प्रकाश की रहस्यमई दुनिया – Light definition in hindi

प्रकाश की रहस्यमई दुनिया – Light definition in hindi

प्रकाश एक विद्युतचुंबकीय तरंग है. जो किसी वस्तु से परिवर्तित होकर हमारे रेटिना पर उसकी प्रतिबिम्ब बनाता है. जिससे वस्तु हमें दिखती है.

विज्ञान मे प्रकाश क्या है -Light meaning in hindi

इसका सही-सही वर्णन करना कठिन कार्य है क्योंकि प्रकाश भी प्रकृति के बड़े-बड़े रहस्यमय अचम्भों में से ही एक है। प्रकाश प्रकृति का एक अजूबा है। इसे केवल इसके गुणों व कार्यों द्वारा ही समझा जा सकता है न कि इसके मौलिक रूप में।

अन्य शक्तियों की भान्ति यह भी । एक अद्वितीय शक्ति है जिसे इसकी गति, बारम्बारता, तरंग लम्बाई, वर्णक्रम रंग-भेद आदि द्वारा ही जाना जाता है। प्रकाश के रहस्य (Light definition ) को समझने हेतु समय-समय पर अनेक प्रयोग होते रहे हैं। न्यूटन की राय में प्रकाश की सूक्ष्म कणिकाएं प्रकाश स्रोत से सूक्ष्म- सी गोलियों के रूप में उठती आती हैं जबकि अन्य धारणाओं के अनुसार प्रकाश के कण ब्रह्माण्ड में ठीक उसी प्रकार की तरंगें उत्पन्न करती हैं जैसी कोई पत्थर को जलाशय में फेंकने से उत्पन्न होती हैं।

प्रकाश का कणों व तरंगों वाला स्वरूप तो कई परीक्षणों द्वारा सिद्ध हो चुका है, फिर भी प्रकाश के रहस्यमयी (light definition ) स्वरूप की सम्पूर्ण जानकारी हेतु खोज जारी है। प्रकाश की दूरी व गति के संदर्भ में कई तथ्य निश्चित हो चुके हैं।

प्रकाश वर्ष क्या है – Light year definition

प्रकाश किरण द्वारा शून्य में एक वर्ष में तय की गई दूरी-इकाई को प्रकाश-वर्ष कहा जाता है। यह दूरी लगभग 58.8 खरब मील या 96.46 खरब कि. मी. है।

प्रकाश की गति क्या है about speed of light definition

प्रकाश की सम्पूर्ण व्याख्या (Light definition ) करना कठिन है, फिर भी इसे स्पष्ट रूप में सही-सही नापा जा सकता है। इस संदर्भ में प्रकाश की गति को नापना एक वास्तविक खोज कहा जा सकता है। प्रकाश की गति को नापने के कई परीक्षण (experiment) व प्रमाण उपलब्ध हैं।

अभी कुछ दशक पहले ही में अल्बर्ट पिशैलसन ने सिद्ध किया कि प्रकाश की गति 1,86,284 मील प्रति सैकिंड (3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड ) होती है, जिसे आज लगभग सही माना जाता है। वर्ष भर में प्रकाश 58.8 खरब मील की दूरी तय करता है, जिसे प्रकाश-वर्ष कहा जाता है। यह गणना प्रकाश की प्रति सैकिंड गति को वर्ष में कुल-सैकेंडों से गुणा करने से ज्ञात की जाती है।

प्रकाश की प्रकृति क्या है – what is the nature of light definition in hindi

यूं तो प्रकाश सफेद (Light definition) दिखाई देता है, लेकिन इन्द्रधनुष सात रंगों का सम्मिश्रण है।यह सतरंगीस्वरूप प्रकाश के दर्पण के किनारों, साबुन के बुलबुलों की पृष्ठों, जल की बूंदों, समपार्श्व आदि पर पड़ने से भी दिखाई देता है। इस सब प्रक्रियायों में प्रकाश किरणें टूटकर अपने मौलिक रंग तत्त्वों में वितरित हो सप्तरंगों में समानान्तर रेखाओं के रूप में परावर्तित हो जाती हैं।

