White Dwarf Star | मरे हुए तारों कि लाशें

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हम इंसानों को पृथ्वी पर पैदा हुए 60लाख साल से भी ज्यादा हो चुके है ओर इतने सालो मे हमने अपने आप को बहुत विकसित कर लिया है. हम विकास के उस कर्म मे पहुँच चुके है. कि जबतक हमें कही ना कही से energy मिलती रहेगी हम ज़िंदा रहेंगे.
विज्ञान के अनुसार इंसान कि माने तो हम हर उस planet पर जीवित रह सकते है जो कि उसके तारे के habitable zone मे आता हो.

अगर हम universe कि बात करे तो यह एक ना एक दिन खत्म हो ही जयेगा. इसमें मौजूद galaxy ओर star भी खत्म हो जायेगे. अगर हम universe के time scale कि बात करे. तब सूर्य या उस जैसे बड़े तारे कुछ अरब सालो मे ही खत्म हो जयेंगे. इस खत्म होते universe मे हमारे पास एक ऐसी चीज होंगी जिससे हम कई खरब सालो तक energy ले सकए है. Universe मे हम इन्हे” white dwarf star” कहते है. जो कि मरे हुए तारों कि लाश होती है.

ओर यह ही हमारे universe मे ज़िंदा रहने कि आख़री उम्मीद हो सकती है.

*आखिर ये “white dwarf star” क्या होते है और यह कैसे universe के खत्म होने के बाद भी कई कई करोड़ खरब साल तक जीवित रह सकते है ?

एक star किस तरह से खत्म होगा यह उसके mass पर निर्भर करता है. जिन तारो के mass हमारे सूर्य के mass से 0.08-8गुना तक होता है. वो कम mass वाले तारे माने जाते है. सूर्य से कई गुना बड़े तारे बहुत ही जल्दी जलकर कुछ ही खरब सालो मे एक बड़े ही घातक explosions मे खत्म होते है. जिन्हे हम supernova कहते है. बाकि कुछ तारे blackhole मे बदल जाते है. या फिर neutron star मे.
हमारी आकाशगंगा मे इस तरह के मात्र 3% ही star है. बाकी 97% तारों का अंत “white dwarf star” के रूप मे होता है.

  • “white dwarf star ” कैसे बनते है.

“White dwarf star” दो तरह से बनते है.
पहला छोटे छोटे star जिन्हे हम red dwarf भी कहते है. ये कई सो अरब वर्षो तक जलने के बाद बनते है. पर medium size के star जैसे कि हमारा सूर्य थोड़े अलग तरिके से nature show करते है. ऐसे star nuclear energy कि वजह से चमकते है. यह energy वह खुद क्रिएट करते है. इनकी gravity इतनी पावरफुल होती है कि इन्हे इस हद तक compress कर देती है. कि इनके अंदर nuclear fusion शुरू हो जाये.
यह nuclear fusion ज्यादातर star के core मे ही होता है लेकिन एक ऐसा समय भी आता है जब यह fusion core से बढकर coreshell मे भी होने लगता है. इस पुरी प्रक्रिया को साइंटिस्ट steller evolution कहते है. जो star के mass पर ही टिकी होती है. इस प्रक्रिया के दौरान तारे के बनावट और उसके akaar मे काफ़ी changes आते है. और इसके अंडर बने elements बाहर कि और निकलने लगते है. एक ऐसा समय भी आता है जब तारे कि gravity कमजोर हो जाती है. तो star का nuclear fusion रुक जाता है.
Red dwarf star मे जब fusion बंद होता है. तब वह धीरे धीरे “white dwarf” star मे बदल जाते है. पर सूर्य जैसे तारो मे जब fusion रुक जता है. तब भी gravity काम कर रही होती है.जो star को धीरे धीरे अंदर कि और खींचती है जिससे वह star . Size मे earth के बराबर ही रह जता है. इतना compressed होने के बाद भी इससे लाइट खत्म नही होती है. और इसमें का matter और ज्यादा से ज्यादा गर्म होता रहता है. जो कि देखने मे एक सफ़ेद बोल जैसा दीखता है साइंटिस्ट इसे “white dwarf star “कहते है. जो कि वास्तव मे मरे हुए तारों कि लाश होती है.

*क्या हम “white dwarf stars ” को telescope से देख सकते है ?

“White dwarf star” आकर मे बहुत छोटे होते है और इनके पास चमक भी बहुत कम होती है. जिस कारण इन्हे universe मे ढूढ़ना
बहुत ही मुश्किल हो जता है. पर वैज्ञानिक के पास इन्हे खोजने के दो तरिके है….

