आयन क्या है? आयन का मतलब, परिभाषा(Ion meaning in hindi)

आयन क्या है? आयन का मतलब, परिभाषा(Ion meaning in hindi)

आयन क्या है(What is ion)

कुछ यौगिक आवेशित कणों के बने होते हैं। आवेशयुक्त ये कण आयन कहलाते हैं। जिन कणों पर धन आवेश रहता है, वे धनायन(cations) और जिन कणों पर ऋण आवेश रहता है, वे ऋणायन(anions) कहलाते हैं।

धातु और अधातु के संयोग से बना यौगिक आवेशित कणों से बनता है। धातु परमाणु पर धन आवेश और अधातु परमाणु पर ऋणावेश रहता है। उदाहरण के तौर पर, सोडियम क्लोराइड को लें। यह सोडियम परमाणु (धातु) और क्लोरीन परमाणु (अधातु) के संयोग से बनता है। अतः, सोडियम क्लोराइड के अणु (NaCl) में सोडियम परमाणु धनायन (Na+) और क्लोरीन परमाणु ऋणायन (CI-) के रूप में रहते हैं।

सोडियम क्लोराइड में इन दोनों प्रकार के आयन परस्पर स्थिरवैद्युत आकर्षण बल (electrostatic force of attraction) द्वारा जुड़े रहते हैं। कणों पर आवेश की उत्पत्ति के संबंध में हम अगले अध्याय ‘परमाणु-संरचना के अंतर्गत पढ़ेंगे।

संयोजकता

किसी तत्त्व के परमाणु अन्य तत्त्वों के परमाणुओं से संयोग करके यौगिक बनाते हैं। इसका कारण यह है कि तत्त्व के परमाणु में दूसरे तत्त्वों के परमाणुओं के साथ संयोग करने की प्रवृत्ति या क्षमता होती है। किसी तत्त्व के परमाणु की इसी प्रवृत्ति को तत्त्व की संयोजन क्षमता या संयोजकता (combining capacity or valency) कहते हैं।

विभिन्न तत्त्वों की संयोजन क्षमताएँ या संजोकताएँ भिन्न-भिन्न होती है। तत्त्वों की संयोजकताएँ हाइड्रोजन के सापेक्ष.निर्धारित होती हैं, क्योंकि हाइड्रोजन का आजतक ऐसा कोई भी.यौगिक (हाइड्राजोइक अम्ल, N3H को छोड़कर) ज्ञात नहीं है जिसमें किसी तत्त्व के एक से अधिक परमाणु हाइड्रोजन के एक परमाणु से संयुक्त हो। दूसरे शब्दों में, हाइड्रोजन की संयोजन क्षमता या संयोजकता न्यूनतम होती है जिसे 1 मान लिया गया है।

हाइड्रोजन की संयोजकता को प्रामाणिक मानकर अन्य तत्त्वों की संजोकताएँ निर्धारित की जाती हैं।

उदाहरण-

(i) हाइड्रोजन और क्लोरीन परस्पर संयोग करके हाइड्रोजन क्लोराइड नामक यौगिक बनाते हैं। इस यौगिक में हाइड्रोजन का एक परमाणु क्लोरीन के एक परमाणु के साथ संयुक्त रहता है। अतः, हाइड्रोजन और क्लोरीन की संयोजकताएँ समान होती हैं, अर्थात क्लोरीन की संयोजकता 1 है।

(ii) कैल्सियम का एक परमाणु हमेशा हाइड्रोजन के दो परमाणुओं के साथ संयोग करके कैल्सियम हाइड्राइड बनाता है। अतः, कैल्सियम की संयोजन क्षमता हाइड्रोजन से दुगुनी है, अर्थात कैल्सियम की संयोजकता 2 है।

(iii) ऑक्सीजन का एक परमाणु हाइड्रोजन के दो परमाणुओं के साथ संयोग करके जल बनाता है। अतः, ऑक्सीजन की संयोजन क्षमता हाइड्रोजन से दुगुनी होती है, अर्थात ऑक्सीजन की संयोजकता 2 होती है।

ऊपर के उदाहरणों में ब्रोमीन, कैल्सियम और ऑक्सीजन की संयोजकताएँ क्रमशः 1, 2 और 2 हैं। इस प्रकार हम देखते हैं कि हाइड्रोजन के साथ संयोग करने की क्षमताएँ विभिन्न तत्त्वों की भिन्न-भिन्न होती हैं।

लेकिन कुछ तत्त्व ऐसे भी हैं जो हाइड्रोजन के साथ बिलकुल संयोग नहीं करते हैं, किंतु वे क्लोरीन के साथ संयोग करते हैं। उदाहरण के लिए, सोना हाइड्रोजन के साथ संयोग नहीं करता है,किंतु वह क्लोरीन के साथ संयोग करके यौगिक (AuCl3) बनाता है, जिसमें सोना का एक परमाणु क्लोरीन के तीन परमाणुओं के साथ संयुक्त रहता है। अतः, इस यौगिक में सोना की संयोजकता क्लोरीन की संयोजकता से तिगुनी है। चूंकि क्लोरीन की संयोजकता 1 होती है, अतः सोना की संयोजकता 3 है।

कुछ ऐसे भी तत्त्व होते हैं जो किसी अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित कर देते हैं। ऐसी स्थिति में, उस तत्त्व का एक परमाणु अम्ल से जितने हाइड्रोजन परमाणुओं को विस्थापित करता है, वही उस तत्त्व की संयोजकता होती है। उदाहरण के लिए, जस्ता का एक परमाणु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल या सल्फ्यूरिक अम्ल से हाइड्रोजन के दो परमाणुओं को विस्थापित कर सकता है। अतः ,
जस्ता की संयोजकता 2 होती है।

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