ये रंग अपनी निजी तरंग लम्बाई के अनुरूप ही सुव्यवस्थित हो एक छोर से दूसरे छोर तक दिखाई देते सतरंगी के आकार में प्रस्तुत हो उठते हैं जिसे अंगरेज़ी शब्द VIBGYOR (violet, indigo, blue, green, yellow, orange, red) से भी सम्बोधित किया जा सकता है। ये रंग क्रमशः बैंगनी, नील-सा, गहरा नीला, हरा पीला, नारंगी तथा लाल होते हैं। इनमें तीन रंग अर्थात् नीला, हरा व लाल ही प्राथमिक कोटि के हैं तथा अन्य सभी रंग इन्हीं के मिश्रण से बनते हैं।

लाल रंग की तरंग-लम्बाई सबसे बड़ी होती है तथा दूसरे छोर पर नीली व इससे सम्बन्धित रंगों जैसे बैंगनी की तरंग-लम्बाई क्रमशः सबसे छोटी होती है। इन तरंग-लम्बाईयों में अन्तर होने के परिणामस्वरूप ही प्रातः उगता हुआ तथा सायं डूबता हुआ सूर्य अपने प्रकाश की लाल रंग की लम्बी-लम्बी तरंगें दूर-दूर तक फैलाकर स्वयं भी लाल रंग का प्रतीत होता है और अपने चारों ओर सुहावनी लालिमा युक्त एक अधूरा दृश्य उत्पन्न करता है। प्रकाश का यह स्वरूप तो देखते ही बनता है।

इसी प्रकार सप्तरंगी इन्द्रधनुष का दृश्य भी अत्यन्त खूबसूरत होता है। यह कहा जा सकता है कि प्रकाश की तरंग-लम्बाई पर ही निर्धारित होता है इसका रंग
वितरण-प्रकाश का प्रत्येक रंग अपनी तरंग-लम्बाई के अनुरूप ही अपवर्तन के कारण भिन्न-भिन्न मात्रा में वितरित हो, अपने भिन्न रंगों को प्रस्तुत करता है। यदि प्रकाश का कोई अपवर्तन न हो तो यह सफेद रंग का ही प्रतीत होता है, परन्तु अपवर्तन होने पर बहुरंगी दिखाई देता है।

रंग प्रकाश के स्वरूप का ही एक गुण है। वस्तु जिस रंग की दिखाई देती है, वही रंग उससे परावर्तित होता है, जबकि अन्य सभी रंग उसमें जज़्ब या अपचूसित हो जाते हैं। अतः रंग प्रकाश का स्वरूप है न कि किसी वस्तु का।

प्रकाश विशेषतया सदा ही सफेद रंग में व्याप्त रहता है चाहे इसका स्रोत सूर्य हो अथवा अन्य कोई object । इसमें सात रंग होते हैं जिनमें केवल तीन प्रमुख तथा शेष चार उप-मुख्य रंग होते हैं। प्रकाश में ये रंग ऐसे समाविष्ट रहते हैं कि सामान्यतौर पर उनका निजी रंग किसी भी प्रकार से अलग-अलग दिखाई नहीं देता। इन रंगों की झलक आपस में इस प्रकार घुल-मिलकर
रहती है कि प्रकाश में इनका निजी स्वरूप दिखाई नहीं देता।

प्रकाश में समाये रंग केवल तभी पृथक्-पृथक् देखे जा सकते हैं जब प्रकाश को अपवर्तन द्वारा फैलाकर देखा जाता है। प्रकाश के रंगों को पृथक्-पृथक् फैलाने के उपकरण को वर्णक्रम अथवा स्पैकट्रम की संज्ञा दी जाती है। अपवर्तन द्वारा ये रंग विसर्जित होकर स्पष्ट दिखाई देते हैं।

क्योंकि प्रकाश के रंगों की मात्रा व तीव्रता प्रकाश की तरंग-लम्बाई पर निर्भर करती है, अतः देखने में लाल रंग की तरंगें सबसे लम्बी और बैंगनी रंग की तरंगें सबसे छोटी होती हैं। अन्य रंगों की तरंगें भी इन परिसीमाओं के भीतर ही रहती हैं। प्रकाश की तरंग-लम्बाई इतनी छोटी होती है कि इन्हें माइक्रोमीटर के लाखवें अंशों में ही नापा जाता है।