(1)वैज्ञानिक किसी तारे के अजीब motion को नोट करते है जो कि थोड़ा अपनी position से आगे पीछे होता है तारे का यह अजीब motion तब संभव हो सकता है जब उसके पास mass मे कुछ ज्यादा भारी चीज हो, यदि उसे देखा ना जब सके तो जरूर “black hole ” हो सकती है. पर अधिकतर बार जब वहा telescopes से वहा नज़र डाली जाती है तो वहा “white dwarf star ” ही होते है.
हमें आसमान मे सबसे चमकीला तारा जो सीरियस दीखता है उसका भी एक “white dwarf” पडोसी है जिसका नाम सीरियस B है. सीरियस तारों को हम अपनी आँखों से देख सकते है. आसमान मे यह सबसे चमकीला तारा होगा जिसका color एकदम white होगा.

(2)दूसरा तरीका इस तरिके मे वैज्ञानिक “white dwarf star ” को nebula कि मदद से खोजते है. जब star अपने core मे fusion खत्म कर दिया है तब उसकी shell जिसमे ज्यादा helium होती है वह जलने लगती है helium के जलने के कारण एक shockwave बनती है जिसे हम thermal flash भी कहते है. जो कि star के सारे matter को space मे छोड़ देती है. यह नज़ारा देखने मे काफ़ी अच्छा लगता है. जिसे वैज्ञानिक planetary nebula कहते है जब सारा matter space मे छोड़ दिया जाता है. तब nebula के अन्दर जो matter बनता है वह “white dwarf ” होता है. अधिकतर बार हम किसी nebula को देखते है. तो इसके centre मे “whitw dwarf ही बनता है.

पृथ्वी जितने size के होने के बावजूद इनमे अपने star का आधा mass होता है. जिसका मतलब यह है कि यह इतने ज्यादा dense होते है कि अगर आप इनमे से एक चम्मच matter भी निकलेंगे तो इसका weight एक बड़ी ही कार के बराबर होगा. इनकी surface gravity भी पृथ्वी कि तुलना मे एक लाख गुनी ज्यादा होती है.यह gravity इतनी ज्यादा है है कि अगर हम इसपर उतरेंगे तो कुचल कर ही मर जायेंगे.

*क्या इनके आस पास हम किसी ग्रह पर इंसानों को बसा सकते है ?

वैसे तो इनके आस पास life का होना बहुत ही मुश्किल है पर यह असंभव नही है. इसके लिए किसी भी planet को इतना करीब होना चाहिए ताकि वह planet ” habitable zone ” मे आ सके. जहाँ पानी liquid फॉर्म मे मे रहता है.

  • ऐसा क्या है कि यह “white dwarf star ” कई खरब वर्षो तक बिना किसी हलचल के रह सकते है ?

इसे जानने के लिए वैज्ञानिक इसके structure पर नज़र डालते है. दरसल “white dwarf star” बहुत ही गर्म object होते है. इन्हे universe के सबसे गर्म object मे count किया जाता है. इसके अंदर हीट कुछ इस तरह से फसी होती है कि उसके बाहर जाने का कोई रास्ता ही नही दीखता है. वह केवल इसके ऊपरी सतह se ही space मे जा सकता है. पर space अधिकतर खाली रहता है. इसलिए यह process काफ़ी धीमा हो जाता है. इसलिए इसमें कई खरब खरब साल लगते है. जो कि universe कि age से बहुत ही ज्यादा है. “White dwarf star ” के इसी खासियत कि वजह से वैज्ञानिक इन्हे universe के खत्म होने के बाद आख़री घर मानते है.
भले ही इन्हे ख़त्म होने मे कई खरब साल लगे पर यह भी खत्म होते है. “White dwarf star “जब अपनी पुरी हीट space मे chod देते है तब यह black dwarf मे change हो जाते है. जिसमे कोई भी हीट और energy नही बचती पर ये black dwarf बिना हीट और energy के भी इतना massive होते है.कि कोई इनके पास जाये तो तुरंत कुचल कर मर सकता है. पुरी हीट खत्म हो जाने के बाद black dwarf इतने ठंडे हो जाते है कि absolute zero temperature हासिल कर लेते है. जो कि universe कि सबसे कम temperature होती है. Universe मे इससे ज्यादा ठंडा फिर कुछ नहीं बचता. Black dwarf इतने dark होते है कि हम इन्हे कभी देख hi नही सकते है. वैसे ये कहना मुश्किल है कि black dwarf और कितने साल तक ज़िंदा रह सकते है. वैज्ञानिक मानते है कि fundamental partical इलेक्ट्रान, proton, neutron जब तक खत्म नही होंगे. तब तक यह black dwarf भी खत्म नही हो सकते है. और एक समय मे quantum tunneling करके एक बड़े ionosphere मे बदल जायेंगे. और फिर कभी नही मरेंगे .