तो वह रॉयल सोसायटी के माध्यम द्वारा ही। 1760 में उन्हें इसका फेलो मनोनीत किया गया—तब उनकी आयु केवल 29 वर्ष थी।

हैनरी कैवेंडिश के अविष्कार -henry cavendish inventions

उस युग की महान समस्या थी—आग। उस युग के वैज्ञानिक आग के फ्लोजिस्टन के सिद्धांत में विश्वास रखते थे। फ्लोजिस्टन को द्रव्य से पृथक अब तक किसी ने नहीं किया था। कैवेंडिश ने इस फ्लोजिस्टन पर परीक्षण करने का निर्णय लिया। कैवेंडिश ने अपनी निजी प्रयोगशाला (henry cavendish discoveries) में परीक्षण शुरू किया। लोहे, जस्ते, और टिन के टुकड़े लेकर उन्होंने सल्फ्यूरिक एसिड वाले बरतन में लोहे के टुकड़े डाले तो वहां से बुलबुले उठ-उठकर ऊपर की ओर आने लगे।

और, ऊपर, इन बुलबुलों को एक किस्म के गुब्बारों में भर लेने की व्यवस्था थी। ये गुब्बारे भरे गए। एक में लोहे और गंधक के तेजाब के, दूसरे में जस्ते और गंधक के तेजाब के, तीसरे में टिन और गंधक के तेजाब के बुलबुले थे।

और बाकी तीन में उसी प्रकार हाइड्रोक्लोरिक एसिड में छोड़े गए लोहे, जस्ते और टिन की प्रतिक्रिया से उत्पन्न गैस के बुलबुले थे। किंतु क्या यह सचमुच, फ्लोजिस्टन थी? कैवेंडिश ने छहों गैसों के नमूनों को जलाकर देखा। हरेक से वही नीली-पीली लपट निकली। किंतु इसका निश्चय होना चाहिए। छहों का वही भार। हलकी-सभी हलकी, और सभी का वही वजन!

एकबार परीक्षण और किया गया और पता लगा कि इस तरह पैदा हुई ‘हवा’ का परिमाण प्रयुक्त धातु के परिमाण पर निर्भर करता है, जिसके आधार पर एक गलत निष्कर्ष कैवेंडिश (Biography of Henry Cavendish in hindi) ने यह निकाल लिया कि यह हवा धातु की उपज है अम्ल की नहीं। उनका विचार था कि उन्होंने फ्लोजिस्टन को सचमुच उसकी निजी अवस्था में मिश्रण से पृथक् कर लिया है, और अपने इन अंवेषणों को उन्होंने रॉयल सोसायटी के सदस्यों.के संमुख घोषित भी कर दिया।

इसके कुछ वक्त बाद लैवायजिए ने आकर फ्लोजिस्टन के इस सिद्धांत का उन्मूलन किया और बताया कि कैवेंडिश (henry cavendish hydrogen) की वह ‘ज्वलन-वात’ जिसे वह फ्लोजिस्टन समझ रहे थे, वास्तव में हाइड्रोजन था।

हैनरी कैवेंडिश और रॉयल सोसाइटी -about henry cavendish and Royal society in hindi

1784 में कैवेंडिश ने अपने इन वायु-सम्बंधी परीक्षणों को रॉयल सोसायटी सम्मुख प्रकाशित किया। इतने अध्यवसाय के परिणाम बहुत ही आश्चर्यकारी थे—फ्लोजिस्टन—(कैवेंडिश का हाइड्रोजन को दिया नाम) जब फ्लोजिस्टन-रहित हवा (ऑक्सीजन) के साथ मिलती है तो पानी की उत्पत्ति होती है। और परीक्षणों की गणनाओं से उसे यह सबूत भी मिल चुका था कि हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के 2.1 अनुपात में मिलने पर ही यह पानी पैदा होता है। कितने ही विपुल परिमाण में कैवेंडिश ने दोनों गैसों को मिलाकर दोनों के मूल परिणामों के तुल्य परिमाण में ही पानी पैदा करके दिखाया।

कैवेंडिश ने परीक्षणों henry cavendish experiment द्वारा सिद्ध कर दिया कि जल, एक तत्त्व न होकर, दो वर्ण-हीन गैसों का एक मिश्रण है।

इन परीक्षणों में कैवेंडिश ने यह भी जान लिया कि जो हवा हम सांस में अंदर ले जाते हैं उसका 20 प्रतिशत ऑक्सीजन है। हाइड्रोजन और हवा के धमाके का
सूक्ष्म अध्ययन करके ही वे इस नतीजे पर पहुंचे थे। कैवेंडिश ने देखा कि बिजली.के स्फुलिंग (स्पार्किंग) के द्वारा हाइड्रोजन से मिली हवा जब फैलती है तो कुछ अम्ल भी उससे पैदा हो जाता है। विश्लेषण किया गया और पता चला यह वायुमंडल में विद्यमान नाइट्रोजन के कारण है, विद्युत का स्फुलिंग नाइट्रोजन और ऑक्सीजन को भी मिला सकता है।

प्रकृति में जो खाद बनती है वह इसी जरिए से ही पैदा होती है आकाश से जब बिजली गिरती है तो वह वर्षा के साथ नाइट्रोजन ऑक्सीजन के साथ मिलकर, खाद के रूप में पृथ्वी को उपहार-रूप में मिल जाती है। कैवेंडिश ने परीक्षण कर-करके शायद वायुमंडल की गैसों को, बूंद-बूंद निचोड़ते हुए, अलग कर लिया था।

बिजली की चिनगारियां पर चिनगारियां-और ऑक्सीजन पर ऑक्सीजन छोड़ते चलो कि हवा में नाइट्रोजन बाकी रह ही न जाए। किंतु ‘हवा’ का एक बुलबुला-सा अब भी उसमें कहीं रह गया था—यह थी ‘आर्गन’—जिसकी गणना ‘विरल’ गैसों में होती है, और जिसकी मात्रा हमारे वातावरण में 1 प्रतिशत से भी कुछ कम ही है।

हैनरी कैवेंडिश की मृत्यु – henry cavendish death

कैवेंडिश की मृत्यु 1810 में 79 वर्ष की आयु में हुई। मृत्यु के समय भी उनकीnदेखभाल करने वाला कोई अपना न था। डर्बी में उनकी अंत्येष्टि विधि सम्पन्न -जहां चर्च वालों ने इस सनकी साइन्सदां के लिए एक स्मारक भी खड़ा किया हालांकि जीवन-भर उन्होंने इन धर्मों से, धार्मिक सम्प्रदायों से, कुछ वास्ता नहीं रखा था।

मात्र रसायनशास्त्र के अध्ययन से ही कैवेंडिश संतुष्ट न थे, विद्युत के क्षेत्र में भी उनके अनुसंधान बड़े विलक्षण हैं। न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांतों का उपयोग उन्होंने पृथ्वी की आपेक्षिक गुरुता भी, परिगणित कर ली थी—एक तरह से उन्होंने सचमुच, पृथ्वी का भार भी उन्होंने नाप-तोलकर रख दिया था।

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