प्रकाश की दोहरी प्रकृति क्या है-Dual Nature of light meaning in hindi

प्रकाश से संबंधित सभी घटनाओं की व्याख्या के लिए तरंग-सिद्धांत और क्वांटम-सिद्धांत दोनों ही आवश्यक हैं। अतः, यह माना गया कि प्रकाश की द्वैत प्रकृति (dual nature) होती है, अर्थात प्रकाश में कणिका (फोटॉन) एवं तरंग दोनों ही गुण विद्यमान हैं। कुछ घटनाओं में प्रकाश तरंग के समान व्यवहार करता है और कुछ घटनाओं में कणों (matter) के समान व्यवहार करता है।

प्रकाश की इस द्वैत प्रकृति को देखते हुए फ्रांसीसी वैज्ञानिक लूइस डी ब्रोग्ली (Louis D Broglie) ने 1924 में यह सिद्धांत प्रतिपादित किया कि द्वैत प्रकृति न केवल प्रकाश में ही होती है, बल्कि द्रव्य-कणों (material particles) में भी होती है। उनके अनुसार, जब कोई द्रव्य-कण जैसे इलेक्ट्रॉन या प्रोटॉन, गतिमान होता है, तो वह तरंग की भाँति व्यवहार करता है, अर्थात गतिमान द्रव्यकणों से तरंगें संबद्ध (associated) होती है। इन तरंगों को द्रव्य-तरंगें (matter waves) या डी ब्रोग्ली तरंगें (de Broglie waves) कहा जाता है।

प्रकाश कैसे काम करता है – some special fact’s about light definition in hindi

जब सफेद प्रकाश किसी भी वस्तु पर पड़ता है तब प्रकाश की कुछ ही तरंग-लम्बाइयां परावर्तित होती हैं जबकि अधिकांश उस वस्तु द्वारा ही absorb कर ली जाती हैं। जिस रंग की परत शरीर को और अधिक प्रकाश के प्रभाव से सुरक्षित बनाए रखती है। जिस पर न केवल शरीर का रंग निर्भर होता है, वरन् सिर के बालों का रंग भी इसी के अनुसार रहता है। यह पदार्थ बालों की कोशिकाओं की जड़ों में स्थित रहता है

तथा बालों का रंग इस पदार्थ की मात्रा पर निर्भर करता है। यदि यह पदार्थ अधिक हो तो बालों.का रंग गहरा होगा और यदि इसकी मात्रा कम हो तो बालों का रंग उतना ही हल्का होगा।

बढ़ती आयु के साथ-साथ इस पदार्थ की मात्रा घटते जाने के कारण बालों का रंग फीका पड़ते-पड़ते
अन्ततः सफेद हो जाता है।

सूर्य का प्रकाश एक प्रकार की रोग निवारक औषधि का कार्य करता है। इसकी पराबैंगनी किरणे शरीर में एक रासायनिक परिवर्तन घटित कर विटामिन ‘डी’ का उत्पादन तो करती ही हैं, इसके अतिरिक्त यह प्रकाश शरीर की संक्रामण विरोधी कोशिकाओं को सक्रिय बनाकर संक्रामिक रोगों का निवारण भी करता है। इतना ही नहीं। सूर्य के प्रकाश से तो शरीर की मांसपेशियां भी सशस्त व स्वस्थ हो उठती हैं तथा स्नायुतन्त्र उत्तेजित हो जाता है.

इसमें कोई दो राय नहीं कि सूर्य का प्रकाश औषधि का काम करता है। परन्तु यह भी सत्य है कि किसी भी औषधि का अति अथवा आवश्यकता से अधिक सेवन लाभ की बजाए हानिकारक ही होता है। सूर्य के प्रकाश के विषय में भी यही सत्य है। इसकी अति व तीव्रता से सुरक्षित रहना ही हितकर है।

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