दुनिया हमें रंगीन क्यों दिखाई देती है। रंगों का मतलब-About color in hindi

दुनिया हमें रंगीन क्यों दिखाई देती है। रंगों का मतलब-About color in hindi

दोस्तों क्या आपने कभी सोचा है। दुनिया में इतनी सारी चीजें हैं। और सभी का रंग(color) अलग-अलग क्यों है। सभी वस्तुए एक जैसी दिखाई क्यों नहीं देती है। दोस्तों आज इस आर्टिकल में हम समझेंगे क्यों दुनिया की सभी वस्तुओं का color अलग अलग होता है।(color in hindi)

वस्तुओं के रंग का विज्ञान (Colour of objects)-

जब प्रकाश किरणें वस्तुओं पर आपतित होती हैं तो वे उनसे परावर्तित होकर हमारी आँखों पर पड़ती हैं और वस्तुयें हमें दिखायी देने लगती हैं। वस्तुयें प्रकाश का कुछ भाग परावर्तित करती हैं तथा कुछ भाग अवशोषित (absorb) भी करती हैं।

प्रकाश का परावर्तित भाग ही वस्तुओं का Colour निर्धारित करता है । जैसे-जब हम किसी गुलाब के फूल को सफेद प्रकाश में देखते हैं तो इसकी पंखुड़ियाँ लाल व पत्तियाँ हरी दिखाई देती हैं।

पंखुड़ियाँ सफेद प्रकाश का लाल भाग परावर्तित करती हैं तथा हरे Colour की पत्तियाँ सफेद प्रकाश का हरा भाग परावर्तित करती हैं। शेष रंग अवशोषित हो जाते हैं।

लेकिन यदि वही गुलाब का फूल हरे प्रकाश में देखा जाये तो उसकी पत्तियाँ तो हरी ही दिखायी देगी, लेकिन पंखुड़ियाँ अब काली दिखायी देती हैं क्योंकि पंखुड़ियाँ हरे प्रकाश को अवशोषित कर लेती (color in hindi)हैं।

यदि वही गुलाब का फूल पीले Colour में देखा जाये तो पंखुड़ियाँ व पत्तियाँ दोनों ही काली दिखायी देती हैं क्योंकि ये दोनों ही पीले प्रकाश को अवशोषित कर लेती हैं।

इस प्रकार कोई वस्तु जिस Colour की दिखायी देती है वह उसको परावर्तित करती है तथा शेष Colour को अवशोषित कर लेती है।

अभी आप जिस पेज को पढ़ रहे हैं वह सफेद प्रतीत होता हैं क्योंकि यह प्रकाश के सभी रंगों को परावर्तित कर देता है, जिनका mixture प्रभाव सफेद होता है तथा अक्षर काले रंग के प्रतीत होते हैं क्योंकि अपने ऊपर पड़ने वाले प्रकाश का पूर्णतयः अवशोषित कर लेते हैं।

किसी वस्तु का रंग उनके द्वारा परावर्तित प्रकाश के रंग पर निर्भर करता है। दूसरी ओर पारदर्शी वस्तुओं का रंग उनसे पार (transmit) होने वाले प्रकाश के रंग पर निर्भर करता है।

हरे काँच को जब सूर्य कि प्रकाश में देखते हैं तो वह हरा दिखायी देता है क्योंकि वह हरे रंग(color in hindi) के प्रकाश को छोड़कर शेष सभी रंगों का अवशोषण कर लेता है तथा हरे प्रकाश को पार जाने देता है।

इसी प्रकार यदि लाल रंग की प्लेट को हरे रंग में देखा जाये तो । वह हरे प्रकाश का अवशोषण कर लेगी तथा काली दिखायी देगी।

रंगों का मिश्रण (Mixing of Colours)

नीले, हरे व लाल रंगों को परस्पर उपयुक्त मात्रा में मिलाकर अन्य रंग(color in hindi) प्राप्त किये जा सकते हैं तथा इनको बराबर-बराबर मात्रा में मिलाने से श्वेत प्रकाश प्राप्त होता है।

लाल+हरा=पीला
•लाल+नीला=मैजेंटा
•हरा+नीला=पिकॉक ब्लू
•हरा+मैजेंटा=सेफद
•लाल+पीकॉक ब्लू =सफेद
•नीला + पीला =सफेद

नीले, हरे व लाल रंगों को प्राथमिक रंग (Primary Colour) कहते है। अन्य रंगों जैसे-पीला,मैंजेटा, पीकॉक-ब्लू आदि को द्वितीयक रंग (secondary colour) कहा जाता है।

जो दो रंग परस्पर मिलने से सफेद प्रकाश उत्पन्न करते हैं उन्हें पूरक रंग (complementary colours) कहते हैं।

दैनिक जीवन में प्रयोग किये जाने वाले रंगों (Pigments)को परस्पर मिलाने पर रंग-त्रिभुज के अनुसार रंग नहीं प्राप्त होते ।

जैसे-यदि नीले व पीले रंग के पेंट (paints) को मिलाया जाये तो वे रंग-त्रिभुज के अनुसार सफेद रंग न देकर हरे पेंट का रंग बनाते है। ऐसा इसलिये होता है कि प्रयोग किये जाने वाले पेंट में अशुद्ध (Impure) रंग होते हैं।

जब नीले व पीले रंग के पेंट को मिलाकर सफेद प्रकाश(color in hindi) मे देखते हैं तो वे प्रकाश के हरे रंग को परावर्तित करके शेष रंगों का अवशोषित कर लेते हैं। इस प्रकार हरे रंग का मिश्रण दिखायी देता है।रंगीन टेलीविजन में प्राथमिक रंगों-लाल, हरे व नीले रंग (color in hindi)का प्रयोग लिया जाता है।

यह article “दुनिया हमें रंगीन क्यों दिखाई देती है। रंगों का मतलब-About color in hindi ” पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया उम्मीद करता हुँ। कि इस article से आपको बहुत कुछ नया जानने को मिला होगा।